शहंशाह-ए-ग़ज़ल मेहदी हसन यह दुनिया छोड़ चले

शहंशाह-ए-ग़ज़ल मेहदी हसन यह दुनिया छोड़ चले

By: | Updated: 01 Jan 1970 12:00 AM

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<b>इस्लामाबाद: </b>ग़ज़ल
गायकी और पाकिस्तानी फिल्मी
दुनिया के चोटी के गायक मेहदी
हसन का लंबी बीमारी के बाद
निधन हो गया है. वे 84 साल के थे.
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मेहदी हसन का निधन बुधवार को
कराची के आग़ा खान अस्पताल
में हुआ जहां वह काफी अर्से
से इलाज करा रहे थे.
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आग़ा खान अस्पताल प्रशासन का
कहना है कि बुधवार की सुबह
साढ़े नौ बजे उनकी तबियत
अचानक बिगड़ना शुरू हुई और 12.15
मिनट पर उनका निधन हो गया.
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मेहदी हसन को शहंशाह-ए-ग़ज़ल
कहा जाता है. इनका जन्म 18
जुलाई 1927 को भारतीय राज्य
राजस्थान के एक गांव लुना में
हुआ था.
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पाकिस्तान के गठन के बाद 1947
में वह राजस्थान से कराची चले
गए, जहां उन्होंने ज़िंदगी के
मुश्किल हाताल का सामना किया.
उन दिनों उन्होंने साइकल
दुकान पर पंक्चर बनाने का काम
किया और फिर एक मोटर मेकेनिक
वर्कशॉप से जुड़ गए.
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वह बचपन से ही गायकी के
रहस्यों से परिचित थे और इस
दौरान उन्होंने रियाज़ को
जारी रखा. संगीत की दुनिया
में उनके सफर का बाक़ायदा
आगाज़ 1952 में रेडियो
पाकिस्तान के कराची
स्टूडियो से हुआ और उन्होंने
अपने करियर में 25 हज़ार से
ज्यादा फिल्मी और गैर फिल्मी
गीत और गज़लें गाईं.
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सन् 1960 और 70 की दहाई में उनका
शुमार अवाम के सबसे पसंदीदा
गायकों में होता था.
पाकिस्तान सरकार ने उनके
योगदान को स्वीकार करते हुए
कई पुरस्कार दिए.
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मेहदी हसन की गायकी भारत और
पाकिस्तान में समान रुप से
लोकप्रिय है और भारत में स्वर
कोकिला लता मांगेश्कर ने एक
बार मेहदी हसन की गायकी को
'भगवान की आवाज़' कहा था.
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राजस्थान की सरकार ने मेहदी
को भारत में इलाज की पेशकश भी
की थी और पिछले महीने ही
राज्य के मुख्यमंत्री अशोक
गहलोत ने विदेश मंत्री एसएम
कृष्णा से अपील की थी कि
मेहदी हसन और उनके खानदान को
भारत आने के लिए वीज़ा दिया
जाए.
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<b>बीमारी</b>
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मेहदी हसन को सांस लेने में
तकलीफ के बाद कराची में आगा
खान अस्पताल में दाखिल कराया
गया था, जहां उनका निधन हो गया.
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जियो टीवी के मुताबिक हसन के
बेटे आरिफ ने उनके निधन की
पुष्टि करते हुए बताया, "मेरे
पिता बीते 12 साल से बीमार थे
लेकिन इस साल उनकी हालत और
बिगड़ गई थी."
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गजल गायकी के उस्ताद मेहदी
हसन के घरवालों के मुताबिक
उनको फेफड़े और सीने के साथ
कई दूसरी बीमारियों ने भी
जकड़ रखा था. गले में कैंसर
जैसी बीमारी के बाद मेहंदी
हसन की सेहत पिछले 12 सालों से
ठीक नहीं चल रही थी.
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मेहदी हसन ने आजीविका के लिए
कभी साइकिल की दुकान पर काम
किया तो कभी मोटर मेकेनिक का
काम किया. लेकिन दुश्वारियों
के बीच मेहदी हसन ने सुर
साधना नहीं छोड़ी और गजल
गायकी के बेताज बादशाह बने.<br />
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