अमेरिका में 2014 के मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान शुरू

By: | Last Updated: Tuesday, 4 November 2014 5:05 PM
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वाशिंगटन: अमेरिका में 2014 के मध्यावधि चुनावों के लिए आज मतदान शुरू हो गया. इस चुनाव से रिपब्लिकन पार्टी के अमेरिकी सीनेट पर नियंत्रण मजबूत करने की उम्मीद है और यह चुनाव 2016 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले सत्ता के संतुलन को प्रभावित कर सकता है.

 

प्रतिनिधि सभा में सभी 435 सीटें, सीनेट की 100 में 36 सीटें और 50 में 36 प्रांतों में गवर्नर चुनावों में काफी कुछ दांव पर लगा हुआ है. वाशिंगटन डीसी की तरह इन प्रांतीय विधानसभाओं, नगर परिषदों के लिए भी चुनाव हो रहे हैं.

 

प्रतिनिधि सभा में पहले से ही नियंत्रण रखने वाले रिपब्लिकन को सीनेट में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सिर्फ छह सीटों की जरूरत है.

 

मध्यावधि चुनाव के राष्ट्रीय प्रभाव होते हैं और इसके नतीजे यह तय करेंगे कि ओबामा अपने कार्यकाल के आखिरी दो साल में क्या कर सकते हैं. कांग्रेस के साथ नहीं देने पर ओबामा की चिंताएं बढ़ सकती हैं क्योंकि वह इबोला और इराक एवं सीरिया में मजबूत होते इस्लामिक स्टेट आतंकवादियों का मुकाबला कर रहे हैं जबकि अर्थव्यवस्था में वृद्धि दिखाने के लिए भी वह मशक्कत कर रहे हैं.

 

तीन दर्जन से अधिक भारतीय मूल के अमेरिकी देश में कई पदों के लिए चुनावी दौड़ में शामिल हैं जिनमें गवर्नर से लेकर सदन तक, प्रांतीय विधानसभा से लेकर नगर परिषद तक शामिल हैं. इस सूची में शीर्ष पर निक्की हेली हैं जो दक्षिण कैरोलिना का गवर्नर पद चाहती हैं और कैलिफोर्निया में प्रतिनिधि सभा के लिए एमी बेरा चुनावी दौड़ में हैं. ये दोनों ही अपना पुनर्निर्वाचन चाहते हैं.

 

यंग रो खन्ना ने भारतीय मूल के अमेरीकियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. वह अपने ही डेमोक्रेटिक नेता माइक होंडा को चुनौती पेश कर रहे हैं. भारतीय समुदाय प्रथम हिंदू सांसद तुलसी गबार्ड के चुने जाने को लेकर भी आशावादी है जो हवाई से फिर से निर्वाचित होना चाहती हैं. ताजा चुनाव सर्वेक्षण यह बताते हैं कि लोग ओबामा प्रशासन से निराश हैं. उनके मुताबिक कई सीटों पर कड़ा मुकाबला हो सकता है. उम्मीदवारों की नजरें छोटे समुदायों पर हैं खासतौर पर एशियाई मूल के अमेरिकी पर.

 

शायद यह पहला मौका है जब उम्मीदवार भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय के साथ भी विशेष बैठकें कर रहे हैं और देश में उनके बढ़ते राजनीतिक महत्व को मान्यता दे रहे हैं.

 

उदाहरणस्वरूप, वर्जीनिया से सीनेटर मार्क वार्नर न सिर्फ भारतीय मूल के कई समुदायों के कार्यक्रम में शरीक हो रहे हैं बल्कि उनसे वोट की अपील करते हुए क्रांफ्रेंस फोन कॉल भी कर रहे हैं. ऐसा ही सिलिकन वैली में माइक होंडा का मामला है. वह फिर से चुना जाना चाहते हैं और भारतीय मूल के रो खन्ना उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं.

 

लुसियाना प्रांत के गवर्नर एवं भारतीय मूल के बॉबी जिंदल ने अपने समर्थकांे को एक ईमेल संदेश में कहा, ‘‘मेरा मानना है कि चुनावी रात रिपब्लिकन पार्टी और अमेरिका के लिए अच्छी होगी. हालांकि सिर्फ चुनाव जीतना ही काफी नहीं होगा..अपने निर्वाचित अधिकारियों को जवाबदेह बनाना होगा.’’ कोलंबिया जिला परिषद के लिए चुनावी दौड़ में शामिल किशन पुत्ता ने कहा कि यह बड़ा दिन है.

 

यदि वह चुनाव जीतते हैं तो वह अमेरिकी राजधानी के निर्वाचित परिषद में भारतीय मूल के प्रथम अमेरिकी होंगे. वाशिंगटन पोस्ट ने आज कहा है कि तीखे बयानबाजी वाले और काफी खर्चीले चुनाव प्रचार के बाद ऐसा लगता है कि सीनेट डेमोक्रेटिक पार्टी के हाथों से निकल सकती है.

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