‘भारत-अमेरिका संबंधों पर न पड़े अंतरराष्ट्रीय संकट की छाया’

By: | Last Updated: Thursday, 25 September 2014 6:35 AM
An Opportunity to Reenergize US India Relations says lisa curtis

हेरीटेज फाउंडेशन की लीज़ा कुर्टिस

वाशिंगटन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले एक कंजर्वेटिव अमेरिकी थिंक टैंक ने ओबामा प्रशासन से अपील की है कि इराक और सीरिया जैसे अंतरराष्ट्रीय संकटों की छाया अमेरिका-भारत संबंधों पर न पड़ने दी जाए.

 

हेरीटेज फाउंडेशन की लीज़ा कुर्टिस ने कहा, ‘‘मोदी की सफल वाशिंगटन यात्रा का मंच तैयार है लेकिन व्हाइट हाउस विश्व में चल रहे बहुत से अंतरराष्ट्रीय संकटों की छाया इस यात्रा पर न पड़ने दे और इससे भारत-अमेरिकी संबंधों को कमजोर न होने दे.’’

 

दक्षिणी एशियाई मामलों में अमेरिका की शीर्ष विशेषज्ञ ने कहा, ‘‘बहुत सी वैश्विक चुनौतियों से जूझ रहे अमेरिका के लिए रणनीतिक तौर पर एक सी सोच वाले भारत जैसे साझेदार के साथ जुड़ाव का बहुत महत्व है. अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से निपटने और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्तिसों के एक स्थिर संतुलन को बनाए रखने के लिए अमेरिका और भारत के बीच सहयोग खासतौर पर अहम हो जाता है.’’

 

कुर्टिस ने कहा कि मोदी की यात्रा के दौरान अमेरिका को आर्थिक और उद्यमी संबंधों का पर्याप्त विस्तार करना चाहिए, रक्षा सहयोग पर जोर देना चाहिए और रक्षामंत्री चक हेगल द्वारा अगस्त में की गई भारत यात्रा पर घोषित किए गए कदमों पर काम करना चाहिए क्योंकि भारतीय प्रधानमंत्री उदारवाद-समर्थक एजेंडे के लिए प्रतिबद्ध हैं.

 

कुर्टिस ने कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण है कि दोनों ही पक्ष एक दूसरे के रणनीतिक परिप्रेक्ष्य को समझें. बीजेपी नेताओं को यह आकलन करना चाहिए कि अमेरिका के साथ करीबी संबंध भारत के हित में हैं. उन्हें इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि भारत-चीन के साथ सीमा साझा करता है और इस तरह उसे भारत की विदेश नीति के प्रति चीनी समझ से भी अवगत होना चाहिए.’’

 

कुर्टिस ने कहा कि ओबामा प्रशासन को दक्षिणी एशिया, खासतौर पर अफगानिस्तान में, आतंकी गतिविधियों से निपटने की रणनीतियों पर समवन्य करना चाहिए क्योंकि अमेरिकी और नाटो बल वापस जा रहे हैं.

 

उन्होंने कहा, ‘‘अलकायदा के नेता अयमान अल-जवाहिरी ने दक्षिण एशिया में एक शाखा खोलने का हाल ही में संकल्प लिया है और इस्लामिक स्टेट इराक में पकड़ बना रहा है लेकिन अमेरिका-भारत आतंकवाद-विरोधी सहयोग कभी मजबूत नहीं रहा है.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘ओबामा और मोदी को इन धमकियों पर प्रतिक्रिया के मामले में आपस में समन्वय करना चाहिए और तालिबान को अफगानिस्तान में वापस आने से रोकने के लिए सहयोग के तरीके खोजने चाहिए.’’

 

उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस यात्रा के नतीजों के बारे में अपेक्षाओं को सीमित रखना चाहिए ताकि निराशा से बचा जा सके. ‘पहले भी, यह संबंध दोनों ओर की अत्यधिक आशावादी उम्मीदों के चलते प्रभावित हुई.’

 

उन्होंने आगे कहा, ‘‘इस वजह से, रक्षा सहयोग में आने वाली नौकरशाही बाधाओं को दूर करने के लिए रक्षा व्यापार और तकनीकी पहल से जुड़े जो उपाय हैं, वे बेहद महत्वपूर्ण हैं. लेकिन इन उपायों के लिए धर्य और दृढ़ता की जरूरत है और इनके फलीभूत होने में समय लगता है.’’

 

उन्होंने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री की इस यात्रा पर चीन और जापान की ‘करीबी नजर’ होगी. ये दोनों ही हाल में मोदी के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता कर चुके हैं.

 

कुर्टिस ने कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण है कि ओबामा और मोदी की बैठक अमेरिका और भारत के संबंधों की मजबूती का प्रदर्शन एक ऐसे समय में कर रही है, जब एशिया में शक्ति के समीकरण स्थानांतरित हो रहे हैं.’’

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