मक्का: 25 साल में सबसे बड़ा हादसा, 717 की मौत 805 जख्मी

By: | Last Updated: Thursday, 24 September 2015 8:21 AM
At least 100 dead, 390 hurt in stampede at hajj in Saudi

मक्का: मक्का में हज यात्रा के बीच शैतान को कंकड़ मारने के दौरान बड़ी भगदड मच गई है. इस हादसे में 717 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 805 हाजी जख्मी हो गए हैं. ये हादसा तब हुआ जब लाखों हाजी शैतान को पत्थर मारने की रस्म पूरी कर रहे थे. 15 दिन के भीतर हज के दौरान ये दूसरा बड़ा हादसा है.

हज की अदायगी का आज आखिरी दिन है और आज ही मक्का में ईद का दिन है. हाजी आज ही के दिन मीना, मुज़दलफा और मैदान-ए-अराफात से वापसी के बाद जमेरात में शैतान को पत्थर मारने की रस्म अदा करते हैं और इसी दौरान हुई भगदड़ में 310 लोग मारे गए हैं. शुरुआती जानकारी के मुताबिक 450 लोग जख्मी हैं.

 

कब हुआ हादसा?

इस साल 30 लाख से ज्यादा लोग हज करने गए हैं. ये सभी लोग शैतान को पत्थर मारने की रस्म अदा करते हैं और सऊदी वक्त के मुताबिक दिन के 12 बजे तक जमेरात पर कंकडी मारने का वक़्त होता है इसलिए लोग काफी जल्दबाज़ी में होते हैं.

 

हालांकि, शैतान को जहां सांकेतिक कंकड़ी मारी जाती है उस जगह पहुंचने के लिए काफी चौड़े रास्ते के अलावा पांच मंजिला फ्वाइओवर भी बनाए गए हैं, लेकिन लाखों की भीड़ और हाजियों की जल्दबाज़ी से ये हादसा होता है.

 

 

हादसे की जगह आपात स्थिति से निपटने वाले 4000 जवान तैनात हैं, जबकि 220 एंबुलेंस भी मौके पर हैं.

 

एक हाजी फरीद शमसी का कहना है कि प्रशासन की तरफ से काफी अच्छे इंतेजाम थे, जिस रास्ते से पत्थर मारने के लिए जाने का इंतजाम है उससे लौटने की मनाही होती है, लेकिन कुछ लोग उसी रास्ते से वापस आ गए जिससे ये हादसा हुआ है.

 

हालांकि, सऊदी सरकार की ओर से ये नहीं बताया गया है कि हादसा कैसे हुआ.

 

 

क्या थी हादसे की वजह?

 

रिपोर्ट के मुताबिक, हादसा मीना में हजयात्रियों के शिविरों के बीच की एक सड़क पर हुआ. इस सड़क को सड़क नंबर 204 कहा जाता है. एक ग्रुप आगे की तरफ बढ़ रहा था तभी दूसरे ग्रुप ने भी आगे बढ़ना शुरू किया और इसी वजह से हादसा हुआ। भगदड़ मीना के जदीद स्ट्रीट में सुबह 10 बजे हुआ। मरने वालों में अधिकतर अफ्रीका और ईरान से हैं.

 

हादसा मीना में हुआ जो पूर्व मक्का से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है जहां श्रद्धालु हज के दौरान कई दिन तक ठहरते हैं। मीना में ही श्रद्धालु सांकेतिक रूप से शैतान पर पत्थर फेंकते हैं.

 

इससे पहले भी हो चुके हैं कई हादसे

 

 

जुलाई, 1990 में मक्का से मीना और अराफात की ओर जाने वाले पैदल यात्री के लिए बनी सुरंग अल मयीसिम में हादसा हुआ जिसमें 1426 लोग मारे गए थे. मरने वालों में ज्यादातर लोग मलेशिया, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के थे. मई, 1994 में शैतान को कंकड़ी मारने के दौरान हादसा हुआ जिसमें 270 लोग मारे गए. अप्रैल, 1998 में हादसा भी जमेरात की पुल पर हुआ, जिस रास्ते से हाजी शैतान को पत्थर मारने के लिए जाते हैं. इस हादसे में 118 लोग मार गए और 180 लोग जख्मी हो गए. मार्च, 2001 में ये हादसा भी शैतान को पत्थर मारने के दौरान हुआ. इस हादसे में 35 लोग मारे गए.

फरवरी 2003 में इस बार शैतान को पत्थर मारने के दौरान हुए हादसे ने 14 लोगों की जान ले ली थी. फरवरी 2004 में शैतान को पत्थर मारने के दौरान 251 हाजी मारे गए, जबकि 244 जख्मी हो गए.

 

 

इससे पहले 11 सितंबर को जुमे की शाम मस्जिद-ए-हरम में हुए क्रेन हादसे में 107 लोग मारे गए थे. दरअसल ये हादसा इसलिए हुआ क्योंकि मस्जिद के विस्तार का काम चल रहा है और भारी बारिश के बाद लाल रंग की बड़ी सी क्रेन मस्जिद की दीवारें तोड़ती हुई जमीन पर आ गिरी जिससे 100 से ज्यादा लोग मारे गए. मस्जिद के जिस हिस्से में ये हादसा हुआ था वहां करीब एक हज़ार लोग मौजूद थे.

 

कैसे अदा की जाती है हज और क्यों होते हैं हादसे

 

हज की रस्म पांच दिनों में अदा की जाती. पहले दिन हाजी  मक्का से मीना के लिए रवाना होते हैं. मीना में रात गुजारने के बाद दूसरे दिन सुबह हाजी मीना से मैदान-ए-अराफात के लिए रवाना होते हैं. मैदान-ए-अराफात पहुंचना हज का सबसे जरूरी रुकन (रस्म) होता है. तीसरे दिन ईद होती है और इस दिन लोग कुर्बानी के बाद शैतान को पत्थर मारने के लिए हाजी जमेरात में जाते हैं. इस दौरान हादसे की आशंका होती है. हाजी तीन दिन में किसी भी दिन पत्थर मार सकते हैं, लेकिन ईद के दिन ज्यादातर हाजी पत्थर मारने की जिद करते हैं और इस तरह ये हादसे होते हैं.

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Web Title: At least 100 dead, 390 hurt in stampede at hajj in Saudi
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