बाजीराव- ऐसा योद्धा जो कभी नहीं हारा, पर मस्तानी के हुस्न के आगे लुट गया

By: | Last Updated: Friday, 18 December 2015 1:13 PM
Bajirao Mastani controversy and history

हिमालय मेरी सरहदों का निगेहबान है… और गंगा मेरी पवित्रता की सौगंध. इतिहास के आगाज से अंधेरों और उजालों का साथी रहा हूं मैं. मेरे जिस्म पर संगे मरमर की चादरों से लिपटी हुई ये खूबसूरत इमारतें गवाह हैं कि ज़ालिमों ने मुझे लूटा………और…….मोहब्बत करने वालों ने मुझे संवारा है. नादानों ने मुझे जंजीरें पहनाई……और…..मेरे चाहने वालों ने उन्हें काट फेंका है.

कई शूरवीरों के मुस्तकबिल मेरे सामने बने और कई बादशाहों के वजूद मेरी नज़रों के आगे मिट गए. और ऐसा ही एक योद्धा था. बाजीराव.

मराठा साम्राज्य का पांचवां पेशवा बाजीराव इतिहास के पन्नों में एक ऐसे योद्धा के तौर पर दर्ज है जिसे युद्ध में कोई शिकस्त ना दे सका, लेकिन मस्तानी के हुस्न के आगे वो अपना सब कुछ हार गया.

जंग के मैदान में कई पड़ावों से गुजरने वाले बाजीराव की जिंदगी में मस्तानी से मोहब्बत का वो अहम पड़ाव भी दर्ज है जो करीब तीन सौ साल बाद एक बार फिर फिजाओं में गूंज रहा हैं.

मराठा इतिहास में दर्ज बाजीराव और मस्तानी की प्रेम कहानी करीब 300 साल पहले भी विवादों में थी और तीन सदियों बाद अब एक बार फिर ये विवादों में घिर गई है. आखिर इस कहानी में ऐसा क्या है कि ये मामला अदालत की दहलीज तक भी जा पहुंचा है.

किताबों के पन्नों में दबी एक योद्धा की ये वो दास्तान है जो इतिहास का चर्चित और विवादित हिस्सा भी रही है. व्यक्ति विशेष में आज हम आपको बताएँगे पेशवा बाजीराव की मस्तानी हिंदू थी या फिर थी वो मुसलमान. साथ ही आपको ये भी बताएँगे कि कब, क्यों और कैसे बाजीराव और मस्तानी बन गए दो जिस्म से एक नाम. और साथ ही पड़ताल इस बात की भी करेंगे कि बाजीराव और मस्तानी की मौत के तीन सौ साल बाद फिर क्यों उनको लेकर छिड़ गया है संग्राम.

बाजीराव के वंशज पेशवा उदय की पत्नी जयमंगला देवी का कहना है, “हमारी फैमिली में 300 साल पहले कोई ऐसे डांस नहीं कर सकता, क्योंकि उस ज़माने में उस तरह के हाव भाव नहीं होते थे, नामुमकिन है. ये हमारे घराने की स्त्री की बारे में जो कुछ चल रहा, इसपर हमारी आपत्ति है. “

मध्य प्रदेश में इंदौर शहर के पास पेशवा बाजीराव की समाधि है, जो करीब तीन सौ साल पहले उनकी मौत के बाद बनाई गई थी.  और बाजीराव की इस समाधि से करीब 600 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के पुणे में मस्तानी की कब्र है.  वो मस्तानी जिसकी मोहब्बत में बाजीराव ने धर्म का फासला भी खत्म कर दिया. खास बात ये है कि बाजीराव और मस्तानी की ये समाधियां ही उनकी उस बेमिसाल मोहब्बत की गवाह भी है जिसकी कहानियां मुंह जुबानी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचती रही है लेकिन बाजीराव और मस्तानी की वो दास्तान फिल्म की शक्ल में जब रुपहले परदे पर उतरी तो एक बार फिर इसको लेकर छिड़ गया है विवाद.

रणबीर सिंह और दीपिका पादुकोण की आने वाली फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ रिलीज होने से पहले ही विवादों में घिर गई है. दरअसल इस फिल्म में बाजीराव और मस्तानी की भूमिकाओं को लेकर तमाम सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

पुणे में पेशवा बाजीराव के वंशज जहां इस फिल्म में बाजीराव और मस्तानी के किरदारों को सही ढंग से ना दिखाने को लेकर विरोध कर रहे हैं, वहीं मध्य-प्रदेश के सीहोर और भोपाल में बस चुके मस्तानी के वंशज भी फिल्म में मस्तानी के किरदार को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं.

बाजीराव के वंशज पेशवा उदय की पत्नी जयमंगला देवी कहती हैं, ” फिल्म बनाई गई है, मालूम है हमें. पेशवा वर्ल्ड हिस्ट्री  में फेमस है. उन्होंने कभी जंग नहीं हारी. उनके पराक्रम को दिखाना जरूरी है. “

लेकिन मस्तानी के वंशज का कहना कि उनके कैरेक्टर्स के साथ खिलवाड़ हुआ है.  इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है. मस्तानी ने कभी इस टाइप का डांस नहीं किया जैसे महलों में कर रही हैं. जैसे दीपिका को दिखाया गया है. काशीबाई और मस्तानी को ऐसे ग्रुप डांस करते हुए दिखाया है और बाजीराव पेशवा की एक अलग शख्सियत थी. उसको उन्होंने ऐसे दिखा दिया. वो तो ऐसा मुगल दरबार लग रहा है, पेशवाई दरबार तो कहीं से लग हीं नहीं रहा है. चाहें आप इतिहासकार से पूछ लें उस ज़माने के लोग जो  वेषभूषा जानते होंगे तो वो उस जमाने कि लग ही नहीं रही है. बाजीराव पेशवा का भी जो दिखाया है वो मुगल दिखाया है. और बाजीराव मस्तानी का जो कैरेक्टर दिखाया है वो कुछ हद तक तो है लेकिन पूरा सही तरीके से नहीं है.

फिल्म बाजीराव – मस्तानी में मस्तानी का किरदार दीपिका पादुकोण ने निभाया है जबकि रणवीर सिंह, पेशवा बाजीराव बने है और बाजीराव की पहली पत्नी काशीबाई के रोल में प्रियंका चोपड़ा नजर आएँगी. इस फिल्म के कथानक और किरदारों को लेकर तो सवाल उठाए जा ही रहे है लेकिन सबसे ज्यादा विवाद फिल्म के पिंगा गाने को लेकर छिड़ा है.

कौन थी मस्तानी और कौन था बाजीराव?

फिल्म बाजीराव – मस्तानी को लेकर छिड़े इस पूरे विवाद की गहराई से पड़ताल भी हम करेंगे आगे लेकिन उससे पहले एक नजर ये जान लीजिए की आखिर कौन थी मस्तानी और कौन था बाजीराव.

आज से करीब तीन सौ साल पहले, 18 वीं सदी की शुरुआत में बाजीराव मराठा साम्राज्य में मशहूर पेशवा हुआ है.

मराठा राजा छत्रपति शिवाजी के पौत्र शाहू जी महाराज ने बाजीराव के पिता बालाजी विश्वनाथ की मौत के बाद उसे अपने राज्य का पेशवा यानी प्रधानमंत्री नियुक्त किया था. 20 साल की कम उम्र में पेशवा की गद्दी संभालने वाले बाजीराव ने कुल 41 युद्ध लड़े और सभी में जीत हासिल की थी इसीलिए बाजीराव इतिहास में एक ऐसे महान योद्धा के तौर पर दर्ज है जिसने पूरे उत्तर भारत में मराठा साम्राज्य का विस्तार किया था. पेशवा बाजीराव ने ही मराठा हुक़ूमत का केंद्र पुणे को बनाया जहां उसने शनिवारवाडा नाम से अपना महल भी बनवाया था इस महल में वो अपनी पहली पत्नी काशीबाई और मस्तानी के साथ रहता था.

लोककथा के मुताबिक बुंदेलखंड के राजा छत्रसाल की बेटी मस्तानी एक बेहद  खूबसूरत महिला थी जिससे पेशवा बाजीराव बेपनाह मुहब्बत करता था. हांलाकि बाजीराव और मस्तानी के बीच धर्म का एक लंबा फासला भी मौजूद था. पेशवा बाजीराव जहां एक हिंदू ब्राहमण था तो वहीं मस्तानी आधी मुसलमान थीं और यही वजह थी कि बाजीराव और मस्तानी की प्रेम कहानी उनकी जिंदगी में भी विवादों में घिरी रही.

लोककथा है कि 1740 में जब पेशवा बाजीराव का निधन हुआ तो उसके गम में मस्तानी ने भी अपनी जान दे दी थी.

बुंदेलखंड के इतिहास के जानकार  चंद्रिका प्रसाद दीक्षित का कहना है कि बाजीराव और मस्तानी कुंवर की कथा ठीक ऐसी एक कथा है जो बुंदेलखंड के क्षेत्र में बहुचर्चित है. लोक जीवन में व्यापत है और प्रेम का एक नया स्त्रोतपात्र करती है और संचार करती है.

मस्तानी कुंअर जहां अभूतपूर्व रुप से थी जहां उसका लावण्य, जहां उसकी कोमलता, जहां उसकी गुणज्ञता, जहां उसकी कलाप्रियता और जहां उसकी संगीतप्रियता इतनी मार्मिक थी कि जिसकी भी नजर पड़ती थी वही मुग्ध हो जाता था.

बाजीराव के साथ भी यही हुआ कि बाजीराव जैसा बहादुर पहली दृष्य में ही देखकर मस्तानी को अपना सर्वस्त्र खो बैठा. मस्तानी की भी दृष्टि बाजीराव पर पड़ी तो बाजीराव की योग्यता शूरवीरता और उसकी तेजस्वीता को देखकर वो भी मुग्ध हो गई और दोनों के बीच में संचार हुआ है और वो जीवनपर्यन्त प्रेमकथा के रुप में पल्लवित हो गया औऱ अमर हो गया.

पिंगा गाने पर विवाद

बाजीराव- मस्तानी की प्रेम कहानी सैकडों सालों बाद आज भी भुलाई नहीं जा सकी है, लेकिन उनकी मौत के तीन सौ साल बाद एक बार फिर ये विवादों में घिर गई है.

फिल्म बाजीराव- मस्तानी के पिंगा गाने को लेकर ही सबसे ज्यादा विवाद छिड़ा है, जिस पर  दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा ने एक साथ डांस किया है. लेकिन फिल्म बाजीराव – मस्तानी के इस पिंगा गाने पर छिड़े विवाद की बात करने से पहले ये भी जान लीजिए कि ये पिंगा दरअसल एक मराठी लोकनृत्य है. जिस तरह नवरात्रि पर गरबा नृत्य किया जाता है ठीक वैसे ही धार्मिक त्योहारों पर मराठी महिलाएं सदियों से पिंगा डांस करती चली आ रही है और शायद यही वजह भी है कि इस गीत को फिल्म बाजीराव – मस्तानी में भी रखा गया है.

इतिहासकार सदानंद मोरे का कहना है कि एकनाथ नाम के बड़े संत हुए हैं हमारे यहां, उन्होंने पिंगा के ऊपर एक फोक गीत लिखा था. तुकाराम कि एक शिष्या है वहिनाबाई उन्होंने भी एक पिंगा नाम की रचना की है और कुछ जो ये कॉस्मोलॉजिकल प्रश्न हैं उनको सुलझाने के लिए उसका इस्तेमाल किया है.

एकनाथ जी कहते हैं कि जो बड़ी माया होती है उसका ही सब पिंगा है. संश्रुति संश्रुति बोलते हैं उसको और उसने पिंगा शुरु कर दिया और उससे शंकर की और ब्रम्ह देव की उत्तपत्ति हुई.

पिंगा के बारे में इतनी बात चलती है. ये कोई रेग्युलर डांस नहीं है. बाजीराव की जो पत्नी उसमें दिखाई गई है काशीबाई वो तो कोई डांसर नहीं थी ……नामुमकिन है.

पेशवा बाजीराव के वंशजों का ये भी आरोप है कि फिल्म बाजीराव-मस्तानी में मस्तानी को एक डांसर के रूप में पेश किया गया है जबकि वो बाजीराव की दूसरी पत्नी थीं और घुड़सवारी और तलवारबाजी जैसे हुनर में माहिर मानी जाती थी लेकिन मस्तानी की ऐसी खूबियों को नजर अंदाज करते हुए फिल्म में उन्हें महज एक नर्तकी के तौर पर दिखाया गया है. संजय लीला भंसाली की ये फिल्म 18 दिसंबर को रिलीज होनी है लेकिन इसकी रिलीज से पहले ही ये पूरा विवाद सेंसर बोर्ड से होते हुए अदालत तक जा पहुंचा है.

पेशवा बाजीराव के आठवें वंशज पेशवा उदय का कहना है कि हमारा विरोध इसलिए है कि हमारे घराने में स्त्रियां थीं उनके बाहार जा कर ऐसा नाचना नामुमकिन था. काशीबाई बाजीराव साहब की पत्नी थी और बाजीराव साहब समाज के प्रधान थे. उनकी पत्नी ऐसे बाहर जाकर नाचेगी जो कि नामुमकिन है. दूसरी तरफ मस्तानी जी बुंदेलखंड की राजकन्या थी उनका भी पब्लिक में नाचना नामुमकिन है.

पेशवा बाजीराव के वंशज मस्तानी के जिस किरदार को फिल्म में कम दिखाने की बात कह रहे हैं, दरअसल उसका जिक्र इतिहास की किताबों में भी कम ही मिलता हैं. शायद यही वजह है कि बाजीराव और मस्तानी के किस्से सदियों से सुने और सुनाए जाते रहे हैं और करीब तीन सौ साल बाद आज भी उनकी वो प्रेम कहानी लोगों के लिए कौतुहल का विषय बनी हुई है.  यहां तक की उनकी मौत भी एक रहस्यमयी कहानी बन कर ही रह गई है.

पुणे से करीब 65 किलोमीटर दूर पाबल है और पाबल गांव में यहां पर मस्तानी बेगम की क्रब. मस्तानी बेगम की मौत के बारे में कई सारे रहस्य हैं, उनकी मौत के बारे में अलग-अलग बातें कहते हैं कि उनकी मौत आखिर कैसी हुई. उन्होंने आत्महत्या की या क्या किया.

इतिहास के जानकार शंकर नरे का कहना है बाजीराव पेशवा साहब के आखिर का जो वक़्त था, वो मध्य प्रदेश में युद्ध के लिए गये थे. उस वक्त उनके पास मस्तानी होनी चाहिए थी, ऐसा उनका कहना था लेकिन घरवालों ने उन्हें भेजा नहीं…मस्तानी को यहां कैद करके रखा पूणे में और जब बाजीराव पेशवा साहब अंतकाल में मस्तानी-मस्तानी करते थे तभी भी नहीं भेजा.

शंकर नरे आगे कहते हैं, बाजीराव मस्तानी को बहुत याद कर रहे थे, उनको बुखार आया, बहुत बुखार आया और वो पानी में नहाए, ठण्डा पानी में और उनका वही निधन हो गया…ये बात ये खबर पूणे में जब सब लोगों को मिली तो उन्होंने मस्तानी को छोड़ दिया और मस्तानी यहां पाबल तक आ गयी…पाबल में यहां 3 गांव केंगुर, पाबल और लोहिनी करके तीन गांव है. ये गांव मस्तानी के खर्चा के लिए दिए थे. हां उनके लिए गड़ी बनवायी थी बाजीराव पेशवा साहब ने और यहां  मस्जिद बनवायी थी. प्रार्थना करने के लिए बनवायी थी…तो यहां तक मस्तानी आ गयी और यहां आने के बाद उसे मालूम पड़ गया कि बाजीराव पेशवा की मौत हो गयी है तो यहां आकर उन्होंने आत्महत्या कर ली. आत्महत्या हीरा, हीरकनी खा कर ली.

लोककथा के मुताबिक मस्तानी ने बाजीराव की मौत के गम में हीरा निगलकर आत्महत्या कर ली थी. कोई कहता है कि मस्तानी ने जहर खा कर जान दे दी थी और किस्सा ये भी सुनाया जाता है कि उस पर हमला कर उसे मार दिया गया था. पेशवा बाजीराव की मौत की तरह ही उसकी प्रेमिका मस्तानी की मौत भी एक रहस्य बन कर रह गई. मस्तानी की कब्र पुणे के शनिवारवाडा से करीब 65 किलोमीटर दूर बनी है जो कभी मराठा साम्राज्य पर हुकूमत करने वाले पेशवाओं की शक्ति का प्रतीक था. पेशवा बाजीराव का ये शनिवारवाडा 18 वीं सदी के उस सुनहरे दौर का गवाह भी है जब उत्तर भारत से लेकर नीचे दक्कन के इलाके तक भारत में बाजीराव ने मराठा हुकूमत का परचम लहरा दिया था. 39 साल की जिंदगी में 41 युद्ध लड़ने वाले पेशवा बाजीराव प्रथम ने सभी युद्ध में जीत हासिल की थी लेकिन उसकी जिंदगी में वो जंग सुनहरे लफ्जों में दर्ज हुई जिसमें उसने अपनी महबूबा मस्तानी का दिल जीता था.

आज भले ही बाजीराव और मस्तानी को लेकर एक नया विवाद छिड़ गया है लेकिन इस बात से शायद ही कोई इंकार करे कि इतिहास के पन्नों में बाजीराव मस्तानी की प्रेम कहानी मिट नहीं सकी है.

सन 1700 में जन्में बाजीराव के पिता बालाजी विश्वनाथ मराठा राजा छत्रपति शाहू जी महाराज के पेशवा यानी प्रधानमंत्री थे लेकिन जब बालाजी का देहांत हुआ तो शाहू जी महाराज ने महज 20 साल की उम्र में ही बाजीराव को अपना पेशवा नियुक्त कर दिया था.

सन् 1707 में मुगल बादशाह औरंगज़ेब की मौत के बाद का ये वो दौर था जब मराठों और मुगलों के बीच लंबे वक्त से जारी जंग खत्म हो चुकी थी. औरंगज़ेब की मौत के बाद मुगलिया सल्तनत की जड़े लगातार कमजोर पड़ रही थी वहीं दूसरी तरफ मराठा तेजी से अपनी ताकत बढाते हुए पूरे देश में अपनी हुकूमत का दायरा फैलाते चले जा रहे थे. 18 वीं सदी की शुरुआत में पुणे का ये शनिवारवाड़ा मराठा शक्ति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका था.

पूणे का शनिवारवाड़ा बाजीराव पेशवा ने बनवाया था. पेशवा यहीं रहा करते थे इसके बारे में जानकारी आपको यहां भी देखने पर मिलेगी कि श्री मंत बाजीराव पेशवा ने 1729 को जनवरी की 10 तारीख को इसकी शुरुआत की और उसके बाद जो है बांधने का पूरा काम हुआ 1736 तक. जब यह पूरा पैलेस हो गया और ये रजवाड़ा जो है. 1818 तक श्री मंत पेशवा यहीं रहा करते थे……….और इसके बगल में ही एक हवेली थी जो उन्होंने मस्तानी को दी थी वहां मस्तानी रहा करती थी.

बाजीराव के कारनामे

पेशवा बाजीराव की कहानी मस्तानी के बगैर अधूरी मानी जाती है लेकिन मस्तानी की कहानी से पहले बाजीराव के उस कारनामें पर नजर डालना जरूरी है जिसे उसने महज 39 साल की कम उम्र में ही अंजाम दे दिया था.

दरअसल मराठा राजा छत्रपति शिवाजी की मौत के कुछ दशक बाद ही मराठों के प्रधानमंत्री जो पेशवा कहे जाते थे राजा पर हावी होकर असली सत्ताधारी बन बैठे थे.

बाजीराव जब मराठा राजा शाहूजी महाराज के पेशवा बने उस समय उत्तर भारत पूरी तरह पस्त और बर्बाद हो चुका था. दिल्ली का मुगल बादशाह मोहम्मद शाह रंगीला इतना कमजोर हो चुका था कि उसने दक्कन के इलाके में चौथ यानी टैक्स वसूल करने का मराठों का अधिकार भी मंजूर कर लिया था. इतना ही नहीं पेशवा बाजीराव ने मराठा साम्राज्य का तेजी से विस्तार करते हुए मालवा और गुजरात समेत पूरे मध्य भारत पर अपना कब्जा भी जमा लिया था. 1737 में तो उसकी फौज सीधे दिल्ली के दरवाजों तक भी जा पहुंची थी. ये वो दौर था जब ऐसा लगता था कि पूरे हिंदुस्तान पर मराठे छा जाएंगे.

मुगलों के पतन और मराठों के उभार का यही वो दौर भी था जब बुंदेलखंड इलाके में राजपूत राजा छत्रसाल पन्ना रियासत के महाराज हुआ करते थे.

अलाहबाद के मुगल गवर्नर मोहम्मद खां बंगश ने सन् 1727 में राजा छत्रसाल की पन्ना रियासत पर हमला बोला और उस पर अपना कब्जा जमा लिया था. बंगश से हार के बाद राजा छत्रसाल ने पेशवा बाजीराव ने सैन्य सहायता मांगी थी जिसके बाद पेशवा बाजीराव ना सिर्फ बुंदेलखंड पर हमलावर हुआ बल्कि उसने मोहम्मद खां बंगश को हरा कर छत्रसाल को उसका राज वापस भी दिला दिया था और बाजीराव की इसी जीत के बाद उसकी जिंदगी में मस्तानी ने दस्तक दी थी.

इतिहास के पन्नों में दर्ज बाजीराव – मस्तानी की प्रेम कहानी को लेकर ऐसा भी कहा जाता है कि बाजीराव से खुश होकर राजा छत्रसाल ने झांसी, ग्वालियर काल्पी को मिला कर अपने राज्य का एक तिहाई हिस्सा उसे दे दिया था.

कहा ये भी जाता है कि राजा छत्रसाल ने अपनी बेटी मस्तानी का ब्याह भी पेशवा बाजीराव से कर दिया था और तोहफे में उसे 33 लाख सोने के सिक्के और हीरे की एक खदान भी दी थी.

मस्तानी के बारे में कहा जाता है कि वो एक गायिका और नृत्यांगना होने के साथ एक बेहतरीन घुड़सवार और तलवारबाज भी थी. मस्तानी बेइंतिहा खूबसूरत थी और उसके हुस्न पर पेशवा बाजीराव भी मर मिटा था. मस्तानी को लेकर तरह – तरह की किवदंतिया है जिनमें सबसे ज्यादा मान्यता ये है कि वो बुंदेला राजपूत राजा महाराज छत्रसाल की बेटी थी जो उन्हें अपनी पर्सियन मुस्लिम पत्नी रुहानी बाई से हुई थी.

कहा ये भी जाता है कि मस्तानी की मां रुहानी बाई छत्रसाल की पत्नी बनने से पहले नवाब हैदराबाद के दरबार में नृत्यांगना थी. हांलाकि कुछ इतिहासकार मस्तानी को पेशवा बाजीराव की दूसरी पत्नी मानते है तो कुछ उसे ये दर्जा नहीं देते हैं लेकिन मोटे तौर पर ये जरुर माना जाता रहा है कि मस्तानी राजा छत्रसाल की बेटी थी –

महाराजा छत्रसाल की कई महारानीयां थीं और वास्तवविक रानी तो नहीं थी जिनके गर्भ से मस्तानी का जन्म हुआ था लेकिन मस्तानी एक ऐसी प्रेमिका जिसको महाराजा छत्रसाल की शरण में आ गई थीं उसके द्वारा मस्तानी का जन्म हुआ था. छत्रसाल ने मस्तानी को अपनी पुत्री के रुप में स्वीकार किया.

इतिहासकार सदानंद मोरे का कहना है कि देखिए शादी का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि कौन उपस्थित था वो कुमकुम पत्रिका भेजी थी या नहीं. कोई साक्ष्य नहीं है.

सन 1729 में मस्तानी, बाजीराव की जिंदगी में आई थी. एक लोककथा के मुताबिक पेशवा बाजीराव अपनी मुस्लिम पत्नी मस्तानी से इस कदर मुहब्बत करता था कि उसने अपनी पहली पत्नी काशीबाई तक को नजरअंदाज कर दिया था और इसीलिए बाजीराव की मां राधाबाई उसके भाई चीमाजी अप्पा समेत उनका पूरा परिवार उससे नाराज था. चूंकि मस्तानी आधी मुसलमान थी और पेशवा बाजीराव हिंदू ब्राह्मण थे इसीलिए ये भी कहा जाता है कि इस वजह से उन्हें मस्तानी को लेकर अपने ब्राहम्ण समाज में भी जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा था.

पुणे का शनिवारवाड़ा 96 सालों तक मराठा साम्राज्य की पहचान रहा है. लेकिन पेशवा का ये महल सिर्फ सत्ता और सैन्य ताकत का प्रतीक ही नहीं है बल्कि ये पेशवा बाजीराव की रुमानियत और मस्तानी से उसकी मोहब्बत के लिए भी जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि जब बाजीराव बुलंदेलखंड से मस्तानी को अपने साथ लेकर पुणे आया था तो मस्तानी उसके साथ इसी महल के उत्तर – पूर्वी हिस्से में रहा करती थी और इसी शनिवारवाड़ा की ऊंची दीवारों से पार निकल कर बाजीराव – मस्तानी की प्रेम कहानी भी मशहूर हुई थी. लेकिन इसी के साथ ऐसा भी कहा जाता है कि जब मस्तानी और उसके मजहब को लेकर बाजीराव के परिवार में कलेश बढने लगा था तब बाजीराव ने 1734 में शनिवारवाड़ा से कुछ ही दूर कोथरुड नाम की जगह पर मस्तानी के लिए एक अलग मस्तानी महल बनवा दिया था.

वहां एक दरवाजा है जहां पर लिखा भी है मस्तानी गेट. मस्तानी दरवाजा के बारे में अलग अलग कहानियां हैं. जानकार भी कहानियां अलग अलग बताते हैं कुछ लोग बताते हैं कि मस्तानी यहां से आया जाया करती थी इसलिए इस गेट का नाम मस्तानी दरवाजा है कुछ जानकार तो ये भी कहते हैं कि तब ये दरवाजा ही नहीं था जब मस्तानी बाजी राव की जिंदगी में थी तब ये दरवाजा बिल्कुल भी यहां नहीं था और कहते हैं कि यहां शनिवारवाडे के अंदर मस्तानी नहीं रहा करती थी उसे एक जगह दी गयी थी और वो हवेली शनिवारवाड़े के बाहर इस तरफ थी अब इस कहानी को 300 साल गुजर चुके हैं जैसे कि कहते हैं कि 1729 में  मस्तानी बाजी राव की जिंदगी में आयी और जब तक बाजीराव जिंदा थे. 1740 तक उनकी जिंदगी में थी लेकिन 300 साल होने के बावजूद भी महाराष्ट्र के घर घर में बाजीराव और मस्तानी की प्रेम कहानी  के बारे में सबको पता है.

बाजीराव की जिंदगी में मस्तानी कैसे आई इसको लेकर तरह- तरह की बातें सामने आती रही है. मस्तानी बाजीराव की विधिवत दूसरी पत्नी बनी थी या फिर वो बिना शादी किए ही उनके साथ रहती थी इसको लेकर भी विवाद रहा है, लेकिन इस बात को लेकर कोई मतभेद नहीं है कि बाजीराव से मस्तानी को एक बेटा शमशेर बहादुर हुआ था. बाजीराव ने अपनी जिंदगी में ही उत्तरप्रदेश की बांदा जागीर शमशेर बहादुर के नाम दर्ज भी कर दी थी. यही नहीं मस्तानी और बाजीराव की मौत के बाद काशीबाई ने ही शमशेर बहादुर की परवरिश भी की थी और वो सन 1767 में पानीपत के युद्ध में मराठों की तरफ से लड़ते हुए मारा गया था.

बाजीराव और मस्तानी के बीच धर्म की एक गहरी खाई मौजूद थी लेकिन उनकी बेमिसाल प्रेम कहानी का सबसे बड़ा सबूत मस्तानी मस्जिद भी है जो आज भी ये गवाही देती है कि तमाम विवादों के बावजूद इन दो प्रेमियों के बीच धर्म की दीवार भी आड़े नहीं आ सकी. लेकिन बाजीराव – मस्तानी की ये प्रेम कहानी उनकी मौत के तीन सौ साल बाद एक बार फिर विवादों में घिरी है और इस बार विवाद फिल्म में उनके किरादारों को लेकर पैदा हुआ है. खुद को बाजीराव और मस्तानी का वंशज बताने वालों का सबसे ज्यादा एतराज फिल्म के पिंगा गाने को लेकर है जिसमें बाजीराव की पहली पत्नी काशीबाई और मस्तानी को एक साथ नाचते हुए दिखाया गया है.

व्यक्ति विशेष: बाजीराव और मस्तानी की प्रेम कहानी

निर्देशक संजय लीला भंसाली का ड्रीम प्रोजक्ट मानी जाने वाली बाजीराव- मस्तानी 18 दिसंबर को रिलीज होनी है लेकिन इस फिल्म को लेकर उठा विवाद फिलहाल अदालत तक जा पहुंचा है.

सदियों पुरानी बाजीराव- मस्तानी की दास्तान अब फिल्मी परदे पर उतरने के लिए तैयार है. लेकिन ऐसा माना जाता है कि फिल्मी परदे पर रुपहली नजर आने वाली मोहब्बत की ये दास्तान असलियत में कष्टों का एक अंबार रही है. एक लोककथा के मुताबिक 1740 में जब अचानक मौत ने बाजीराव को मस्तानी से जुदा कर दिया था तब बाजीराव के गम में दीवानी हो चुकी मस्तानी ने भी अपने प्राण त्याग दिए थे और इस तरह दो जिस्म एक जान बन कर जीने वाले बाजीराव-मस्तानी अपनी मौत के बाद एक नाम बन गए और उनकी मौत बन गई एक राज.

Vyakti Vishesh News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Bajirao Mastani controversy and history
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Related Stories

व्यक्ति विशेष: ‘वन मैन आर्मी’ या विवादों के ‘स्वामी’
व्यक्ति विशेष: ‘वन मैन आर्मी’ या विवादों के ‘स्वामी’

सुब्रमण्यम स्वामी  भारतीय राजनीति का एक बेहद दिलचस्प किरदार हैं. कोई इन्हें विवादों का स्वामी...

व्यक्ति विशेष: हेलिकॉप्टर घूसकांड से कांग्रेस के पांच कनेक्शन?
व्यक्ति विशेष: हेलिकॉप्टर घूसकांड से कांग्रेस के पांच कनेक्शन?

दुनिया के सबसे बेहतरीन हेलिकॉप्टरों में से इसे एक माना जाता है. इसकी गिनती विश्व के 10...

मेरा घर मेरा हक: इन वजहों से नहीं मिल रहा है आपको अपना घर!
मेरा घर मेरा हक: इन वजहों से नहीं मिल रहा है आपको अपना घर!

नई दिल्ली: एक आम आदमी की जिंदगी में उसके घर खरीदने का फैसला सबसे बड़ा और सबसे अहम होता है. घर...

व्यक्ति विशेष: जानिए, सिर्फ 60 रूपये रोज पर मजदूरी करते थे कपिल शर्मा!
व्यक्ति विशेष: जानिए, सिर्फ 60 रूपये रोज पर मजदूरी करते थे कपिल शर्मा!

नई दिल्ली: वो वापस आ रहा है. एक बार फिर हंसाने की गारंटी लेकर वो लौट रहा है. देश का एक बड़ा चैनल...

व्यक्ति विशेष: कैप्टन कूल से कहां हुई भूल, क्या रही चूक?
व्यक्ति विशेष: कैप्टन कूल से कहां हुई भूल, क्या रही चूक?

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम का वो नायक है. उसे हिन्दुस्तान का अब तक का सर्वश्रेष्ठ कप्तान...

व्यक्ति विशेष: ISIS की वो कहानी जिसे जानकर आपकी रूह कांप जाएगी
व्यक्ति विशेष: ISIS की वो कहानी जिसे जानकर आपकी रूह कांप जाएगी

नकाब ओढ़ कर वो सभ्य समाज को चुनौती देता है. धर्म के नाम पर वो अधर्म का पूरी दुनिया में साम्राज्य...

 1 पैसा खोने पर पिता ने डायरी में लिख लिया था विजय माल्या का नाम!
1 पैसा खोने पर पिता ने डायरी में लिख लिया था विजय माल्या का नाम!

नई दिल्ली: मायालोक का वो जादूगर है. रंगीन दुनिया के उसके अनगिनत फसाने हैं. हसीनाओं का वो दीवाना...

व्यक्ति विशेष: 'मिनी मॉस्को' के कन्हैया की असली कहानी?
व्यक्ति विशेष: 'मिनी मॉस्को' के कन्हैया की असली कहानी?

इन दिनों पूरे देश में कन्हैया चर्चा में है. जोश, जुनून और कुछ कर गुजरने के जज्बे से लबरेज होकर...

व्यक्ति विशेष: यहां चॉकलेट भी हथौड़े से तोड़ा जाता है!
व्यक्ति विशेष: यहां चॉकलेट भी हथौड़े से तोड़ा जाता है!

नई दिल्ली: यहां आम इंसान नहीं सैनिक रहते हैं, क्योंकि इंसान के रहने की सीमाएं यहां खत्म हो जाती...

व्यक्ति विशेष: अनुपम ने अपनी मां के मंदिर से पैसे चुराकर किया था एक्टिंग का कोर्स!
व्यक्ति विशेष: अनुपम ने अपनी मां के मंदिर से पैसे चुराकर किया था एक्टिंग का...

अनुपम खेर टेलीविजन पर एक मशहूर शो को होस्ट करते हैं जिसका नाम है ‘कुछ भी हो सकता है’. अनुपम कुछ...

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017