BRICS: भारत को मिली जीत, होगी नए विकास बैंक की स्थापना

By: | Last Updated: Wednesday, 16 July 2014 5:11 AM
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नई दिल्ली: ब्रिक्स सम्मेलन ने 100 अरब डॉलर की शुरूआती अधिकृत पूंजी के साथ नये विकास बैंक की स्थापना का कल रात फैसला किया, जिसे भारत के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है.

 

इस पूंजी के लिए शुरूआती अंशदान में संस्थापक सदस्यों की बराबर भागीदारी होगी. दरअसल, भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि इस पर किसी भी सदस्य देश का वर्चस्व नहीं हो.

 

पांच राष्ट्रों की सदस्यता वाले समूह की शिखर बैठक में बैंक और 100 अरब डॉलर के शुरूआती आकार के साथ एक ‘कंटींजेंसी रिजर्व अरेंजमेंट’ स्थापित करने का समझौता हुआ. इस बैठक के जरिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक नेताओं के साथ अपनी प्रथम बहुपक्षीय वार्ता की शुरूआत की.

 

बैंक की शुरूआती अधिकृत पूंजी 100 अरब डॉलर होगी. शुरूआती अंशदान पूंजी 50 अरब डॉलर की होगी जो संस्थापक सदस्य बराबर बराबर साझा करेंगे. हालांकि, चीन ने बैंक का मुख्यालय शंघाई में बनाए जाने की दौड़ जीत ली जबकि भारत ने भी नयी दिल्ली में इसे बनाना चाहा था.

 

बैंक का प्रथम अध्यक्ष भारत होगा जबकि संचालन मंडल बोर्ड का प्रथम अध्यक्ष रूस से होगा.

 

नये विकास बैंक का अफ्रीकी क्षेत्रीय केंद्र दक्षिण अफ्रीका में होगा. सम्मेलन में स्वीकार किए गए फोर्तालेजा घोषणापत्र में नेताओं ने कहा, ‘‘हम अपने वित्त मंत्रियों को निर्देश देते हैं कि वे इसके संचालन के लिए तौर तरीकों पर काम करें.’’ शुरूआती अंशधारिता पूंजी की समान साझेदारी पर भारत का जोर इस बात को लेकर रहा है कि ब्रिक्स बैंक भी अमेरिका के आधिपत्य वाले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष :आईएमएफ: और विश्व बैंक सरीखे ब्रेटन वुड्स संस्थानों का रूप नहीं ले.

 

बैंक और सीआरए की स्थापना की सराहना करते हुए मोदी ने पूर्ण सत्र में कहा कि बैंक से अब न सिर्फ सदस्य राष्ट्रों को फायदा होगा बल्कि विकासशील विश्व को भी फायदा होगा.

 

बड़ी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अस्थिरता के परिप्रेक्ष्य में आर्थिक स्थिरता को सुरक्षित रखने में ये दोनों संस्थान अब नये माध्यम होंगे.

 

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और वित्तीय संस्थानों में सुधारों की बड़ी जरूरत है ताकि जमीनी सचाई जाहिर हो सके तथा एक नया वित्तीय ढांचा तैयार हो सके.

 

मोदी ने इसे अपना प्रथम ब्रिक्स सम्मेलन बताते हुए कहा कि वह नेताओं के साथ काम करने और आने वाले दिनों में व्यक्तिगत संबंध बनाने को लेकर आशावादी हैं. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स ने ऐसे वक्त में सम्मेलन के दूसरे दौर में प्रवेश किया है जब कई क्षेत्रों में अस्थिरता बढ़ रही है.

 

शांति और स्थायित्व के माहौल के लिए यह नये स्तर के सहयोग की मांग करता है.

 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि पहली बार ब्रिक्स जैसी कोई संस्था मौजूदा समृद्धि की बजाय भविष्य की संभावना के आधार पर राष्ट्रों को साथ लाया है. यह विचार अग्रगामी सोच वाला है. ब्रिक्स को एक शांतिपूर्ण और स्थिर विश्व के लिए अवश्य ही एक एकीकृत, स्पष्ट आधार मुहैया करना चाहिए.’’ मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संगठनों में सुधार के साथ डब्ल्यूटीओ में भी सुधार होना चाहिए ताकि एक मजबूत वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए जरूरी एक खुला कारोबार प्रणाली विकासशील दुनिया की आकांक्षाओं को अवश्य पूरा करे.

 

नये विकास बैंक और सीआरए पर समझौते पर वित्त राज्य मंत्री निर्मला सीता रमन सहित पांचों देशों के मंत्रियों ने हस्ताक्षर किया. इन लोगों ने मोदी और चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका तथा मेजबान ब्राजील के राष्ट्रपति की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए. घोषणापत्र में कहा गया है कि ब्रिक्स ने कहा है कि अन्य उभरते बाजारों और विकासशील देशों द्वारा बुनियादी ढांचागत संबंधी खाई की भरपाई और सतत विकास की जरूरतों का हल करने में आने वाली महत्वपूर्ण वित्तीय बाधाओं का सामना किया जाना जारी रहेगा.

 

ठोस बैंकिंग सिद्धांतों पर आधारित घोषणापत्र में कहा गया है कि बैंक ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग मजबूत करेगा और वैश्विक विकास के लिए बहुपक्षीय एवं क्षेत्रीय वित्तीय संस्थाओं की कोशिश में मदद करेगा. इस तरह मजबूत, सतत और संतुलित आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने के हमारे सामूहिक लक्ष्य में योगदान मिलेगा.

 

इसमें कहा गया है कि ब्रिक्स सीआरए एक सकारात्मक एहतियाती कोशिश होगी. इससे देशों को संक्षिप्त अवधि के मुद्रा के प्रवाह के दबाव का सामना करने में मदद मिलेगी और वैश्विक वित्तीय सुरक्षा मजबूत होगी.

 

घोषणापत्र के मुताबिक वास्तविक या संभावित संक्षिप्त अवधि के भुगतान संतुलन के दबाव के जवाब में यह समझौता ‘करेंसी स्वैप’ के जरिए तरलता का प्रावधान करने वाला ढांचा है. ब्रिक्स ने ब्रिक्स एक्सपोर्ट क्रेडिट और गारंटी एजेंसियों के बीच सहयोग पर भी एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया. इससे सदस्य देशों के बीच व्यापार संबंधी अवसरों को बढाने के लिये जरूरी माहौल में सुधार को बल मिलेगा .

 

घोषणापत्र में कहा गया है कि सदस्य देशों का मानना है कि सतत विकास और आर्थिक वृद्धि को उन स्थानों पर राजस्व कराधान से बढ़ावा मिलेगा जहां अर्थिक गतिविधि हो रही हो. ब्रिक्स देशों ने कर प्रशासनों से जुड़े मुद्दे पर सहयोगी रूख जारी करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.

 

घोषणापत्र में कहा गया है कि सदस्य देश 2010 के आईएमएफ सुधारों के लागू नहीं होने को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं.

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