भारत के मुकाबले चीन का रक्षा बजट तीन गुना से ज्यादा

By: | Last Updated: Thursday, 5 March 2015 2:47 PM

बीजिंग: अपने-आपको सामुद्रिक ताकत बनाने की योजना का अनावरण करते हुए चीन ने आज इस साल अपना रक्षा बजट 10.1 प्रतिशत बढ़ाकर करीब 145 अरब डालर कर दिया है. इसका लक्ष्य है उसकी बढ़ती सैन्य शक्ति और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के बीच पड़ोसियों में बढ़ती बेचैनी के बीच उच्च प्रौद्योगिकी वाले हथियार विकसित करना.

 

चीन की संसद नेशनल पीपल्स कांग्रेस (एनपीसी) में सालाना बजट पेश करते हुए प्रधानमंत्री ली क्विंग ने रक्षा बजट 10.1 प्रतिशत बढ़ाकर 888.6898 अरब युआन कर दिया जो मौजूदा 6.13 की विनिमय दर पर 145.68 अरब डालर ठहरता है.

 

चीन ने अपने रक्षा बजट में लगातार पांचवें साल दहाई अंक में वृद्धि की है. यह भारत के इस साल के 40 अरब डालर के रक्षा बजट के मुकाबले 100 अरब डालर से अधिक है.

 

रक्षा बजट के अलावा ली ने सार्वजनिक सुरक्षा बजट 4.4 प्रतिशत बढ़ाकर 154.192 अरब युआन (25.15 अरब डालर) कर दिया.

 

पिछले साल के 132 अरब डालर मुकाबले इस साल के रक्षा बजट में करीब 12 अरब डालर की वृद्धि की गई और इस तरह चीन अमेरिका के बाद रक्षा पर खर्च करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया.

 

गौरतलब है कि 2013 में अमेरिका का रक्षा बजट करीब 600.4 अरब डालर था. चीन के आधिकारिक मीडिया में हालांकि कहा गया कि यह बढ़ोतरी पिछले पांच साल में सबसे कम है क्योंकि इस दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सामने आर्थिक नरमी का दबाव है.

 

चीन की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर पिछले साल आधिकारिक लक्ष्य 7.5 प्रतिशत के मुकाबले 7.4 प्रतिशत रही जो पिछले 24 साल का न्यूनतम स्तर है. सरकार ने इस साल वृद्धि का लक्ष्य घटाकर करीब सात प्रतिशत कर दिया जिससे एक नयी चिंता पैदा हो रही है कि विश्व की यह दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अपनी रफ्तार खो रही है.

 

ली ने अपने भाषण में में कहा, ‘‘मजबूत राष्ट्रीय रक्षा एवं शक्तिशाली सशस्त्र बल तैयार करना चीन की संप्रभुत्ता, सुरक्षा तथा विकास से जुड़े हितों की रक्षा की बुनियाद हैं.’’

 

उनके भाषण का नेशनल पीपल्स कांग्रेस के करीब 3,000 सदस्यों ने स्वागत किया जिसे रबड़ की मोहर जैसी संसद कहा जाता है. ली ने कहा कि चीन आधुनिक लाजिस्टिक्स को व्यापक तौर पर मजबूत करेगा, राष्ट्रीय रक्षा अनुसंधान बढ़ाएगा तथा नए एवं उच्च प्रौद्योगिकी वाले हथियारों व उपकरणों का विकास और रक्षा संबंधित विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उद्योगों को विकसित करेगा.

 

उन्होंने अपने भाषण में यह भी कहा कि चीन को सामुद्रिक ताकत बनने का लक्ष्य प्राप्त करने ओर बढ़ना चाहिए.

 

उन्होंने कहा, ‘‘चीन प्रमुख सामुद्रिक देश है. हमें रणनीतिक सामुद्रिक योजना बनाने और कार्यान्वयन, सामुद्रिक अर्थव्यवस्था विकसित करने, सामुद्रिक पर्यावरण की सुरक्षा, चीन के सामुद्रिक अधिकारों एवं हितों की रक्षा, सामुद्रिक विवादों के उचित तरीके से निपटान, द्विपक्षीय एवं बहु-स्तरीय सामुद्रिक सहयोग के सक्रिय विस्तार और चीन को सामुद्रिक शक्ति बनाने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए.’’ मीडिया में आई खबरों में कहा गया कि चीन दो और विमान वाहक विकसित करने की प्रक्रिया में है. इससे पहले 2012 में एक विमान वाहक पेश किया गया जिसका अभी भी प्रायोगिक परीक्षण चल रहा है.

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