डीबेट: आस्था बड़ी है या आज़ादी?

By: | Last Updated: Thursday, 8 January 2015 1:39 PM
Debate: freedom of speech vs freedom of expression

पेरिस: पेरिस में हुए हमले के एक गुनहगार ने तो सरेंडर कर दिया जबकि अब भी दो गुनहगार फरार हैं. लेकिन मीडिया पर इस तरह से हमले के बाद सवाल फिर से आस्था बनाम आजादी पर उठ रहे हैं.

 

डेनमार्क में 2005 में पैगंबर मोहम्मद के कार्टून छपने के बाद हुए बवाल के बाद बीएसपी नेता हाजी याकूब कुरैशी ने साल 2006 में कार्टूनिस्ट का सिर कलम करने वाले को 51 करोड़ देने का एलान किया था.

 

हिंदुस्तान टाइम्स से याकूब कुरैशी ने फ्रांस की पत्रिका शार्ली एबदो पर हुए हमले के बारे में पूछे जाने पर कहा,  जो भी पैगंबर मोहम्मद का अपमान करेगा उन्हें मौत मिलेगी. 51 करोड़ रुपये की वही इनामी रकम अब वो पेरिस के हमलावरों को देने के लिए तैयार हैं.

 

बुधवार को पेरिस में हमले की दुनिया भर में आलोचना हो रही है, लेकिन इसी के साथ विवाद इस पर भी शुरू हो गया है कि अभिवयक्ति की आजादी की सीमा क्या हो.

 

वर्ल्ड कम्यूनिटी को ये बात भी तय करनी होगी कि फ्रीडम ऑफ स्पीच और फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन की हदें क्या हैं. क्या अब अपने किसी भी आर्टिकल या कार्टून के जरिये किसी कम्यूनिटी के जज्बात और सेंटीमेंट को मजरूह कर सकते हैं और किस हद तक मजरूह कर सकत है.

 

पेरिस में शार्ली एबदो मैगजीन के दफ्तर में कत्लेआम की वजह मैगजीन में छपे कार्टून्स बताए जा रहे हैं. 2011 में भी शार्ली एबदो मैगजीन में पैगंबर मोहम्मद से जुड़ा विवादित कार्टून छपा था.

 

कार्टूनिस्टों की हत्या का विरोध तो हो रहा है. साथ में ये भी सवाल उठ रहे हैं कि कार्टूनिस्टों को लोगों को उत्तेजित करने से क्या हासिल होता है.

 

वेद प्रताप वैदिक का कहना है कि ये समझना की आजादी की उपयोग कर रहे हैं. समझ में नहीं आता. जबरदस्ती लोगों को उत्तेजित क्यों किया जाता है, जब मालूम है कार्टून छापने से लोग पगला जाएंगे और कुछ भी कुकर्म कर जाएंगे तो अपने को भी संयम रखना चाहिए.

 

देश की पहली महिला आईपीएस किरन बेदी ने ट्विटर पर लिखा है कि फ्रांस में आतंकी हमले ने एक संदेश दिया है, क्यों जानबूझकर चिढ़ाएं या उकसाएं? सभ्य बनिये और सबका आदर करिए. लोगों की भावनाओं को चोट न पहुंचाएं.

 

लेकिन आस्था पर चोट का जवाब हिंसा हो इसपर कोई सहमत नहीं है.

 

विचारधारा की लड़ाई विचारधारा से लड़ते है, क्लाशनिकोव-एके 47 से नहीं लड़ते.

 

पत्रकारों पर हमले की निंदा तो कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर भी कर रहे हैं लेकिन साथ में ये दलील भी है कि ऐसे हमले मुसलमानों पर ज्यादती का नतीजा है.

 

पेरिस में आतंकियों ने पत्रकारों की इसलिए हत्या कर दी क्योंकि उन्होंने कुछ कार्टून छापे थे. फ्रांस की कानून के हिसाब से इस तरह के कार्टून छापना गलत नहीं है. मुस्लिम संगठन तो कार्टून को लेकर वहां की अदालत में केस भी हार चुके थे.

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Web Title: Debate: freedom of speech vs freedom of expression
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