भारत में बालविवाह प्रथा खत्म होने में लगेंगे 50 बरस और: यूनीसेफ

By: | Last Updated: Tuesday, 26 August 2014 6:48 AM

कोलकाता: भारत में बाल विवाहों के मामले पिछले दो दशक में कम जरूर हुए हैं लेकिन इस कमी की रफ्तार इतनी धीमी है कि इस कुप्रथा को पूरी तरह खत्म होने में अभी 50 बरस और लग जाएंगे. भारत में यूनीसेफ की बाल सुरक्षा विशेषज्ञ डोरा गियूस्टी ने प्रेस ट्रस्ट को बताया ‘‘पिछले दो दशक से बाल विवाह की संख्या में हर साल एक फीसदी की कमी आई है और यही सिलसिला जारी रहा तो इसे पूरी तरह खत्म होने में कम से कम 50 साल और लगेंगे.’’

 

डोरा ने देश में बालविवाह और उस पर रोक के संदर्भ में परिदृश्य को चिंताजनक बताते हुए कहा, ‘‘यह अवधि इतनी लंबी है कि तब तक लाखों लड़कियों का बाल विवाह हो चुका होगा.’’ उन्होंने बताया, ‘‘20 से 24 साल की विवाहित महिलाओं के अध्ययन से पता चलता है कि उनमें से 43 फीसदी का विवाह तो 18 साल से कम उम्र में ही हो गया था और सर्वे के दौरान हर पांच में से दो महिलाओं ने बताया कि उनका बाल विवाह हुआ था.’’

 

जुलाई में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बाल विवाह के प्रचलन के मामले में भारत का स्थान छठा है जहां हर तीन बाल वधुओं में से एक देश में रहती है. यूनीसेफ की अधिकारी ने बताया कि देश में कुछ समुदायों और समूहों में अभी भी बालविवाह का प्रचलन है और इस पर रोक की गति धीमी होने का मुख्य कारण इस बारे में फैली भ्रांतियां हैं.

 

डोरा ने कहा, ‘‘सामाजिक और लैंगिक कारणों के चलते आज भी बाल विवाह का चलन है. लड़कियों को बोझ समझा जाता है और उनपर किसी भी निवेश को व्यर्थ माना जाता है. पीढ़ियों से लड़कियों के युवा होते ही उनके अभिभावक यह सोच कर उनका विवाह कर देते हैं कि इससे वे हिंसा से बच सकेंगी.’’

 

उन्होंने बताया, ‘‘समुदाय अक्सर परिवर्तन पसंद नहीं करते. इसके अलावा गरीबी, विवाह पर होने वाला भारी भरकम खर्च और शिक्षा के अलावा लड़कियों के लिए अवसरों का अभाव इस चलन पर रोक की राह में बाधक हैं.’’

 

लड़कियों को स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहन स्वरूप और उसकी पढ़ाई जारी रखने में मदद के लिए भारत सरकार की नगद स्थानांतरण योजना से क्या बाल विवाह रोकने में मदद मिली है? इस सवाल पर डोरा ने कहा, ‘‘एक हालिया अध्ययन बताता है कि इस योजना से लड़कियों को पढ़ाई जारी रखने और उनका विवाह देर से करने में मदद मिली है लेकिन इसका दीर्घकालिक असर नहीं हुआ जैसे अभिभावकों की मानसिकता बदलने में इससे कोई मदद नहीं मिली.’’

 

अधिकारी के अनुसार, देश से बाल विवाह के पूरी तरह उन्मूलन के लिए एक ‘राजनीतिक इच्छाशक्ति’ की जरूरत है. डोरा ने कहा, ‘‘अगर हर स्तर पर राजनीतिक इच्छा शक्ति हो और शिक्षा, लड़कियों के लिए अवसर, परिवार की बेहतर आय और सतत जागरूकता कार्यक्रम पर जोर दिया जाए तो ठोस प्रयासों की मदद से यह कुप्रथा चरणबद्ध तरीके से समाप्त की जा सकती है.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘बालविवाह का चलन बेहद पुराना है इसलिए लोगों की मानसिकता और सामुदायिक नियमों में बदलाव बहुत मुश्किल है…इस पर रोक के लिए जागरूकता का प्रसार और व्यवहारगत बदलाव बेहद जरूरी है.’’

 

भारत में बालविवाह पर रोक के लिए यूनीसेफ की योजना के बारे में डोरा ने बताया, ‘‘यूनीसेफ इंडिया यह देखने के लिए प्रमाण जुटा रहा है कि बदलाव की गति तेज करने के लिए कौन से प्रयास बेहतर होंगे. करीब एक दशक में हमने बहुत प्रयास किए हैं. बालविवाह पर रोक का मतलब है बच्चों के खिलाफ हिंसा पर रोक, उनके अधिकारों के उल्लंघन पर रोक तथा उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मुद्दों का समाधान.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘कुल मिला कर हमारी रणनीति बाल विवाह से नुकसान के बारे में जागरूकता फैलाने, समुदायों को और नेताओं को इस चलन पर रोक के लिए गतिशील करने, कानून सही तरीके से लागू करने तथा लड़कियों को अधिकार संपन्न पर आधारित है.’’

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Web Title: India to take another 50 years to abolish child marriage completely: UNICEF
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