ब्लॉग: बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार

By: | Last Updated: Monday, 7 July 2014 4:03 PM
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नई दिल्ली: बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार..ये वो चुनावी नारा है जिसने इतिहास रचा. ये वो चुनावी नारा है जिसके साथ सत्ता रूढ़ भारतीय जनता पार्टी चुनाव मैदान में उतरी थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता को अच्छे दिनों का सपना दिखाया था. वो अच्छे दिन जो कांग्रेस शासन से बेहतर होंगे, जिसमें महंगाई कम होगी, किसी भी परिवार का बजट नहीं बिगड़ेगा. लेकिन मोदी सरकार बने हुए एक महीने से ज्यादा हो गए. महंगाई कम होने के बजाय लगातार बढ़ती ही जा रही है. सरकार बनने के एक महीने के अंदर ही सरकार ने बिना सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों के दाम बढ़ा दिए. रेल बजट से पहले रेल किराए में भारी बढ़ोत्तरी कर दी.

 

प्याज, आलू समेत सभी सब्जियों के भाव आसमान छू रहे हैं. हर महीने बढ़ते पेट्रोल और डीजल के दामों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है. डीजल के दामों ने हुई बढ़ोत्तरी ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है.

 

मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून औसत से कम रहने की संभावना है. ऐसे में अगर हर महीने डीजल के दाम बढ़ेंगे तो किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूब बेल पर ही निर्भर रहना होगा. ऐसे में बढ़ते डीजल के दाम किसानों के लिए वास्तव में चिंता का विषय है जो भविष्य में महंगाई को और बढ़ा सकती है. नेफेड के अनुसार अगर मानसून की वजह से प्याज की बुवाई में देरी होती है तो अक्टूबर-नवंबर तक प्याज की कीमतें 100 रुपये के आस-पास हो जाएगी. यानी कि महंगाई अभी और बढ़ने वाली है.

 

हालांकि बीजेपी सरकार की योजना है कि किसानों को मिलने वाले डीजल और कारों में भरे जाने वाले डीजल के दाम को अलग-अलग किया जाए. किसानों को डीजल पर सब्सिडी दी जाए और कारों में भरे जाने वाले डीजल को सब्सिडी मुक्त किया जाए. लेकिन सरकार की यह योजना बेहद ही मुश्किल है और यह कब क्रियान्वित होगी यह कह पाना अभी बहुत ही मुश्किल है.

 

अब सवाल ये है कि आखिर महंगाई क्यों बढ़ रही है और जिस महंगाई को रोकने का वादा भारतीय जनता पार्टी ने चुनावों से पहले किया था वो उसे चुनावों के बाद आखिर क्यों नहीं रोक पा रही है? और क्या ऐसे उपाय हैं जिनसे महंगाई रोकी जा सकती है?

 

बढ़ती महंगाई के लिए प्रमुख रूप से दो चीजें जिम्मेदार हैं. पहला और सबसे प्रमुख कारण है हर महीने बढ़ते पेट्रोलियम पदार्थो के दाम. क्योंकि डीजल के दाम बढ़ने से इसका सीधा असर माल ढ़ुलाई पर पड़ता है. जिससे खाद्य पदार्थों समेत सभी चीजों के दाम अचानक से बढ़ जाते हैं. पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते भाव के लिए सरकार फिलहाल इराक संकट को जिम्मेदार बता रही है. लेकिन जब इराक संकट नहीं था तब भी पेट्रोलियम के भाव लगातार बढ़ रहे थे. यूपीए सरकार के समय से ही डीजल के दाम को बाजार पर छोड़ दिया गया था. अंतरराष्ट्रीय बाजार में जैसे डीजल के दामों में उतार चढ़ाव होगा, भारत के घरेलू बाजार में भी वैसे ही दामों में फेरबदल होगा. लेकिन ये दाम कम होने के बजाय औसतन हर महीने 50 पैसे बढ़ ही रहा है.

 

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज के अनुसार अगर भारत में ऐसे ही डीजल के दाम बढ़ते रहे तो अगले एक  साल में भारत में डीजल पर सब्सिडी खत्म हो जाएगी. वैसे सरकार की भी यही योजना है. सरकार सब्सिडी खत्म करके धीरे धीरे राजकोषीय घाटा खत्म करना चाहती है.

 

महंगाई के बढ़ने का एक दूसरा प्रमुख कारण जमाखोरी है. लेकिन सरकार इस पर भी दोहरा रवैया अपनाती है. सरकार छोटे जमाखोरों के यहां तो छापे  मारती है लेकिन जो बढ़े-बढ़े शॉपिंग मॉल चला रहे हैं वहां छापे नहीं मारती है. जो कि बड़े स्टॉक होल्डर्स हैं. आलू और प्याज के दाम जमाखोरी की वजह से ही बढ़ रहे हैं.

 

अब सवाल ये है कि महंगाई कैसे कम होगी. क्योंकि सरकार का राजकोषीय घाटा भी कम होना जरूरी है. क्योंकि अगर राजकोषीय घाटा बढ़ेगा तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

 

महंगाई को कम करने के लिए दो तरह से उपाय किए जा सकते हैं. पहला तात्कालिक उपाय जिसका असर तुरंत दिखे और दूसरा दीर्घकालिक उपाय जिससे कि भविष्य में बढ़ने वाली महंगाई के खतरे से निपटा जा सके.

 

तात्कालिक उपाय में सरकार को जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहिए. ना केवल छोटे स्टॉक होल्डर्स के यहां बल्कि जो बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल है वहां भी. जो कि बड़े पैमाने पर स्टॉक होल्डिंग करते हैं वहां भी सरकार को छापे मारने चाहिए ताकि जनता को महंगाई से तुरंत कुछ आराम मिल सके.

 

दीर्घकालिक उपाय में सरकार को देश के पीडीएस यानी की पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को ठीक करने की जरूरत है. दूसरा कि सरकार को अपने गैर जरूरी खर्चे कम करने होंगे. और जो भी सरकारी योजनाएं हैं वो सही दिशा में क्रियान्वित हों. मनरेगा जैसी योजनाओं का सही लाभ कृषि के जरिए से ही लिया जा सकता है. सरकार को चाहिए की मनरेगा जैसी योजनाओं को बंद ना करके इसका प्रयोग कृषि के लिए किया जाए ताकि पैदावार अच्छी हो और किसानों को इसका लाभ मिले. और इससे भविष्य में महंगाई भी कम हो सकेगी.

 

हर दिन बढ़ती महंगाई से जनता के अच्छे दिनों का सपने अब बुरे दिनों में बदलने लगा हैं. जनता की उम्मीदें अब धीरे-धीरे टूटने लगीं हैं. हालांकि कुछ लोग अभी सरकार को वक्त देने की बात कह रहे हैं तो कुछ लोग इसे कांग्रेस राज की दुर्दशा मान रहे हैं जिसे बीजेपी की सरकार ठीक कर रही है.

 

लेकिन कुछ भी हो दिन प्रति दिन बढ़ती महंगाई ने जनता के होश जरूर उड़ा दिए हैं और जनता को एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यहीं अच्छे दिन आने वाले थे?

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