मानवता को मिटाने वाले परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा ईरान

By: | Last Updated: Thursday, 16 July 2015 6:26 AM
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नई दिल्ली: 13 साल से जिद पर अड़े ईरान ने अपनी जिद छोड़ दी है. ईरान अब परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और बदले में ईरान पर लगी कारोबारी पाबंदियां धीरे धीरे हटा ली जाएंगी. इस ऐतिहासिक समझौते के बाद दुनिया के नक्शे पर ईरान की अहमियत अचानक बढ़ गई है.

 

लेकिन क्या सिर्फ इसलिए कि उसके पास मौजूद तेल के भंडारों के दरवाजे दुनिया के लिए खुल जाएंगे या इससे भी बड़ी वजह. आतंकी संगठन आईएस के हाथों होने वाली बेशुमार हत्याओं की तस्वीरें देखी होंगी. क्या उन तस्वीरों से ईरान के ऐतिहासिक समझौते का कोई कनेक्शन है?

 

ऐतिहासिक समझौता

ईरान की सड़कों पर जश्न की तस्वीरें आज पूरी दुनिया देख पा रही है तो सिर्फ इसलिए क्योंकि ईरान परमाणु हथियार बनाने की अपनी जिद छोड़कर दुनिया के साथ एक बार फिर कदम मिलाकर चल पड़ा है. 14 जुलाई को हुए इस समझौते का असर दुनिया की राजनीति पर पड़ने जा रहा है लेकिन इससे पहले देखिए ईरान परमाणु हथियार बनाना कैसे बंद करेगा.

 

धरती से मिलने वाले नाभिकीय ईंधन का नाम है यूरेनियम लेकिन परमाणु हथियार बनाने में इसका इस्तेमाल सीधे नहीं होता. इसे बेहतर बनाना पड़ता है और इसके बाद संवर्धित ईंधन बनता है.
 

  • अब अगर परमाणु ईंधन जैसे बिजली बनानी तो यूरेनियम में 3.7 फीसदी तक बदलाव किए जाते हैं.

  • लेकिन परमाणु बम बनाने के लिए यूरेनियम में 20 से 27 फीसदी बदलाव करने की जरूरत होती है

  • इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के मुताबिक ईरान ने परमाणु हथियारों के लिए जरूरी 20 फीसदी से ज्यादा बदलाव की तकनीक हासिल कर ली थी

  • लेकिन अब ईरान ये तकनीक इस्तेमाल नहीं करेगा. अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां अब जांच भी कर पाएंगी जिससे ईरान 13 बरस से इंकार करता रहा था.

 

सीधा असर

सीधा असर ये है कि दुनिया भर में अपनी बड़ी और विध्वंसक सैन्य ताकत का दावा करके बार बार दुनिया पर दबाव बनाने वाला ईरान अब कम से कम मानवता को मिटाने वाले हथियार नहीं बना पाएगा.

 

लेकिन क्या आप ये जानते हैं?

बीते दो साल से अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन है आईएस यानी अबू बकर अल बगदादी का आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट. अब तक के सबसे क्रूर सुन्नी आतंकी संगठन आईएस यानी इस्लामिक स्टेट के खौफ को मिटाने के लिए भी अमेरिका और उसके पांच सहयोगी देशों के साथ ईरान का ये समझौता बेहद अहम माना जा रहा है.

 

इसकी वजह है मध्य पूर्व के मुस्लिम देशों ये नक्शा जो शिया और सुन्नी समुदाय की सत्ता और समर्थन को दिखाता है. इस नक्शे में ईरान, कुछ हद तक यमन और लेबनान में ही शियाओं की आबादी ज्यादा है. जब कि सऊदी अरब, इराक, सीरिया, जॉर्डन, ओमान और यूएई जैसे देशों में सुन्नी ताकतवर हैं.

 

खौफ की ऐसी तस्वीरें पेश करने वाला आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट भी सुन्नी लड़ाकों का ही संगठन है. ऐसे में अमेरिका इराक में सद्दाम की सुन्नी सत्ता को मिटाने की वजह से आईएस के निशाने पर है और अब वो ईरान की जमीन पर पांव रखकर आईएस के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई लड़ना चाहता है. और इसलिए वो ईरान से 35 साल पुरानी दुश्मनी भूल गया है.

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