करगिल युद्ध के बावजूद मुशर्रफ के भारत में शानदार स्वागत से हैरान थे कसूरी

By: | Last Updated: Saturday, 5 September 2015 5:16 AM
khurshid m kasuri

लाहौर: पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी ने कहा कि उन्हें हमेशा इस बात पर ‘हैरानी’ होती है कि करगिल युद्ध के लिए जिम्मेदार समझे जाने के बावजूद तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का 2001 के भारत दौरे में गर्मजोशी से स्वागत किया गया.

 

कसूरी ने अपनी नयी किताब ‘नीदर अ हॉक नॉर अ डव’ में मुशर्रफ की दो बार की भारत यात्रा की विस्तृत चर्चा की है. मुशर्रफ राष्ट्रपति के तौर पर पहली बार 2001 में आगरा शिखर सम्मेलन और दूसरी बार 2005 में भारत गए थे.

 

कसूरी ने किताब में विस्तृत रूप से इन दौरों के ब्यौरे और कुछ रोचक किस्से साझा किए हैं. अगले हफ्ते यहां किताब का विमोचन किया जाएगा.

 

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस किताब का दुनियाभर में प्रकाशन करेगी जबकि भारत में पेंगुइन बुक्स इसे लेकर आएगी. कसूरी ने किताब में नवंबर 2002 से नवंबर 2007 के बीच देश के विदेश मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के अनुभवों को साझा किया है.

 

मुशर्रफ के पहले भारत दौरे को याद करते हुए कसूरी ने लिखा है, ‘‘मुझे हमेशा इस बात पर हैरानी होती है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ जिनकी भारतीय मीडिया ने करगिल युद्ध के बाद बेहद नकारात्मक छवि पेश की थी उसी मीडिया ने मुशर्रफ को (तत्कालीन) प्रधानमंत्री (अटल बिहारी वाजपेयी) द्वारा भारत आने के लिए न्यौता भेजे जाने पर उनका यशगान किया था.’’

 

कसूरी ने इसके बाद भारत में 1999 के करगिल युद्ध का जिम्मेदार समझे जाने वाले मुशर्रफ के इस तरह के स्वागत के कारणों पर प्रकाश डाला है. पूर्व विदेश मंत्री ने लिखा है कि मुशर्रफ को आने का न्यौता इसलिए दिया गया क्योंकि दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी तरह ठप हो गयी थी और दोनों देशों के परमाणु परीक्षणों को देखते हुए यह महसूस किया जा रहा था कि युद्ध अब कोई विकल्प नहीं है और बातचीत का कोई विकल्प नहीं हो सकता.

 

उन्होंने यह भी लिखा है कि भारत तेज आर्थिक विकास के दौर से गुजर रहा था और उसका मध्यवर्ग और वैश्विक प्रतिष्ठा एवं संपर्क चाहता था जो तब तक मुश्किल था जब तक पाकिस्तान के साथ भारत का टकराव जारी रहता.

 

कसूरी ने लिखा है, ‘‘मुशर्रफ की भारत यात्रा की घोषणा के बाद मीडिया में जबरदस्त चर्चाएं शुरू हो गयीं और सभी प्रमुख भारतीय चैनलों ने उनकी आसन्न यात्रा से जुड़ी खबरों को विस्तृत रूप से दिखाया. उन्होंने अपनी खबरों में यह तथ्य भी पेश किया कि राष्ट्रपति मुशर्रफ का जन्म दिल्ली में हुआ था.’’

 

उन्होंने लिखा, ‘‘मुशर्रफ के पैतृक घर को लेकर काफी रूचि से खबरें दिखायी गयीं और मीडिया एक पुरानी आया तक को सामने लेकर आ गया जिनकी याद्दाश्त शानदार थी और जिन्हें वह समय याद था जब उन्होंने मुशर्रफ की उनके बाल्यकाल में देखभाल की थी.’’

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