13 दिन से जारी है मधेशियों की नाकाबन्दी जारी, बातचीत के लिए कमेटी का गठन दो दिन की बातचीत विफल

By: | Last Updated: Wednesday, 7 October 2015 5:59 PM
madeshi contine protest

काठमाण्डू: नेपाल-भारत बॉर्डर पर मधेशियों के नाकाबन्दी के कारण नेपाल में तेल की किल्लत है . नेपाल के नए संविधान के खिलाफ 54 दिनों से मधेशियों का आंदोलन चल रहा है. मधेशियों ने आंदोलन को और तेज करते हुए सभी आन्दोलनकारियों ने पिछले 13 दिन से नेपाल-भारत के सभी बॉर्डर पर नाकाबन्दी के ऐलान सहित बॉर्डर पर सभी नाको को बंद कर रखा है .

 

बॉर्डर पर ही धरना देने से भारतीय सीमा से पेट्रोलियम कन्टेनर, मालबाहक ट्रकों की आवाजाही पिछले 13 दिन से रुकी हुई है . जिसके वजह से नेपाल मे डीजल, पेट्रोल, गैस सहित खाद्य वस्तुओं की कमी हो गयी है. काठमांडू में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी लाइन लगी हुई है. नेपाल में भारत के रास्ते से ही पेट्रोलियम उत्पादों, कपडा, इलेक्ट्रोनिक समान और खाने का समान भेजा जाता है.

 

सत्ताधारी राजनीतिक दल नाकाबन्दी को लेकर भारत पर आरोप लगा रहे हैं . नेकपा एमाले, एकिकृत नेकपा माओवादी जैसी पार्टियों का आरोप है की ‘मधेश आन्दोलन के सर्पोट मे भारत ने अघोषित नाकाबन्दी कर रखा है. पर नेपाली कांग्रेस ने इस पर चुप्पी साधे हुए है.

 

नेकपा एमाले के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने बताया की ‘यह नाकाबन्दी मधेशियों का नहीं बल्कि भारत ने अघोषित रुप से करवा रखा है.’ एक कार्यक्रम बोलते हुए ओली ने कहा कि ‘भारत के कुछ सुझाव को हम लोगों ने नही माना जिस के वजह से वह अघोषित रुप से नेपाल में नाकाबन्दी कर रखा है .’

इधरआन्दोलनरत संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चाका एक घटक सघिय समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव ने एबिपि न्यूज से बताया की ‘नाकाबन्दी तक का आन्दोलन हमारी मजबुरी है पर सरकार अभी भी गंभीर नहीं है यह चिन्ता की बात है’

 

पूरे मामले पर भारत का कहना है कि भारत से नेपाल को सामान की आपूर्ति करने वाले ट्रांसपोर्टर्स नेपाल सीमा में प्रवेश करने से डर रहे हैं. नेपाल में भारतीय राजदुत रन्जित राय ने कहा आंदोनकारियों की उग्रता को ध्यान मे रखते हुए हम वाहनों को नही भेज सकते है . एबीपी न्यूज से बातचीत में राय ने कहा ‘हम ने कहीं नही रोका है, नेपाल सरकार सुरक्षा दे, ले जाए, हमे कोई आपत्ती नहीं.’

 

नेपाल के निचले इलाके में आंदोलन कर रहे लोगों का आरोप है कि 54 दिन से चल रहे आंदोलन को सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया है. मधेशी दलों के नेता और कार्यकर्ता बड़ी तदाद में सीमा पर पहुंच गए थे. यह प्रदर्शन दसगजा में बने बीरगंज, रक्सौल मैत्री पुल, बिराटनगर, जोगवनी, सुनौली, भैरहवा, रुपैडिया, नेपालगंज बॉर्डर पर हो रहा है .

 

इन इलाकों को नो मैन लैंड समझा जाता है. बीरगंज–रक्सौल मैत्री पुल पर नकाबन्दी का नेतृत्व कर रहे सद्भावना पार्टी के अध्यक्ष राजेन्द्र महतो ने कहा है कि नेपाल सरकार मधेशीयों की बात तब ही सुनेगी जब काठमांडू का दाना–पानी बंद कर  दिया जाएगा.  मजबूरी के कारण हमारी नाकाबन्दी 13 दिन से जारी है.

 

अन्दोलन कर रहे मधेशियों की नए संविधान की 35 धाराओं में सुधार की मांग है, जिसमें नागरिकता के नियम में संशोधन और जनसंख्या के तहत निर्वाचन.

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Web Title: madeshi contine protest
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