मंगल पर पानी की खोज के लिए नया तरीका

By: | Last Updated: Sunday, 5 October 2014 1:02 PM

वाशिंगटन: ज्वालामुखी चट्टानों की संरचना में तत्वों की मात्राएं निर्धारित करने के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले ‘ग्राउंडमास क्रिस्टलीनिटी’ नामक संकेतक की मदद से मंगल पर पानी खोजा जा सकता है. यह जानकारी एक अध्ययन में दी गई है.

 

वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी की एक छात्रा केल्लिए वाल ने कहा है, “मैं समझती हूं कि ज्वालामुखी संरचना की मात्रा निर्धारित करना पानी की कहानी का नया तथ्य है जिसकी अभी तक खोज नहीं की जा सकी है.”

 

तरल ज्वालामुखी चट्टानें जैसे ही पानी के संपर्क में आती है तेजी से ठंडा होने लगती है. अधिकांशत: ग्लास बनने के लिए अचानक जमती हैं. पानी के बिना यह ठंडा होने में लंबा समय लगाती हैं और ग्राउंडमास के भीतर रवादार बनती है.

 

एक्स-रे का इस्तेमाल कर वाल ने न्यूजीलैंड और इटली के माउंट एटना की चट्टानों के नमूनों का विश्लेषण किया. उन्होंने उसके बाद उनका मिलान नासा द्वारा मार्स रोवर के एक्स-रे के विश्लेषण से किया.

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