जिनपिंग से मिले मोदी, सीमा व व्यापार असंतुलन पर चर्चा

By: | Last Updated: Tuesday, 15 July 2014 4:39 PM

ब्राजील: ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लने ब्राजील गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलकात की और उनसे दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का निपटारा सौहार्दपूर्ण तरीके से करने की बात कही.

 

दोनों देशों ने अपने आर्थिक संबंध को विस्तृत करने और व्यापार असंतुलन को दुरुस्त करने की इच्छा जताई प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद जिंगपिंग से पहली मुलाकात में मोदी ने देश के आधारभूत संरचना के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की अपील भी चीन से की.

 

दोनों नेताओं के बीच मुलाकात तय से अधिक समय तक चली. जिनपिंग के साथ मोदी की 80 मिनट की मुलाकात चीन के साथ भारत की पहली शिखर स्तरीय वार्ता है. प्रधानमंत्री मोदी ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए ब्राजील के एक घंटे के भीतर ही मोदी की जिनपिंग से मुलाकात हुई.

 

चीन ने मोदी को नवंबर में होने वाले एशिया-पैसेफिक इकनॉमिक कोऑपरेशन (एपीईसी) में शामिल होने का निमंत्रण दिया है. छठा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 15-16 जुलाई को आयोजित हो रहा है.

 

प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि भारत और चीन दोनों ने सीमा विवाद का हल ढूंढे जाने की जरूरत पर जोर दिया. मोदी ने कहा कि सीमा विवाद के मुद्दे पर आपसी भरोसे और विश्वास को मजबूत करने तथा सीमा पर शांति कायम रखने की जरूरत है.

 

बयान के अनुसार मोदी ने जिनपिंग से कहा, “यदि भारत और चीन सीमा विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा लेते हैं, तो यह पूरे विश्व के लिए संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का बेहतरीन उदाहरण होगा.” मोदी ने ट्विटर पर लिखा था कि चीन के राष्ट्रपति के साथ उनकी मुलाकात और चर्चा लाभदायक रही.

 

उन्होंने लिखा, “चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात लाभदायक रही. हमने कई मुद्दों पर चर्चा की.” मोदी ने यात्रा कठिनाइयों के कारण कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए अतिरिक्त मार्ग का मशविरा दिया, जिसे स्वीकार करते हुए जिनपिंग ने इस पर विचार करने की बात कही.

 

जिनपिंग ने मोदी को एपीईसी बैठक में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा, “भारत को शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) के साथ अपने संबंध मजबूत करने चाहिए.”

 

मोदी ने कहा कि भारत को एससीओ में फिलहाल पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है. प्रधानमंत्री मोदी ने देश में आधारभूत संरचना के क्षेत्र में चीनी निवेश बढ़ाने का भी अह्वान किया और उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन भी समाप्त होगा. जिनपिंग ने भी इससे सहमति जताते हुए कहा कि सतत आर्थिक संबंध के लिए व्यापार संतुलन आवश्यक है.

 

उन्होंने यह भी कहा कि भारत से चीन को निर्यात की जाने वाली सेवाओं में वृद्धि इस मुद्दे के समाधान का एक तरीका हो सकता है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात को गर्मजोशी भरा करार दिया.

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Web Title: modi_meet_jinping_talk_about_bordar
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