नासा के ओरियन क्रू मॉड्यूल में 1.7 लाख भारतीयों के नाम

By: | Last Updated: Sunday, 21 December 2014 11:24 AM
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चेन्नई: गुरूवार को मानवरहित क्रू मॉड्यूल का सफल परीक्षण किए जाने के साथ ही 1.7 लाख भारतीयों के लिए खुशी का एक और कारण आया जब एक माइक्रोचिप में उनके नाम लेकर गए नासा के एक ऐसे ही अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष यात्रा के बाद उसी दिन अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केनेडी अंतरिक्ष केंद्र वापस लाया गया .

 

नासा के अनुसार चार दिसंबर को रवाना किए गए इसके मानवरहित ओरियन क्रू मॉड्यूल अंतरिक्ष यान में लगी चिप में भारत से कुल 1,78,144 अंतरिक्ष प्रेमियों ने अपने नाम दर्ज कराए थे .

 

लोगों के नाम भेजने के मामले में भारत का स्थान अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर रहा. अमेरिका से 4,63,669 लोगों ने अपने नाम भेजे. शीर्ष पांच में शामिल रहे ब्रिटेन से 1,12,073, मेक्सिको से 51,505 और फिलीपीन से 39,991 लोगों ने अपने नाम अंतरिक्ष में भेजे.

 

विश्वभर से 230 देशों के कुल 13,79,961 नाम इस चिप में रिकॉर्ड किए गए.

 

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने एक विज्ञप्ति में कहा कि धरती से उपर 5,700 किलोमीटर से अधिक की यात्रा के बाद, मानव को अंतरिक्ष में ले जाने के उद्देश्य से निर्मित अन्वेषण यान ने 18 दिसंबर को फ्लोरिडा में केनेडी अंतरिक्ष केंद्र पहुचंने से पहले वायु मंडल में प्रवेश किया और प्रशांत सागर में उतरा .नासा ने इस साल अक्तूबर में माइक्रोचिप के जरिए अपने नाम मंगल सहित धरती की निचली कक्षा के परे के गंतव्यों पर भेजने के लिए लोगों को आमंत्रित किया था. माइक्रोचिप पर नामों ने अपनी पहली यात्रा नासा के सुदूर अन्वेषी कैप्सूल ओरियन की पहली प्रायोगिक उड़ान के साथ शुरू की थी.

 

प्रक्षेपण के बाद अंतरिक्ष यान धरती के इर्द गिर्द 4.5 घंटे के द्वि-कक्षा मिशन पर गया और 32,186.88 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तथा करीब 2204.44 डिग्री सेल्सियस का तापमान सहन करते हुए फिर से वायुमंडल में घुसा और प्रशांत सागर में उतरा .

 

लेकिन इन नामों की यात्रा यहीं नहीं थम गई . नासा ने आश्वासन दिया है कि ‘‘धरती पर लौटने के बाद नाम नासा की भविष्य की मंगल अन्वेषण उड़ानों और अभियानों के साथ उड़ान भरेंगे. चुनिंदा लोग वैश्विक अंतरिक्ष सुदूरवर्ती सोसाइटी के सदस्य के रूप में अधिक महत्व हासिल करेंगे .’’ ओरियन के कार्यक्रम प्रबंधक मार्क गेयर ने कहा, ‘‘नासा अन्वेषण की सीमाओं का दायरा बढ़ा रहा है और भविष्य में लोगों को मंगल पर भेजने के लिए कठोर परिश्रम कर रहा है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब हम लाल ग्रह पर कदम रखेंगे तो हम समूची मानवता के लिए अन्वेषण कर रहे होंगे . इन लोगों के नामों की उड़ान लोगों को हमारी यात्रा का हिस्सा बनने में सक्षम बनाएगी .’’ अंतरिक्ष प्रेमी मार्स डॉट नासा डॉट जीओवी पार्टिसिपेट के जरिए भविष्य की उड़ानों और नासा के मंगल अभियानों के लिए अपने नाम जमा कर सकते हैं .

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