हजारों मील दूर बेटे के लिए तरसता है मां का दिल

By: | Last Updated: Tuesday, 26 May 2015 3:26 PM

वेलिंगटन: नेपाल की रहने वाली ममता खनल को बेहतर जिंदगी की चाह ने भले ही पति के साथ न्यूजीलैंड जाने के लिए मजबूर किया हो, लेकिन उसका दिल 12,000 किलोमीटर दूर नेपाल में अपने तीन साल के बेटे प्रशिथ के लिए तरसता है.

 

नेपाल के हजारों परिवारों की तरह ही ममता के परिवार पर भी दुख के पहाड़ टूटे जब 25 अप्रैल को विनाशकारी भूकंप ने नेपाल को तहस नहस कर दिया. त्रासदी में नेपाल स्थित ममता का घर भी तबाह हो गया, जहां उसका बेटा प्रशिथ अपने परिजनों के साथ रहता था.

 

समाचार पत्र ‘द न्यूजीलैंड हेराल्ड’ ने मंगलवार को जानकारी दी कि नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप और उसके बाद लगातार महसूस किए जा रहे झटकों के कारण वहां लोग सड़कों पर और खुले आसमान के नीचे रातें बिताने को मजबूर हैं. प्रशिथ और उसके परिजनों को भी भूकंप के झटके से मकान के ढहने के भय से खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है.

 

नेपाल में आए भूकंप से अबतक 9,000 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं हजारों पालतू पशु भी मारे गए हैं. नेपाल के ऐतिहासिक स्मारकों सहित हजारों मकान और भवन भूकंप में तबाह हो चुके हैं.

 

ममता उच्च शिक्षा के लिए अपने पति प्रदीप सपकोटा के साथ मार्च 2014 में न्यूजीलैंड गई थीं, ताकि पढ़ाई पूरी कर अच्छी नौकरी पा सके और अपने परिवार को अच्छी जिंदगी दे सके. ममता और प्रदीप की योजना थी कि जब प्रशिथ पांच साल का हो जाएगा तो उसे अपने पास न्यूजीलैंड ले आएंगे.

 

ममता ने आह भरते हुए कहा कि स्काइप में नेपाल में फैली तबाही और अपने परिवार की स्थिति देखकर उसका सब्र टूट गया है. उसने कहा कि यह देख-सुन कर कि वे लोग किन परिस्थतियों में रह रहे हैं, स्काइप पर बात करना मुश्किल हो जाता है.

 

ममता ने कहा, “जब मैं अपने घर को देखती हूं और यह कि किस तरह वे लोग बाहर खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं, तो दिल भर आता है. बात भी नहीं की जाती.” उसने आगे कहा, “जब बेटे से बात करती हूं, वह रोते हुए मुझसे पूछता है कि मैं कब न्यूजीलैंड आऊंगा.”

 

ममता ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि अपने बेटे को न्यूजीलैंड बुला लें. ममता छात्र वीजा पर न्यूजीलैंड आई है, जिसका मतलब है कि वह सप्ताह में 20 घंटे से ज्यादा काम नहीं कर सकतीं, वहीं प्रदीप पर्यटन वीजा पर पत्नी के साथ न्यूजीलैंड आया है और जबतक उन्हें काम का वीजा नहीं मिल जाता रोजगार मिल पाना मुश्किल है.

 

ममता ने कहा, “प्रदीप को जब नियमित रोजगार मिल जाएगा, तब ही हम बेटे को यहां ला सकेंगे.” ममता ने कहा कि वह और प्रदीप कड़ी मेहनत करना चाहते हैं ताकि अपने परिवार के लिए रुपये भेज सकें.

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