nepal earthquake again

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By: | Updated: 27 Apr 2015 05:41 PM

काठमांडो: भूकंप प्रभावित नेपाल में आज ताजा झटके महसूस किये गये जिससे लोगों में दहशत फैल गयी. हालांकि तत्काल इन झटकों की तीव्रता का पता नहीं चल पाया है.

आज जैसे ही झटके महसूस किये गये, लोग अपनी इमारतों से खुले में निकल आये. पहले से ही खुले इलाकों में सो रहे अधिकतर लोगों में भी दहशत फैल गयी.

 

पानी, बिजली, भोजन और दवाओं की कमी की वजह से नेपाल में संकट गहरा रहा है. यहां मृतक संख्या 4000 पार कर गयी है और हजारों लोग खुले में रह रहे हैं.

 

क्या हुआ आज संसद में

 

संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने एक दिन का वेतन राहत कार्यो के लिए दिए जाने का एक प्रस्ताव भी रखा जिसे सदस्यों ने तुरंत स्वीकार कर लिया. लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान नेपाल संकट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत में भूकंप के कारण मारे गए लोगों की संख्या 72 तक पहुंच गयी है जिनमें से 56 लोग बिहार में, 12 उत्तर प्रदेश में और एक एक पश्चिम बंगाल तथा राजस्थान में मारे गए हैं.

 

पड़ोसी देश में चलाए जा रहे भारत के विशाल बचाव एवं राहत अभियान का ब्यौरा देते हुए सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की दस टीमें पहले से ही काठमांडू में हैं तथा छह और टीमों को भेजा जा रहा है. इसके साथ ही एक इंजीनियरिंग कार्य बल तथा 18 चिकित्सा यूनिटों को भी पड़ोसी देश भेजा गया है.

 

गृह मंत्री ने बताया, ‘‘हमारा एक मानवरहित यान भी रवाना किया गया है.’’ उन्होंने साथ ही बताया कि राहत और बचाव कार्यो में समन्वय के लिए गृह मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी की अगुवाई में अंतरमंत्रालयी टीम को 250 अत्याधुनिक वायरलेस सेटों के साथ भेजा गया है.

 

इसे एक ‘‘बहुत बड़ा हादसा’’ बताते हुए सिंह ने कहा कि भारत संकट की इस घड़ी में नेपाल और भारत में प्रभावित हुए लोगों के साथ खड़ा है. उन्होंने नेपाल से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए वहां बसें भेजने और सीमा पर राहत शिविर स्थापित करने के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राज्य सरकारों का भी आभार जताया.

 

नेपाल में ध्वस्त संचार प्रणाली को दुरूस्त करने के लिए संचार विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा गया है.

 

गृह मंत्री ने बताया, ‘‘हम विदेशियों की भी मदद कर रहे हैं. हमने भारत आने के इच्छुक विदेशियों को मुफ्त वीजा देने का भी फैसला किया है. इस संबंध में आव्रजन सुविधाएं स्थापित की गयी हैं.’’

 

भारत पड़ोसी देश के लोगों की मदद के लिए पहले ही 22 टन भोजन सामग्री, दो टन चिकित्सा सामग्री, 50 टन पानी और भारी संख्या में कंबल तथा अन्य राहत सामग्री भेज चुका है.

 

भूकंप के तुरंत बाद नेपाल को मदद पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल की सराहना करते हुए गृह मंत्री ने स्वीकार किया कि उन्हें प्रधानमंत्री से ही इस त्रासदी की सूचना मिली थी.

 

उन्होंने कहा, ‘‘गृह मंत्री के नाते, मुझे इसकी जानकारी पहले होनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने मुझे सूचित किया.’’

 

नेपाल के संकट पर सदन में हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए कुछ सदस्यों ने ऐसी संकटपूर्ण स्थितियों से निकलने के लिए आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूती प्रदान किए जाने की जरूरत को रेखांकित किया. बीजद के भृतुहरि मेहताब और भाजपा के योगी आदित्यनाथ ने तिब्बत में भूकंप के कारण हुई तबाही के संबंध में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आने पर हैरानी जाहिर करते हुए सरकार से इस संबंध में विस्तृत ब्यौरा हासिल किए जाने की अपील की.

 

आदित्यनाथ ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र, विशेषकर तिब्बत में पर्यावरणीय नुकसान का परिणाम भूकंप के रूप में सामने आया है जहां तिब्बत के जरिए चीन नेपाल तक भूमिगत रेल संपर्क की योजना बना रहा है.

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