फ्रांस के पैट्रिक मोदियानो को नोबेल साहित्य पुरस्कार

By: | Last Updated: Thursday, 9 October 2014 2:05 PM
Nobel

स्टॉकहोम:  नाजियों के कब्जे और उसकी वजह से फ्रांस पर पड़े प्रभावों का जीवन भर अध्ययन करने वाले फ्रांसीसी उपन्यासकार एवं लेखक पैट्रिक मोदियानो को आज साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया.

स्वीडिश अकादमी ने 80 लाख क्रोनर (11 लाख अमेरिकी डॉलर) का यह पुरस्कार मोदियानो को दिया है. उन्होंेने युद्ध से जुड़ी स्मृतियांे और इसके मानव की नियति पर पडने वाले प्रभावों को बखूबी उकेरा है. यह पुरस्कार उनको उनकी इसी खूबी के लिए दिया गया है.

 

मोदियानो (69) के उपन्यास ‘‘मिसिंग पर्सन’’ को 1978 में प्रतिष्ठित प्रिक्स गोनकोर्ट पुरस्कार मिला था. उनका जन्म यूरोप में जुलाई 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के दो माह बाद पश्चिमी पेरिस के उपनगरीय क्षेत्र में हुआ था. उसके पिता इटली मूल के यहूदी थे और वह पेरिस में जर्मनी के कब्जे के दौरान बेल्जियम की अभिनेत्री मोदियानो की मां से मिले थे.

 

यहूदीपन, नाजियों का कब्जा और खोयी हुई पहचान. ऐसे बिंब है जो उनके उपन्यासों में बार बार उभरते हैं. इनमें 1968 में आया उनका उपन्यास ‘‘ला प्लासे द इतोएले’’ शामिल हैं जिसे जर्मनी में यातना शिविर की यात्रणाओं के बाद के दौर की सबसे महत्वपूर्ण कृति माना जाता है.मोदियानो जब अपने जीवन की तीसरे दशक की शुरूआत में थे तो उन्हें अपने मित्र की मां और फ्रांसीसी लेखिका रेमंड क्वानेयु के चलते एक बड़ी सफलता मिली और उनका परिचय गिलीमार्ड पब्लिशिंग हाउस से करवाया गया.

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