भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसफजई को संयुक्त रूप से मिलेगा शांति का नोबेल पुरस्कार

By: | Last Updated: Wednesday, 10 December 2014 5:28 AM
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नई दिल्ली: आज भारत के कैलाश सत्यार्थी को दुनिया के सबसे बड़े सम्मान यानी नोबेल पुरस्कार से नवाजा जाएगा. सत्यार्थी के अलावा पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई को भी नॉर्वे में शांति का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा. कैलाश सत्यार्थी की पूरी कहानी ‘बचपन’ शब्द के इर्दगिर्द घूमती है चाहें उनका खुद ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ शुरु करने की बात या फिर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देने की बात.

कैलाश सत्यार्थी लंबे समय से बच्चों के अधिकार के लिए काम कर रहे हैं और मलाला पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए लड़ाई लड़ती रही है.

 

कौन हैं नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी?

 

दोनों को यह पुरस्कार उप महाद्वीप में बाल अधिकारों को प्रोत्साहित करने के उनके कार्य के लिए प्रदान किया जाएगा. 60 वर्षीय सत्यार्थी भारत में एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) चलाते हैं और वह बच्चों को बंधुआ मजदूरी कराने और तस्करी से बचाने के अभियान से जुड़े हैं.

 

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बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले कैलाश सत्यार्थी का नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है. वे 1980 से ही बाल मजदूरी के खिलाफ अभियान चला रहे हैं.  सत्यार्थी के संगठन बचपन बचाओ आंदोलन ने देश के अलग अलग हिस्सों से अब तक 80 हज़ार बच्चों को बाल मजदूरी से छुड़वाया है और उन्हें पुनर्वास भी करवाया है.

 

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सत्यार्थी ने बाल मजदूरी को मानवाधिकार के साथ-साथ बच्चों के कल्याण के तौर पर उठाया. उनका तर्क था कि गरीबी, बेरोज़गारी, अशिक्षा, जनसंख्या वृद्धि और दूसरे सामाजिक मुद्दों की के बारे में समाज को पता होना चाहिए और उससे निजात दिलाने के लिए कार्य करने चाहिए.

 

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वहीं 17 वर्षीय मलाला तब सुखिर्यों में आयीं जब तालिबान आतंकवादियों ने लड़कियों की शिक्षा की वकालत करने को लेकर उन्हें गोली मार दी थी. नोबेल शांति पुरस्कार समिति ने दोनों को इस वर्ष इस शीर्ष वैश्विक पुरस्कार के लिए चुना.

मलाला को शांति पुरस्कार श्रेणी में गत वर्ष भी नामांकित किया गया था. मलाला ने तालिबान के हमले के बाद भी तब जबर्दस्त साहस दिखाया था जब उन्होंने विशेष तौर पर पाकिस्तान जैसे देश में बाल अधिकारों और लड़कियों की शिक्षा के लिए अपना अभियान जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी.

 

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गोली लगने के बाद घायल मलाला को बेहतर इलाज के लिए बर्मिंघम स्थित क्वीन एजिजाबेथ अस्पताल ले जाया गया था. वहां उनके उन घावों का इलाज किया गया था जो उनकी जान को खतरा उत्पन्न कर रहे थे. वह लड़कियों की शिक्षा का अपना अभियान जारी रखे हुए हैं.

 

मलाला सबसे कम उम्र की नोबेल पुरस्कार विजेता

 

मलाला सबसे कम आयु की नोबेल पुरस्कार विजेता बन गई हैं सत्यार्थी मदर टेरेसा के बाद शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं. सत्यार्थी और मलाला प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय उन हस्तियों की विशिष्ट सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने विश्व शांति और अन्य क्षेत्रों में अपने उल्लेखनीय कार्य के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार साझा किया.

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