अमेरिकी हमले से पहले पाकिस्तान का वह ‘महफूज’ ठिकाना छोड़ना चाहता था ओसामा

By: | Last Updated: Thursday, 21 May 2015 1:07 PM

वाशिंगटन: पाकिस्तान के एबटाबाद में एक महफूज ठिकाने पर लंबे समय तक तनहा रहने से आजिज ओसामा बिन लादेन अमेरिकी कमांडो हमले से कुछ महीने पहले इसे छोड़कर कहीं और चले जाना चाहता था, लेकिन वह ऐसा कर नहीं पाया और उसी ‘महफूज’ ठिकाने में मारा गया.

 

सीआईए की नजर में आने और मारे जाने से कुछ महीने पहले ओसामा ने लिखा था कि उसके किसी दूसरी जगह चले जाने का शायद यही समय है. ऐबटाबाद में अपने परिसर में अकेला रहने पर गहरी कुंठा प्रकट करते हुए अलकायदा नेता ने वहां से चले जाने का इरादा किया था.

 

ओसामा ने उसे शरण देने वाले और बाहरी दुनिया के लिए उसके प्राथमिक संपर्क सूत्रों – दो पाकिस्तानी भाइयों का जिक्र करते हुए लिखा, ‘‘मुझे लगता है मैं उन्हें छोड़ दूं. ’’ उसने पत्नी खरिया को लिखा, ‘‘लेकिन दूसरी जगह का इंतजाम करने में कुछ महीने लगेंगे जहां तुम, हमजा और उसकी बीवी हमारे पास आ सकें. मैं तुमसे माफी मांगता हूं और उम्मीद करता हूं कि तुम हालात को समझोगी और दुआ करता हूं कि अल्लाह हम लोगों की मुलाकात आसान बनाए. इंशा अल्लाह. ’’

 

इसके छह माह से भी कम समय बाद मई, 2011 में अमेरिकी नौसेना के सील कमांडों ने ऐबटाबाद में उस परिसर पर हमला किया था और ओसामा एवं उसके पाकिस्तानी साथियों को मार गिराया था.खरिया, जिसके नाम खत लिखा गया था और आखिरकार ऐबटाबाद में ओसामा के पास पहुंची थी. उसे पकड़कर पाकिस्तानी प्रशासन के हवाले कर दिया गया था.

 

ओसामा का यह खत हाल ही में सार्वजनिक किए गए उन दस्तावेज का हिस्सा है जो ओसामा के ऐबटाबाद परिसर से मिले थे. राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय ने कल उन्हें जारी किया. इन दस्तावेजों में कुछ बेहद मार्मिक संदेश है जिनमें वहां रहने की मुसीबतों का जिक्र हैं. उनमें यह खत भी शामिल हैं जिसे ओसामा ने अपनी पत्नी खरिया को 2011 में लिखा था. खराह परिवार के उन सदस्यों में शामिल थी जिन्होंने ईरान में शरण ले रखी थी.

 

तीन पृष्ठों के इस दस्तावेज में ओसामा ने अपने परिवार से फिर मिलने की उनकी हसरत और इसे पूरा करने के प्रयासों का जिक्र किया है. उसने लिखा है कि ऐसा करने के उसके प्रस्तावों को अबू अहमद अल कुवैती और उसके भाई ने खारिज कर दिया जिन पर अलकायदा नेता की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी. इन दोनों के परिवार भी उसी परिसर में रहते थे.

 

ओसामा ने लिखा, ‘‘मैं उनके साथ रह रहा हूं इसके नतीजतन अब वह सुरक्षा के लिहाज से थकने लगे हैं और बेदम होने की हालत तक पहुंच चुके हैं और उन्होंने हमें वहां से चले जाने को कह दिया है. ’’ ओसामा ने लिखा कि उसने कुछ समझौते का प्रस्ताव रखा जैसे खरिया को कभी कभार कुछ दिन के लिए वहां आने देना या उसे परिसर में रहने वाले किसी अन्य सदस्य की जगह पर वहां आने देना ताकि परिसर में रहने वालों की संख्या बढ़े नहीं.

 

ओसामा ने लिखा कि उसके हिफाजतियों ने सारे प्रस्ताव खारिज कर दिए, जिसके बाद वह उस जगह को छोड़कर कहीं और चले जाने की संभावना पर गौर करने लगा.

 

अपना ठिकाना बदलने का ओसामा का जोखिमपूर्ण इरादा उसके भीतर सालों से एक ही स्थान पर रहने के कारण बढ़ रही उसकी कुंठा को दर्शाती है. इस दौरान उसकी दुनिया इस तिमंजिला परिसर की मजबूत चारदीवारी के भीतर ही सिमटकर रह गई थी और वह मरने के बाद ही इससे बाहर निकल पाया.

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Web Title: osama bin laden
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