हिन्दुस्तानी 'मुन्नी' को घर पहुंचा पाएगा पाकिस्तानी बजरंगी भाईजान?

By: | Last Updated: Sunday, 2 August 2015 5:22 AM

नई दिल्ली: हाल ही में 17 जुलाई को रिलीज़ हुई सलमान खान की फिल्म बजरंगी भाईजान आपमें से बहुत लोगों ने देखी या सुनी होगी. जिसमें बॉलीवुड के सुपरहीरो सलमान खान एक नन्ही पाकिस्तानी बच्ची मुन्नी को भारत में खो जाने के बाद उसे उसके घर पाकिस्तान छोड़ने जाते हैं. लेकिन सलमान को असल कठिनाई इस वजह से होती है क्योंकि वो बच्ची बोल नहीं सकती.

 

अब सुनिए असल कहानी अगर आपको पता चले की बिल्कुल ये घटना सिर्फ फिल्मी ही नहीं बल्कि असल जीवन में भी है. तो आपका क्या रिएक्शन होगा.

 

जी हां इस बार मुन्नी पाकिस्तानी की नहीं हिन्दुस्तान की है और बजरंगी भाईजान हिन्दुस्तानी नहीं बल्कि पाकिस्तानी है. आज से पूरे 15 साल पहले एक 5-7 साल की बच्ची ट्रेन के ज़रिये पाकिस्तान पहुंच गई. ये बच्ची पूरी तरह से ना सुन पाती है और ना ही कुछ बता पाती है. लगभग 15 सालों से पाकिस्तान में रह रही इस लड़की को उसके घर वापस हिन्दुस्तान पहुंचाने का बीड़ा कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने उठाया है.

हाल ही में एक बड़े समाचार पत्र में छपी एक खबर के अनुसार कराची स्थित अधिकार कार्यकर्ता बिलकीस इधी ने इस लड़की को ‘गीता’ नाम दिया है क्योंकि कोई उसका असली नाम नहीं जानता. गीता इन दिनों बिलकीस के साथ ही रह रही है. बिलकीस पाकिस्तान के सबसे बड़े चैरिटी संगठन इधी फाउंडेशन के संस्थापक अब्दुल सत्तार ईधी की पत्नी हैं.

 

सामाजिक कार्यकर्ता बिलकीस ने ये भी बताया कि, ‘गीता की उम्र 22 से 24 साल के बीच है. वो इशारों से बताती है कि वो एरोप्लेन से घर जाना चाहती है. कभी कभी वो बहुत रोती है. मेरी अल्लाह से यही दुआ है कि उसे परिवार से जल्दी मिला दे.’

 

बिलकीस कहती हैं कि गीता भारत के किसी बहुत धार्मिक परिवार से लगती हैं. उस बच्ची का सिर हमेशा दुपट्टे से ढका रहता है और वो हमेशा धार्मिक पढ़ती रहती है.

 

पाकिस्तान के जाने माने मानवाधिकार कार्यकर्ता और पूर्व मंत्री अंसार बर्नी ने भी सोशल मीडिया पेज पर एक अखबार की रिपोर्ट को शेयर करते हुए इस बच्ची की पूरी जानकारी आम जनता के साथ साझा की है. जिसमें अनसार बर्नी ने अपना फोन नंबर और पूरा पता भी दिया है. जिससे की उस लड़की के मां-बाप या परिवार तक ये जानकारी पहुंचे.

 

इतना ही नहीं अंसार बर्नी के ट्रस्ट दोनों मुल्कों में कैंप लगाकर इस लड़की के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.

 

बर्नी साहब का ये भी मानना है कि, ”गीता को उसके घर तक पहुंचाने के लिए जो प्रयास शुरू हुए हैं, उसके पीछे प्रेरणा ‘बजरंगी भाईजान’ फिल्म से मिली है.” अंसार बर्नी सितंबर में भारत आने वाले हैं, जहां धर्मशाला में उनका कार्यक्रम तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा से मिलने का है.

 

बर्नी ने ये भी कहा वो तीन साल पहले गीता के फोटो और विडियो भारत लेकर गए थे जिससे कि उसके परिवार को ढूंढा जा सके, लेकिन तब कोई सुराग नहीं मिल पाए थे.

 

बर्नी ने कहा कि, ”अगर भारत सरकार गीता के परिवार को ढूंढने में मदद करे तो बहुत शुक्रगुज़ार रहूंगा.”

 

 

बताया जा रहा है कि गीता करीब 15 साल पहले ट्रेन में भारत से लाहौर आ गई थी. पुलिस ने तब उसे सरकारी निराश्रित गृह में भेज दिया था.

 

गीता की ओर से बोल-सुन ना पाने की वजह से उसकी कठिनाईयां और बढ़ गईं. उसे एक अनाथालय से दूसरे अनाथालय में भेजा जाता रहा. कई बार उसने अपने घर वापस जाने के लिए प्रयास किया और स्टाफ पर गुस्सा भी जताया.

 

भारत में उसके परिवार को ढूंढने के प्रयास सफल नहीं हुए तो उसे कराची भेज दिया गया.

 

बिलकीस 2012 में गीता को अपने साथ ईधी फाउंडेशन में ले आईं.

 

गीता पाकिस्तान में इस कैंप में इशारों से बातें करती है जिसमें ये लगता है कि भारत में उसके 7 भाई और 5 बहने हैं. बिलकीस के मुताबिक गीता ने इशारों की भाषा में बताया कि वो अपना घर इसलिए छोड़ आई थी क्योंकि किसी बात पर अपने मां-बाप से नाराज़ हो गई थी.

 

तब उसने लंबा रास्ता पैदल चलने के बाद नदी पार की और एक ट्रेन में चढ़कर सो गई थी. बिलकीस का कहना है कि गीता संभवत: सरहद पर स्थित भारतीय पंजाब के किसी गांव से आई लगती है.

 

जबकि कई मौको पर वो अपने परिवार को याद कर रोने भी लगती है.

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Web Title: Pakistani Bajrangi Bhaijaan_Salman Khan_
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