स्कॉटलैंड अलग देश नहीं बनेगा, जनमत संग्रह में लोगों ने किया ब्रिटेन के साथ रहने का फैसला

By: | Last Updated: Friday, 19 September 2014 4:51 AM

लंदन: स्कॉटलैंड के लोगों ने आज ऐतिहासिक जनमत संग्रह में आजादी को खारिज कर दिया और ब्रिटेन के साथ अपने 307 साल पुराने रिश्ते को बरकरार रखने का निर्णय किया जो ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के लिए राहत की बात है. आज के आधिकारिक परिणाम में यह पुष्टि हुई कि स्कॉटलैंड के 32 परिषद क्षेत्रों में से 30 ने ‘ना’ के पक्ष में वोट डाला और ‘ना’ पक्ष ने 1,512,688 मत के मुकाबले 1,877,252 मत से बड़ी बढ़त हासिल कर ली थी.

जीत के लिए 1,852,828 मतों की आवश्यकता थी. जीत का अंतर जनमत सर्वेक्षण में अपेक्षित परिणाम से कोई तीन अंक अधिक रहा.

 

यह मत दो साल के अभियान और चर्चाओं का परिणाम है जिससे स्कॉटलैंड को अधिक शक्तियां हस्तांतरित की जाएंगी. स्कॉटलैंड वर्ष 1707 में ब्रिटेन का हिस्सा बना था.

 

स्कॉटलैंड के सबसे बड़े परिषद क्षेत्र और ब्रिटेन के तीसरे सबसे बड़े शहर ग्लासगो ने आजादी के पक्ष में मतदान किया. वहां आजादी के पक्ष में 169,347 के मुकाबले 194,779 मत पड़े. इसी तरह डुंडी, वेस्ट डुनबर्टनशायर और नॉर्थ लनार्कशायर ने भी ‘‘हां’’ के पक्ष में मतदान किया.

 

देश की राजधानी एडिनबर्ग ने 123,927 के मुकाबले 194,638 मत से आजादी को नकार दिया. वहीं 20,000 से अधिक मतों के अंतर से एबरडीन सिटी ने भी ‘‘ना’’ के पक्ष में मतदान किया.

 

कई अन्य इलाकों में ब्रिटेन समर्थित अभियान को बड़ी जीत हासिल हुई.

 

जनमत नतीजे आने के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि स्कॉटलैंड अब अलग देश नहीं बनेगा. स्कॉटलैंड के प्रति  हमारी जिम्मेदारी अब बढ़ गई है. स्कॉटलैंड को किए वादे पूरे होंगे.

 

जनमत संग्रह में लोगों को जो पर्ची दी गई थी उसमें लिखा था-क्या स्कॉटलैंड को एक स्वतंत्र देश होना चाहिए? हां या ना में जवाब मांगा गया था.

 

नतीजों से पहले हुए ओपिनियन पोल में 54 फीसदी यूके के साथ रहना चाहते हैं जबकि सिर्फ 46 फीसदी लोग अलग देश के साथ जाना चाहते हैं.

 

बैलेट के जरिए लोगों ने अपनी राय दी है इसलिए नतीजे आने में समय लग रहा है. 52 लाख में 42 लाख लोगों ने वोटिंग में हिस्सा लिया था.  अगर स्कॉटलैंड के लोगों ने हां में जवाब दिया तो 2016 से स्कॉटलैंड ब्रिटेन से अलग हो जाएगा.

 

 

आजादी क्यों चाहता है स्कॉटलैंड

जनमत संग्रह में शामिल स्कॉटलैंड के 42 लाख लोगों में से एक तिहाई ये मानते हैं कि इंग्लैंड के साथ 300 से भी ज्यादा पुरानी राजनीतिक यूनियन का अंत होना चाहिए और स्कॉटलैंड को यूनाइटेड किंगडम से अलग और आजाद हो जाना चाहिए.

 

इन लोगों की दलील है कि अगर स्कॉटलैंड को और ज्यादा स्वायत्तता मिली होती तो आज हालात एकदम अलग होते. ना सिर्फ स्कॉटलैंड की अर्थव्यवस्था बेहतर होती. बल्कि सामाजिक नीतियों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलता.

 

हालांकि स्कॉटलैंड में बहुमत इन दलीलों से सहमत नहीं है उसका मानना है कि यूके में रहकर स्कॉटलैंड ज्यादा सुरक्षित है. कुछ लोग ऐसे भी हैं जो स्कॉटलैंड की संसद को और ज्यादा वित्तीय और कानूनी शक्तियां देने की बात कर रहे हैं.

 

यूनाइटेड किंगडम का हिस्सा होने के बावजूद स्कॉटलैंड की अपनी संसद है. स्कॉटिश संसद के सदस्य शिक्षा, स्वास्थ्य, और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर कानून बना सकते हैं. लेकिन रक्षा, विदेश नीति, रोजगार, व्यापार और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है. स्कॉटिश की संसद में इस्तेमाल होने वाला ज्यादातर पैसा आज भी यूके सरकार की तरफ से दिया जाता है.

 

स्कॉटलैंड की आजादी की मांग के पीछे की वजहों को जानने की कोशिश करें तो कई और बड़े मुद्दे सामने आते हैं. वोटिंग में शामिल कई लोग स्कॉटलैंड की मौजूदा हालत से खुश नहीं हैं. उन्हें लगता है कि वो ब्रिटेन की राजनीति से जानबूझकर दूर रखे जाते हैं. स्कॉटलैंड के बंदरगाहों पर परमाणु हथियार रखने के यूके सरकार के फैसले पर भी लोग सवाल उठाते रहे हैं.

 

 

बंटवारे के खिलाफ क्यों यूके सरकार?

यूरोपियन रिसर्च सेंटर के मुताबिक यूके पूरे यूरोपियन यूनियन का 75 फीसदी तेल का उत्पादन करता है. इसमें से 90 फीसदी स्कॉटलैंड से ही आता है. 2012 के आंकड़े बताते हैं कि स्कॉटिश तेल का यूके की अर्थव्यवस्था में करीब 40 अरब डॉलर यानी 24 खरब से भी कहीं ज्यादा का योगदान है. यही नहीं स्कॉटलैंड हर साल करीब 100 अरब पाउंड यानि 99 खरब से ज्यादा का निर्यात करता है. इसमें 11 अरब पाउंड की वित्तीय सेवाएं और 9 अरब पाउंड का खाने पीने का सामान निर्यात होता है.

 

जाहिर है अगर करीब 42 लाख लोगों ने स्कॉटलैंड की आजादी के समर्थन में वोट दिया तो इसका बड़ा खामियाजा ब्रिटेन को उठाना होगा.