दिल्ली की हवा में घुले जहर को ये करिश्माई अंगूठी दूर कर सकती है!

By: | Last Updated: Tuesday, 8 December 2015 5:03 PM
smog filter tower and ring

नई दिल्ली : दिल्ली की हवा में घुला जहर दूर करने का काम एक अंगूठी कर सकती है. ये मजाक नहीं है बल्कि एक ऐसी हकीकत है जिसका इस्तेमाल दुनिया एक कोने में चार महीने पहले ही शुरू हो चुका है. आपका चैनल एबीपी न्यूज दिल्ली की जहरीली हवा से छुटकारा जुटाने वाली उस अंगूठी की बेहद दिलचस्प कहानी दिखाने जा रहा है जिसे जानना हम सबके लिए बेहद जरूरी है.

 

ये अंगूठी क्या दिल्ली की हवा की सेहत बदल सकती है?  सवाल अजीबोगरीब जरूर है लेकिन बेमकसद नहीं. आज हम इसी अंगूठी की कहानी दिखाने जा रहे हैं जिसकी दिल्ली की केजरीवाल सरकार को भी जरूरत है और देश के पर्यावरण मंत्रालय को भी. वो अंगूठी हीरे की तरह नहीं चमकती. ये अंगूठी तो आपकी राजधानी दिल्ली की हवा की तरह ही काली है लेकिन वादा करती है कि आपका कल जरूर सुनहरा हो सकता है.

 

सांसों में घुलता ये जहर

 

दुनिया के किसी शहर की हवा में अगर सबसे ज्यादा जहर घुला हुआ है तो वो है राजधानी दिल्ली. वो अब कैमरे की नजर से नजरें तक नहीं मिला पाती.  धुएं और जहरीली गैसों के पर्दे में छिपी नजर आती है.

 

मौसम जरूर सर्दी का है लेकिन आप हर नजारे को निगल लेने वाली इस धुंध को कुदरती कोहरा समझने की गलती मत कीजिए क्यों कि ये कोहरा यानी फॉग नहीं है जहरीला स्मॉग है.

 

क्या है स्मॉग?

 

कोहरे के साथ हमारी गाड़ियों और फैक्ट्रियों से निकले हुए धुएं और गैसों से मिलकर जो धुंध बनी है वो कहलाती है स्मॉग.

 

आसान शब्दों में स्मॉग कुल मिलाकर एक ऐसी जहरीली हवा है जो हमारी सांसें छीनने को तैयार है और हर किसी को इंतजार है कि क्या इस हवा से कभी कोई निजात मिलेगी?

 

सीधा सा जवाब है – धुआं कम करो – स्मॉग यानी जहरीली हवा अपने आप साफ हो जाएगी.

 

दिल्ली की केजरीवाल सरकार फार्मूला लाई है कि एक दिन सिर्फ ऑड नंबर यानी 1, 3, 5, 7 और 9 अंक के साथ खत्म होने वाले गाड़ी नंबर वाले वाहन चलें और दूसरे दिन 2, 4, 6, 8 और जीरो वाले वाहन. लेकिन क्या इससे वाकई हवा पूरी तरह साफ हो जाएगी?

 

प्रतिक्रियाएं दिखाई देने लगी हैं. आज ही सांसद केटीएस तुलसी साइकिल लेकर देश की संसद जा पहुंचे तो दूसरे सांसद मुंह पर मास्क लगाकर सेहत बचाने का जुगाड़ कर रहे हैं. प्रदूषण के खिलाफ हवा तो चल पड़ी है लेकिन दिल्ली की हवा है कि बदलती ही नहीं.

 

लेकिन बदल जरूर सकती है – कम से कम इस अनूठी अंगूठी से. ये वह अंगुठी है जिसका बाहर का हिस्सा पारदर्शी है और अंदर का हिस्सा पूरी तरह काला नजर आ रहा है.

 

जानते हैं क्या है ये?  यही है वो जहर जो अब तक आपके शहर की हवा में घुला हुआ था. पहले इसे अलग किया गया है– और इस अंगूठी में कैद कर दिया गया है.

 

हर बार एक ऐसी ही अंगूठी बनेगी जब आप के आसपास के दस मीटर लंबे- दस मीटर चौड़े और 10 मीटर ऊंचे इलाके की हवा से जहरीले कार्बन को छानकर अलग कर लिया जाएगा.

 

सुनकर अच्छा भी लग होगा और सुनने में महज एक सपना ही लगा होगा. लेकिन ये हकीकत है. लेकिन आपकी राजधानी दिल्ली की नहीं. ये तो दिल्ली से साढ़े 6 हजार किलोमीटर दूर रॉटरडर्म में एक डिजायनर के सपनों के हकीकत में बदल जाने की सच्ची कहानी है. ऐसी कहानी जिसे सुनना और समझना बेहद जरूरी है.

 

जानिए इस अंगूठी की फैक्ट्री – ऐसी फैक्ट्री जो हवा में जहर नहीं घुलने देती बल्कि हवा में घुले कार्बन, प्रदूषण के कणों को चूस लेती है- इस फैक्ट्री का नाम है– स्मॉग फ्री टावर यानी स्मॉग हटाने वाली मीनार. आप चाहें तो इसे दुनिया का सबसे बड़ा वैक्यूम क्लीनर भी कह सकते हैं और सबसे बड़ा एयर प्यूरीफायर भी. क्यों ये भी समझ लीजिए.

 

इसी साल 5 सितंबर को रोटरडर्म के Vierhavensstraat 52 के एक सार्वजनिक पार्क में लगाया गया ये दुनिया का ये पहला स्मॉग फ्री टावर दरअसल पार्क की हवा को साफ करने का काम कर रहा है. इसके इस्तेमाल से हवा में मौजूद 70 फीसदी प्रदूषण गायब हो जाता है और इससे छनकर आने वाली हवा इतनी साफ हो जाती है कि सेहत को कोई खतरा नहीं रहता.

 

स्मॉग फ्री टावर को बनाया है स्टूडियो रूजगार्द ने जिसे चलाते हैं 36 साल के युवा डिजायनर रूजगार्द – रूजगार्द की स्मॉग फ्री टावर बनाने की जिद और जुनून की कहानी भी बताएंगे लेकिन पहले  जानिए रूजगार्द का ये टॉवर कैसे काम करता है.

 

इस टावर की ऊंचाई है 7 मीटर यानी करीब 23 फुट और इसकी चौड़ाई है साढ़े तीन मीटर इसके छह दीवारों पर वेंटिलेटर यानी हवा को निकलने के लिए जाल नजर आता है. और ऊपर से देखने पर तीन प्लेट्स नजर आती हैं.

 

इसी ऊपर के हिस्से से वातावरण में मौजूद प्रदूषित हवा इसके भीतर खींच ली जाती है. टावर के अंदर इस हवा में धुएं की वजह से पैदा हुआ कार्बन और दूसरे कण छान लिए जाते हैं और फिर टावर की इन छह दीवारों से हवा साफ होकर वापस वातावरण में आ जाती है.

 

इस प्रक्रिया में ये टावर हर घंटे एक गीजर जितनी यानी 1400 वाट बिजली का इस्तेमाल करता है एक घंटे में इस टावर से करीब 30,000 घन मीटर हवा साफ की जा सकती है. यानी कम से कम इसके चारों तरफ साफ हवा का एक घेरा बन जाता है.

 

डिजायनर रूजगार्द ने इस प्रोजेक्ट को हकीकत में बदल दिया है. अब तक इकट्ठा किए गए आंकड़ों के मुताबिक स्मॉग फ्री टावर ने खुली जगह में हवा को 60 फीसदी तक साफ कर दिया, जबकि नीदरलैंड के एक बंद पार्किंग एरिया में हवा 70 फीसदी तक साफ हो गई. ऐसा कोई फार्मूला अब तक हमारे देश में मौजूद नहीं है.

 

अब आप ये जरूर सोच रहे होंगे कि अगर ये इतनी कामयाब तकनीक है तो अब तक हमने इसे इस्तेमाल क्यों नहीं किया. इसकी वजह ये है कि डिजायनर रूजगार्द ने इसे इसी साल तैयार किया है. पहले चरण वो इसे चीन के सबसे प्रदूषित शहर बीजिंग में लगाना चाहते हैं. उनकी लिस्ट में मैक्सिको और दिल्ली भी है लेकिन पेंच ये है कि ऐसे स्मॉग फ्री टावर बनाने के लिए अभी तक किसी कंपनी ने पहल नहीं की है.

 

जो हुआ है वो सिर्फ इतना कि ये स्मॉग फ्री टावर जिस तकनीक से हवा को साफ करता है उसे पेटेंट करवा लिया गया है. तकनीक कुछ ऐसी है.

 

स्मॉग फ्री टावर में मौजूद दो प्लेटों में बिजली दौड़ती है– इससे एक प्लेट से दूसरे प्लेट के बीच की हवा भी चार्ज हो जाती है. चार्ज होने की वजह से हवा के कणों पर धूल से लेकर कार्बन तक के कण चिपक जाते हैं और इकट्ठा हो जाते हैं.

 

ये इकट्ठा हुआ कार्बन और धूल के कणों से ही तो रूजगार्द इन दिनों अंगूठी बना रहे हैं और उनकी वेबसाइट स्टूडियो रूजगार्द पर आप इसे खरीद भी सकते हैं. आखिर साफ हवा का वादा जो है ये अंगूठी.

 

इससे पहले भी रूजगार्द पर्यावरण और कला के बीच संतुलन बिठाने वाली अपनी डिजायनों के लिए चर्चित रहे हैं.

 

सबसे मशहूर है एमस्टरडर्म में बनाई गई ये रौशनी की नदी जिसमें उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग की वजह से समुद्र स्तर के बढ़ने का खतरा दिखाया था.

इसके अलावा वो बिना बिजली के सड़कों को रौशन करने का फार्मूला भी दे चुके हैं. ये हैं दिन भर सूर्य की रोशनी से चार्ज होने वाली सड़कें जो रात में खुद रोशन हो जाती हैं

 

यही नहीं स्ट्रीट लाइट की जगह लेने के लिए उन्होंने ऐसे पेड़ों का डिजाइन भी तैयार किया है जो सूर्य की रौशनी से चार्ज होकर रात भर सड़कों पर रोशनी बिखेर सकते हैं

 

रूजगार्द अपने इस रोशनी वाले ग्लोब के लिए चर्चा में रह चुके हैं जिसके सामने किसी इंसान के आने से पंखुड़ियां खुल जाती हैं और वो हिस्सा रोशन हो जाता है.

 

डिजायनर रूजगार्द ने स्मॉग फ्री टावर बनाने के लिए किकस्टार्ट नाम की वेबसाइट पर लोगों से चंदा मांगा था. उन्हें सिर्फ 35 लाख रुपये की जरूरत थी लेकिन इस वेबसाइट के जरिए उनके स्मॉग फ्री टावर प्रोजेक्ट के लिए 82 लाख रुपये मिल गए. रूजगार्द ने अब तक ये नहीं बताया है कि उनका ये टावर कितने पैसे में बना है.

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