विक्रमसिंघे ने ऐतिहासिक करार के बीच लंका के नये प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली

By: | Last Updated: Saturday, 22 August 2015 11:02 AM
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कोलंबो: श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने रानिल विक्रमसिंघे को आज देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई. एक ऐतिहासिक समझौते के तहत ऐसा किया गया.

राष्ट्रीय एकजुटता सरकार ने तमिलांे सहित अल्पसंख्यकों तक पहुंचने की कोशिश में जातीय सौहार्द बनाने के लिए एक नया संविधान पेश करने का संकल्प लिया है.

 

विक्रमसिंघे :66: ने राष्ट्रपति सचिवालय में चौथी बार प्रधानमंत्री पद की आज सुबह शपथ ली जहां सिरीसेना उपस्थित थे. इसके बाद प्रधानमंत्री की यूनाइटेड नेशनल पार्टी :यूएनपी: और राष्ट्रपति की श्रीलंका फ्रीडम पार्टी :एसएलएफपी: ने एक सत्ता साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किया.

 

श्रीलंका के इतिहास में यह पहला मौका है जब दो प्रतिद्वंद्वी पार्टियों ने शासन के लिए हाथ मिलाया है. लिट्टे के साथ तीन दशक तक चले संघर्ष के बाद चुनौतियों से निपटने में देश अब तक मशक्कत कर रहा.

 

सोमवार के संसदीय चुनाव में विक्रमसिंघे की जीत ने लंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की राजनीतिक वापसी पर विराम लगा दिया.

 

विक्रमसिंघे के पदभार संभालने के बाद समझौता पत्र :एमओयू: के तहत एक नये संविधान के निर्माण के लिए एक संविधान सभा गठित किए जाने का प्रस्ताव है जो जातीय सौहार्द और मानवाधिकारों की सुरक्षा के साथ सुलह सुनिश्चित करेगा.

 

नये प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अतीत के जख्मों को भरने के लिए साथ मिलकर काम करने की अपील की है.

 

सोमवार को हुए संसदीय चुनाव में उनकी यूनएनपी ने 106 सीटें जीती है जो 225 सदस्यीय सदन में साधारण बहुमत से सात सीटें की कम है लेकिन सरकार बनाने के लिए पर्याप्त थी.

 

एसएलएफपी ने यूएनपी के साथ कल दो साल के लिए राष्ट्रीय सरकार में शामिल होने का फैसला किया. नई सरकार ने कहा है कि यह चुनाव की मौजूदा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली को रद्द करने के लिए चुनाव सुधार की भी पेशकश करेगी.

 

श्रीलंका विदेश नीति में गुट निरपेक्षता की नीति का पालन करेगा.

 

सरकार का ढांचा सुशासन के आधारभूत तत्वांे और कानून के शासन पर आधारित होगा.

 

गौरतलब है कि दोनों पार्टियां दशकों से चिर प्रतिद्वंद्वी रही हैं और ऐसा सहयोग श्रीलंका की राजनीति में असमान्य है.

 

विक्रमसिंघे ने कोलंबो जिला से चुनाव लड़ा था. वह चौथी बार प्रधानमंत्री बने हैं.

 

पेशे से वकील और सुधारवादी विक्रमसिंघे ने 38 साल तक लगातार संसद सदस्य रहने का कीर्तिमान भी बनाया है.

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