गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है दक्षिणपूर्वी एशिया: राइस

By: | Last Updated: Tuesday, 23 September 2014 6:14 AM
Susan Rice highlights challenges in southeast asia

अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुसेन राइस

वाशिंगटन: दक्षिण पूर्वी एशियाई क्षेत्र में भारत और चीन जैसी प्रमुख ताकतों के सक्रिय होने के कारण, व्यापक संभावनाओं से भरपूर इस क्षेत्र को खुद को नए समीकरणों के अनुसार ढालने में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिका की एक शीर्ष अधिकारी ने इस चुनौती को रेखांकित किया है.

 

अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुसेन राइस ने कल कहा, ‘‘दक्षिण पूर्व एशिया व्यापक संभावनाओं से भरा हुआ है. यह गंभीर सवालों का भी सामना कर रहा है कि कैसे खुद को ढाला जाए क्योंकि प्रमुख ताकतें क्षेत्र में अधिक सक्रिय हो गयी हैं.’’

 

राइस ने एक बैठक में कहा, ‘‘चीन का उत्थान, जापान का नए सिरे से खड़े होना, भारत का पुनर्जागरण…और निश्चित रूप से, अमेरिका का पुनर्संतुलन…ये समीकरण वास्तविक हैं और दक्षिण पूर्व एशिया में ये चौतरफा एक दूसरे के साथ जुड़ गए हैं.’’

 

लेकिन उन्होंने कहा कि ये सभी समीकरण एक व्यापक आपसी सहयोग की संभावनाओं के रूप में सामने आने चाहिए और इन्हें केवल प्रमुख ताकतों के बीच में प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

 

राइस ने कहा, ‘‘दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों को प्रमुख ताकतों में से किसी एक के साथ खड़े नहीं होना चाहिए, खासतौर से जब बात अमेरिका और चीन की आती हो. क्षेत्र में अपने सभी सहयोगियों की स्वतंत्रता और संप्रभुता को बनाए रखना, यही दक्षिण पूर्वी एशिया के प्रति हमारी नीति का केंद्र बिंदु है.’’

 

वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट में अपने भाषण में राइस ने कहा कि चीन के साथ अमेरिका के संबंध, दोनों देशों, क्षेत्र और विश्व के भविष्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं.

 

उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा नवंबर में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे और ‘एक ऐसा संबंध कायम करेंगे जो हमें साझा हितों पर मिलकर काम करने की अनुमति देगा और साथ ही मानवाधिकार समेत उन मुद्दों पर बेबाक चर्चा का माहौल पैदा करेगा जिन पर हम असहमति रखते हैं.’

 

राइस ने कहा, ‘‘इसके साथ ही, हम दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने की प्रक्रिया जारी रखेंगे और बहुपक्षीय मंचों पर समान रूप से काम करेंगे ताकि निजी तौर पर राष्ट्र सामूहिक समीकरणों को अपनाते हुए अपनी स्वतंत्रता को सुरक्षित रख सकें और बड़े देशों को छोटे देशों पर दबाव बनाने से रोका जा सके.’’

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Web Title: Susan Rice highlights challenges in southeast asia
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