लंबे अरसे से तालिबान के निशाने पर रहे हैं स्कूल

By: | Last Updated: Thursday, 18 December 2014 2:37 PM

इस्लामाबाद : पेशावर के स्कूल में हुआ आतंकवादी हमला यूं तो अब तक का सबसे बर्बर हमला था, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. आतंकवादी पहले भी पाकिस्तान में शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाते रहे हैं.

 

पाकिस्तानी मीडिया की गुरुवार को जारी रपटों के मुताबिक, अफगानी सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा और फाटा के इलाकों में आतंकवादी लंबे समय तक स्कूलों को निशाना बनाते रहे हैं. पेशावर खैबर पख्तूनख्वा का ही हिस्सा है.

 

एक इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप की रपट के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा आदिवासी क्षेत्रों में 2009 से 2012 के दौरान 800 से 900 स्कूलों को निशाना बनाया जा चुका है.

 

‘डॉन’ ने संपादकीय में कहा, इन हमलों में से ज्यादातर में आतंकवादियों ने खाली स्कूलों को निशाना बनाया. यह हमले प्रतीकात्मक संकेत के रूप में किए गए थे और इनमें कम ही लोग हताहत हुए थे.

 

इसमें कहा गया है कि इस्लामवादी खासकर लड़कियों की शिक्षा का हमेशा से मुखालफत करते रहे हैं.

 

इसमें यह भी कहा गया है कि केवल खैबर पख्तूनख्वा और फाटा ही ऐसे इलाके नहीं हैं जहां पर आतंकवादियों ने ‘शिक्षा’ को निशाना बनाया है.

 

पिछले साल कराची में एक संदिग्ध आतंकवादी ने एक स्कूल के प्रधानाध्यापक को मार दिया था. 2013 में ही आतंकवादियों ने क्वेटा में एक विश्वविद्यालय की बस पर हमला कर दिया था, इसमें कई महिला छात्रों की मौत हो गई थी.

 

इस साल एक आत्मघाती हमलावर हंगू के एक स्कूल को निशाना बनाकर विस्फोट करने ही वाला था कि एक नौजवान छात्र ऐतजाज हसन ने उसका मुकाबला किया और उसे पकड़वाया.

 

‘डॉन’ ने कहा, दुर्भाग्यवश इस बार आर्मी पब्लिक स्कूल में जनसंहार करने वाले उन ‘दानवों’ का सामना करने के लिए कोई ऐतजाज नहीं था.

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