विश्व कपः भारतीय बल्लेबाजों ने जगाई नई उम्मीदें

By: | Last Updated: Friday, 27 March 2015 2:23 PM

नई दिल्लीः सात लगातार जीत के बाद भारतीय टीम सेमीफाइनल में बेशक हार गई हो लेकिन इस टीम ने अहम सबक सीखा है. ऐसा सबक जो भारत को चार साल बाद होने वाले विश्वकप में काम आएगा. भारत के पांच टॉप बल्लेबाजों में सभी युवा हैं और भविष्य की उम्मीद हैं.

 

सेमीफाइनल मैच में जब तक ओपनर शिखर धवन और रोहित शर्मा मैदान में थे तब तक भारत मैच में बना हुआ था. शिखर धवन के आउट होते ही भारतीय टॉप ऑर्डर ढह गया. सेमीफाइनल में गलत शॉट जरूर खेला पर कुल मिलाकर देखें तो 29 साल के शिखर धवन टूर्नामेंट में धोनी और देश की उम्मीदों पर खरे उतरे. उन्होंने भारतीय टीम की तरफ से सबसे ज्यादा 412 रन बनाए औसत रहा 51.50 का.

 

शिखर धवन का ये पहला विश्वकप था, सिर्फ शिखर ही नहीं बल्कि टॉप पांच बल्लेबाजों में से तीन के लिए ये पहला विश्वकप था. सिर्फ विराट कोहली और रैना के पास विश्वकप में खेलने का अनुभव था. ये पहली बार है जब भारतीय टीम इतने कम अनुभव वाले खिला़ड़िय़ों के साथ विश्वकप खेलने उतरी थी. लेकिन इसके बाद भी युवा खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया. शिखर के जोड़ीदार रोहित शर्मा ने आठ मैचों में 330 रन बनाए 47.14 की औसत से.

 

2011 विश्वकप के ओपनर्स से तुलना करें तो पिछली बार भारतीय ओपनर थे तेंदुलकर और सहवाग. तेंदुलकर छठा विश्वकप खेल रहे थे तो सहवाग तीसरा. शिखर और रोहित के लिए ये पहला विश्वकप था. सहवाग का औसत था 43.66 जबकि सचिन का 53.55. नंबर तीन पर गौतम गंभीर पिछले विश्वकप में उतरा करते थे जबकि जिन्होंने 43.66 की औसत से 393 रन बनाए थे. अब इस विश्वकप में नंबर तीन के बल्लेबाज विराट कोहली की बात करें तो कोहली ने आठ मैचों में 50.83 की औसत से 305 रन बनाए हैं वहीं पिछले विश्व कप में विराट कोहली ने नौ मैचों में सिर्फ 282 रन बनाए थे 35.25 की औसत से.

 

सुरेश रैना ने आठ मैचों में 6 पारियां खेलीं जिसमें 56.80 की औसत से 284 रन बनाए. भारत के टॉप पांच में से तीन का औसत 50 से ऊपर का रहा है जिसे बेहतरीन प्रदर्शन कहा जा सकता है. रोहित शर्मा का औसत 47 के करीब रहा है लेकिन सबसे खराब औसत रहा है अंजिक्य रहाणे का. रहाणे ने आठ मैचों की सात पारियों में 208 रन बनाए हैं 34.66 की औसत से.

 

ध्यान देने वाली बात ये है कि भारतीय बल्लेबाजों ने ये प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की तेज पिचों पर किया है जहां भारतीय बल्लेबाजों के विफल होने की परंपरा है. ये भी सच है कि आठ में तीन मैच छोटी टीमों के खिलाफ थे लेकिन बावजूद इसके मुश्किल हालात में भारतीय बल्लेबाजों ने आठ में से सात मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया है. अब उम्मीद ये करनी चाहिए हमारे बल्लेबाज सेमीफाइनल की हार से सबक लेकर अगले विश्वकप की तैयारी में जुट जाएँ क्योंकि अब देश फिर से 28 साल इंतजार करने को तैयार नहीं है.

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Web Title: team india
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