मोदी का मंगोलिया का दौरा- भारत ने क्या-क्या दिया

By: | Last Updated: Sunday, 17 May 2015 11:49 AM
Ulaanbaatar_Prime Minister_Narendra Modi_Mongolia

उलनबाटोर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मंगोलिया के नेशनल कैंसर सेंटर को भाभाट्रॉन सौंपा. भाभाट्रॉन एक टेलीकोबाल्ट है जिसे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ने कैंसर के उपचार के लिए विकसित किया है.

 

मोदी के साथ इस दौरान मंगोलिया के प्रधानमंत्री चिमद सोखानबिलग भी मौजूद रहे. प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर अटल बिहारी वाजपेयी सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड कम्युनिकेशन एंड आउटसोर्सिग की आधारशिला रखी.

 

दोनों नेताओं ने जमीन खोदने की प्रतीकात्मक रस्म के बाद एक तांबे की पट्टिका का अनावरण किया. एक बुद्ध साधु ने इसके बाद मोदी के कंधे पर सम्मान स्वरूप एक दुपट्टा डाला.

 

भाभाट्रॉन को टाटा मेमोरियल सेंटर ऑफ इंडिया और मंगोलिया के नेशनल कैंसर सेंटर के बीच हुए समझौते के बाद सौंपा गया. इस समझौते में भाभाट्रॉन-2 टेलीथेरेपी इकाई को रेडियोथेरेपी सिम्युलेटर के साथ उपहार स्वरूप देने की बात कही गई थी.

 

मोदी ने गंदन मठ को बोधि वृक्ष का पौधा भेंट किया

 

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मंगोलिया की राजधानी उलान बतोर स्थित ऐतिहासिक गंदन मठ का दौरा किया और बौद्ध मठ के मुख्य महंत को बोधि वृक्ष का पौधा भेंट किया. उन्होंने मठ में धूप भी जलाया, जिसे गंदनटेगचिंलेन मठ के नाम से भी जाना जाता है.

 

मठ के मुख्य महंत हांबा लामा ने मोदी का स्वागत किया और उन्हें नीले रंग का एक स्कार्फ एवं प्रतीक चिन्ह भेंट किया. मोदी ने मठ में 150 बौद्धभिक्षुओं से मुलाकात की संग्रहालय में बौद्ध अवशेषों का मुआयना भी किया.

 

उन्होंने मठ की परिक्रमा की. इसके बाद मोदी गंदन मठ के अंदर स्थित जनरैसाग मठ भी गए, जहां 26 मीटर ऊंचे जनरैसाग बुद्ध की प्रतिमा स्थापित है. गंदनटेगचिंलेन मठ की स्थापना 1835 ईस्वी में मंगोलिया के सर्वोच्च अवतरित लामा पांचवें जेबत्सुनदांबा ने की थी.

 

मठ में तीन कॉलेज भी हैं, जहां बौद्ध दर्शन की शिक्षा दी जाती है. यहां एक चिकित्सा एवं ज्योतिष कॉलेज, एक कालचक्र मंदिर, एक जुड तांत्रिक कॉलेज एवं मिगजिद जनरैसिग मंदिर है, जहां अवलोकितेश्वर की प्रतिमा स्थापित है.

 

मंगोलिया में ज्यादातर बौद्ध मठ साम्यवादी साम्राज्य के दौरान नष्ट कर दिए गए थे. सन 1990 में खत्म हुए साम्यवादी साम्राज्य में यहां सिर्फ एक ही मठ शेष रह गया था, जो गंदन मठ है.

 

मंगोलिया, भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का अभिन्न अंग: मोदी

 

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां रविवार को कहा कि मंगोलिया, भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का अभिन्न अंग है. उन्होंने मंगोलिया को आधारभूत संरचनाओं से जुड़ी परियोजनाओं के लिए एक अरब डॉलर की धनराशि ऋण देने की भी घोषणा की.

 

मोदी ने प्रधानमंत्री चिमद सेखानबिलग के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद यहां कहा कि दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों और कूटनीतिक साझेदारी को बढ़ाने के लिए सहमत हैं.

 

दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में 14 समझौतों पर हस्ताक्षर किए. मोदी ने कहा कि ये समझौते सीमा सुरक्षा एवं साइबर सुरक्षा में आपसी सहयोग को मजबूती प्रदान करेंगे.

 

उन्होंने कहा, “हम एक दूसरे के रक्षा अभ्यासों में हिस्सा लेना जारी रखेंगे.” उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश संबंधों के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़े हैं और साझेदारी के नए युग की शुरुआत कर रहे हैं.

 

पहले संगीतकार फिर तीरंदाज बने पीएम मोदी

 

मोदी ने कहा कि दोनों देश एशिया-प्रशांत क्षेत्र के भविष्य से भी करीब से जुड़े हैं.उन्होंने कहा, “हम क्षेत्र में शांति स्थापित करने, स्थिरता और समृद्धि लाने की दिशा में साथ काम कर सकते हैं.”

 

मोदी ने कहा, “मैं यहां हमारे कालातीत रिश्ते के सम्मान में मौजूद हूं. आप हमें अपना तीसरा पड़ोसी और आध्यात्मिक पड़ोसी कहते है. हम इस सम्मान के साथ जुड़ी सभी उत्तरदायित्वों को हमेशा पूरा करेंगे.”

 

मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक क्षेत्र, विकास साझेदारी, रक्षा, सुरक्षा और जनता के बीच मित्रता जैसे कई क्षेत्रों में हुए समझौते हमारे रिश्ते की मजबूती और गहराई को दर्शाते हैं.

 

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश अपनी आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई तक ले जाएंगे. मोदी ने कहा कि मंगोलिया के दौरे पर एसे वक्त आना उनके लिए सम्मान की बात है, जब यह देश लोकतंत्र का 25वां साल मना रहा है और दोनों देश अपने कूटनीतिक संबंधों के 60 वर्ष पूरे कर रहे हैं.

 

उन्होंने कहा कि मंगोलिया की संसद का उनकी मेहमाननवाजी का निर्णय भारत के लिए गौरव और सम्मान की बात है. मोदी ने कहा कि सुबह गंदन मठ का दौरा भारत की जनता की मित्रता का प्रतीक है. उन्होंने मठ को बोधि वृक्ष का पौधा उपहार स्वरूप भेंट किया.

 

उन्होंने कहा कि असैन्य परमाणु एवं खनन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं. मंगोलिया के प्रधानमंत्री चिमद सेखानबिलग ने प्रेस को जारी एक बयान में कहा, “भारत हमारा तीसरा और आध्यात्मिक पड़ोसी देश है और हमारे बीच मजबूत संबंध हैं.”

 

उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय, अंतर्राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की. सेखानबिलग ने कहा, “बातचीत के दौरान हम अपने द्विपक्षीय संबंध को कूटनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने के लिए सहमत हुए.”

 

उन्होंने कहा कि दोनों देश संयुक्त निवेश कोष की स्थापना के लिए भी सहमत हुए.मंगोलिया के प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि भारतीय एवं मंगोलियाई कंपनियां निजी सार्वजनिक भागीदारी में सहयोग करेंगी और मंगोलियाई निजी क्षेत्र में निवेश करेंगी.

 

मंगोलिया लोकतंत्र की नई चमकती रोशनी है: मोदी

 

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि मंगोलिया विश्व के सभी लोकतांत्रिक राष्ट्रों के बीच एक नई चमकती रोशनी है. मोदी ने रविवार को मंगोलिया की संसद को संबोधित करते हुए कहा, “हमारी दुनिया में मंगोलिया लोकतंत्र की नई चमकी रोशनी है.” भारतीय प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर मंगोलिया की संसद को रविवार को विशेष कार्यवाही के लिए खोला गया.

 

उन्होंने कहा कि भारत-मंगोलिया एक दूसरे के आध्यात्मिक पड़ोसी हैं और दोनों देशों के आपसी संबंध भावनात्मक रूप से कालातीत हैं. मोदी ने कहा, “दिल और दिमाग के रिश्ते में दूरियों को मिटा देने की ताकत होती है.”

 

उन्होंने कहा, “हमारा मानवीय रिश्ता भले ही बहुत मजबूत है, लेकिन हमारे बीच आर्थिक संबंध मामूली रहे हैं.” मोदी ने आशा जताई कि नई दिल्ली एवं उलान बतोर के संबंध नए युग में हर अवसर के साथ मजबूत होंगे.

 

मंगोलिया का आध्यात्मिक पड़ोसी होना भारत का गौरव: मोदी

 

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मंगोलियाई समकक्ष चिमद सेखानबिलग से कहा कि मंगोलिया का आध्यात्मिक पड़ोसी समझा जाना भारत के लिए गौरव का विषय है.

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्विटर पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में मंगोलिया के प्रधानमंत्री चिमद सेखानबिलग से कहा कि मंगोलिया का आध्यात्मिक पड़ोसी समझा जाना भारत के लिए गौरव का विषय है.”

 

इससे पूर्व मोदी का स्टेट पैलेस में स्वागत किया गया और उसके बाद सेखानबिलग के साथ उनकी प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता शुरू हुई. मोदी और सेखानबिलग ने लाल एवं नीले रंग की वर्दी पहने सशस्त्र बलों की सलामी ली.

 

मंगोलिया का स्टेट पैलेस जिसे गवर्नमेंट हाउस भी कहते हैं, का निर्माण 1950 में हुआ था. यहां मंगोलिया के राष्ट्रपति, संसद के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री का कार्यालय है. स्टेट पैलेस में ही संसद भवन भी स्थित है और यहां मंगोलियाई सम्राट चंगेज खान की प्रतिमा स्थापित है.

 

भारत और मंगोलिया के बीच 13 समझौतों पर हस्ताक्षर

 

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मंगोलिया के प्रधानमंत्री चिमद सेखानबिलग ने रविवार को प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान 13 समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें हवाई सेवा और साइबर सुरक्षा समझौते भी शामिल हैं.

 

मोदी और सेखानबिलग ने स्टेट पैलेस में वार्ता के दौरान 13 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के अलावा नई द्विपक्षीय कूटनीतिक साझेदारी समझौते पर भी हस्ताक्षर किए. दोनों पक्षों ने एक बयान में यह जानकारी दी.

 

दोनों पक्षों ने एक संशोधित हवाई सेवा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत भारत एवं मंगोलिया के बीच अंतर्राष्ट्रीय हवाई सेवा के पूर्व प्रबंध में बदलाव किए गए हैं. दोनों देश अंतर्राष्ट्रीय नागरिक विमानन संकल्प के पक्ष में हैं.

 

दोनों देशों ने सजायाफ्ता कैदियों के हस्तांतरण से संबंधित समझौते पर भी हस्ताक्षर किए, जिससे कैदियों को उनके परिवार को सौंपने और उनके सामाजिक पुनर्वास की प्रक्रिया में आसानी होगी.

विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, पशु स्वास्थ्य एवं डेयरी के क्षेत्र में सहयोग के लिए किया गया समझौता डेयरी एवं पशु रोग नियंत्रण के उपायों में डेयरी, गुणवत्ता नियंत्रण, आधुनिक तकनीक को अपनाने और विपणन के क्षेत्र में साझा सहयोग की दृष्टि से किया गया है.

 

औषधि एवं होम्योपैथी की पारंपरिक प्रणाली के क्षेत्र में किए गए समझौते का लक्ष्य प्रशिक्षण एवं अभ्यास के लिए विशेषज्ञों के आदान-प्रदान एवं फार्माकोपेयास एवं फार्मूलरीज को आपसी मान्यता के रूप में व्यापक सहयोग करना है.

 

दोनों पक्षों ने मंगोलिया के रक्षा मंत्रालय में साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत भारत साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में मंगोलियाई सुरक्षा कर्मियों को प्रशिक्षित भी करेगा. इसके अलावा शैक्षणिक संस्थान एवं छात्रवृत्ति देने के क्षेत्र में भी समझौते किए गए.

 

मंगोलिया में भारत-मंगोलिया संयुक्त मित्रता विद्यालय की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके अंतर्गत भारत और मंगोलिया संयुक्त रूप से विद्यालय की स्थापना करेंगे और खुले, समावेशी एवं लचीले पाठ्यक्रम के माध्यम से हर एक बच्चे को व्यक्तिगत एवं पेशेवर रूप से सक्षम और योग्य बनने का प्रशिक्षण दिया जाएगा.

 

वर्ष 2015-2018 के लिए सांस्कृतिक क्षेत्र में सहयोग के लिए भी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत प्रदर्शनियों, फिल्म महोत्सवों के आयोजन एवं विशेषज्ञों, विद्यार्थियों और पत्रकारों के आदान-प्रदान के माध्यम से संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा.

 

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद एवं मंगोलिया के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के बीच सहयोग के लिए भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके अंतर्गत दोनों पक्ष अपने पारंपरिक एवं गैर पारंपरिक सुरक्षा मसलों, आतंकवाद निरोध, खुफिया सहयोग एवं आदान-प्रदान के मुद्दों पर नियमित रूप से एक दूसरे से सलाह-मशविरा करेंगे.

भारत के विदेश मंत्रालय एवं मंगोलिया के विदेश मंत्रालय के बीच सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं खासकर राजनीतिक, आर्थिक, व्यावसायिक, वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी एवं सांस्कृतिक सहयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

 

यह समझौता उस मौजूदा समझौते का स्थान लेगा, जो 17 सितंबर, 1996 को किया गया था. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन पर किए गए हस्ताक्षर जानकारियों एवं कर्मियों के आदान-प्रदान के तौर तरीकों, उपकरणों के हस्तांतरण एवं संयुक्त शोध या तकनीकी परियोजनाओं, अक्षय ऊर्जा संसाधनों के निर्धारण आदि के माध्यम से सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा पर ध्यान देने के उद्देश्य से किए गए हैं.

 

सीमा सुरक्षा बलों के बीच सहयोग पर किया गया समझौता क्षमता निर्माण, बेहतरीन परंपराओं के आदान-प्रदान, संयुक्त अभ्यास के आयोजन, सीमा सुरक्षा निगरानी और चौकसी के लिए तकनीकों के क्षेत्र में भारतीय गृह मंत्रालय एवं मंगोलिया के जनरल अथॉरिटी फॉर बॉर्डर प्रोटेक्शन के बीच सहयोग पर ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से है.

 

टाटा मेमोरियल सेंटर ऑफ इंडिया एवं नेशनल सेंटर ऑफ मंगोलिया के बीच हुआ समझौता भाभाट्रॉन-2 टेली-थेरेपी यूनिट और रेडियोथेरेपी सिम्युलेटर के लिए उपहार है.

 

इसके अलावा, भारतीय विदेश मंत्रालय के विदेश सेवा संस्थान एवं मंगोलिया के विदेश मंत्रालय की कूटनीतिक अकादमी के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर प्रशिक्षुओं, विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों और विशेषज्ञों को दोनों देशों में आदान-प्ररान के जरिए उनमें कौशल विकास और दोनों देशों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सुधार लाने के उद्देश्य से किया गया है.

 

मोदी ने एल्बेगदोर्ज को मंगोल इतिहास की पांडुलिपी भेंट की

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मंगोलिया के राष्ट्रपति सखियागिन एल्बेगदोर्ज को मंगोल इतिहास की पांडुलिपी भेंट की. मोदी ने रामपुर के रामपुर राजा पुस्कालय में संग्रहित 13वीं सदी में लिखी गई दुर्लभ पांडुलिपि की विशेष प्रति मंगोलिया के राष्ट्रपति को भेंट की. इस पांडुलिपि में 80 से ज्यादा लघु चित्र हैं.

 

पांडुलिपि के काम को जमीउत तवारिक के नाम से जाना जाता है. इसकी रचना बादशाह गजान खान (1295-1304) के शासन की बड़ी परियोजनाओं में से एक है. पांडुलिपि को बादशाह के वजीर रशीदुद्दीन फजलुल्लाह हमदानी ने तैयार किया था. उन्होंने इसे फारसी में लिखा था और ओलीजेत्जु (1304-1316) के शासन काल के इतिहास को लिपिबद्ध किया था.

 

इस रचना की ख्याति का विस्तार इसके विश्व के पहले इतिहास के रूप में पहचान का कारण बना. पांडुलिपि उस रचना का पहला भाग है और इसकी अन्य प्रतियों के अस्तित्व के विषय में कोई जानकारी नहीं है.

PM मोदी ने किया मंगोलिया को एक अरब डॉलर की मदद का एलान

भारत और मंगोलिया ने रविवार को अपने कूटनीतिक संबंधों के 60 साल पूरे होने का जश्न मनाया. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगोलिया के दौरे पर हैं. मंगोलिया ने भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए भारत को अपना तीसरा और आध्यात्मिक पड़ोसी देश बताया.

 

रविवार सुबह मंगोलिया पहुंचे मोदी का यहां औपचारिक स्वागत किया गया. उसके बाद उन्होंने मंगोलिया के प्रधानमंत्री चिमद सेखनबिलग के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में हिस्सा लिया. मोदी इससे पहले प्रसिद्ध गंदन मठ भी गए और वहां मठ के मुख्य महंत हांबा लामा को बोधि वृक्ष का पौधा भेंट किया.

 

चीन और रूस के बीच बसे मंगोलिया की आधी आबादी बौद्ध धर्म की अनुयायी है.सेखनबिलग ने स्टेट पैलेस में मोदी के साथ वार्ता के बाद प्रेस को जारी एक बयान में कहा, “हमारे तीसरे और आध्यात्मिक पड़ोसी भारत के साथ हमारे रिश्ते प्रगाढ़ हैं.”

 

मोदी ने मंगोलिया में आधारभूत संरचना संबंधित परियोजनाओं के लिए एक अरब डॉलर ऋण देने की भी घोषणा की. उन्होंने कहा, “मंगोलिया भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का अभिन्न अंग है. भारत और मंगोलिया के भाग्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र के भविष्य से करीब से जुड़े हुए हैं.” मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में स्थाई सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन करने के लिए मंगोलिया का धन्यवाद दिया.

 

एक संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और मंगोलिया ने 2021-2022 के लिए यूएनएससी में अस्थाई सदस्यता की दावेदारी के परस्पर समर्थन पर सहमति जताई है. भारत सरकार ने भी 2016-2018 के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की सदस्यता में मंगोलिया की दावेदारी का समर्थन करने की बात कही है.

 

मोदी ने कहा, “भविष्य में अपने संबंधों को मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता की झलक स्वरूप हमने अपनी व्यापक भागीदारी को कूटनीतिक साझेदारी में तब्दील करने का निर्णय लिया है. हम अपने मित्रवत संबंधों और सहयोग से संबंधित संधि के नवीनीकरण के लिए भी सहमत हुए हैं.”

मोदी ने कहा कि भारत और मंगोलिया असैन्य परमाणु के क्षेत्र में अपना सहयोग बढ़ा सकते हैं, क्योंकि मंगोलिया यूरेनियम और खनिज संसाधनों से संपन्न है. उन्होंने कहा, “मुझे आशा है कि मंगोलिया के लिए अपने साझेदार चुनने में स्थान और दूरी बाधा नहीं होगी.”

 

मोदी ने मंगोलिया की संसद ग्रेट हुराल को संबोधित करते हुए कहा कि मंगोलिया द्वारा भारत को अपना आध्यात्मिक पड़ोसी बताना भारत के लिए गौरव और सम्मान की बात है. मोदी के दौरे के मद्देनजर रविवार को मंगोलिया की संसद को विशेष रूप से खोला गया. मोदी ने कहा, “इससे पवित्र कोई रिश्ता नहीं है. हम भारत के लोग इस बात से गौरवान्वित हैं कि आप हमें इस नजर से देखते हैं.”

 

आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि हाल के वर्षो में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के विस्तार की प्रकृति मानवता के लिए खतरा है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को दोहरा मापदंड अपनाए बिना इसका वैश्विक समाधान एवं सहयोगात्मक उपाय ढूंढ़ने की जरूरत है.

 

दोनों देश अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के मसले पर अपने अधिकारियों को व्यापक परंपरा अपनाने के निर्देश देने पर सहमत हुए. दोनों प्रधानमंत्रियों ने आशा जताई कि आतंकवादियों के सभी ठिकानों और गढ़ों को अविलंब नेस्तनाबूद किया जाएगा.

 

रक्षा के क्षेत्र में दोनों देश उच्च एवं मध्यम स्तर के दोतरफा दौरों, नियमित परामर्श, सैन्य आदान-प्रदान और योग्यता निर्माण के माध्यम से भविष्य में द्विपक्षीय रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग में तेजी लाने पर सहमत हुए.

 

दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) में मंगोलिया के रक्षा मंत्रालय में साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना भी शामिल है, जिसके तहत भारत मंगोलिया के सैनिकों को साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण देगा. दोनों देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषदें पारंपरिक एवं गैर पारंपरिक सुरक्षा मुद्दों, आतंकवाद निरोध, खुफिया सहयोग एवं आदान-प्रदान के मसले पर परामर्श करेंगे.

मोदी ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) द्वारा कैंसर के इलाज के लिए विकसित की गई टेलेकोबाल्ट मशीन भाभाट्रॉन मंगोलिया के नेशनल कैंसर सेंटर को सौंपी. उन्होंने यहां अटल बिहारी वाजपेयी सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन इंफार्मेशन एंड टेक्नोलॉजी एंड कम्युनिकेशन एंड आउटसोर्सिग की भी आधारशिला रखी.

 

मोदी ने मंगोलिया के राष्ट्रपति सखियागिन एल्बेगदोर्ज से भी मुलाकात की, जिन्होंने मंगालिया का दो तारों वाला पारंपरिक वाद्य यंत्र मोरिन खुर उन्हें भेंट किया. मोदी ने भी एल्बेगदोर्ज को 13वीं सदी की दुर्लभ मंगोल इतिहास की पांडुलिपि की प्रति भेंट की.

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