साल 2010 में बीजेपी पर नजर रखने को अधिकृत किया गया था एनएसए को

By: | Last Updated: Tuesday, 1 July 2014 10:28 AM

वाशिंगटन: अमेरिका की शीर्ष खुफिया एजेंसी को अमेरिका की एक अदालत ने 2010 में भाजपा एवं दुनिया के पांच अन्य राजनीतिक दलों पर नजर रखने को अधिकृत किया था, इन दलों में मिस्र की मुस्लिम ब्रदरहुड और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी भी शामिल है. यह जानकारी एक गोपनीय दस्तावेज से मिली है.

 

इस सूची में भाजपा के अलावा अन्य विदेशी राजनीतिक दलों में लेबनान की अमल , बोलिवेरियन कंटिनेंटल कोआर्डिनेटर आफ वेनेजुएला, मिस्र की मुस्लिम ब्रदरहुड, इजिप्शियन नेशनल साल्वेशन फ्रंट और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी शामिल हैं . राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी :एनएसए: ने इन पर नजर रखने के लिए अनुमति मांगी थी. द वाशिंगटन पोस्ट ने कल इस संबंध में दस्तावेज को सार्वजनिक किया था.

 

इस दस्तावेज में 193 विदेशी सरकारों के साथ विदेशी गुटों और अन्य निकायों के नाम शामिल है जो विदेशी खुफिया निगरानी अदालत की ओर से मंजूर 2010 के प्रमाणन का हिस्सा थे. इस सूची में भारत शामिल है.

 

समाचारपत्र ने बताया, ‘‘इन संगठनों पर एनएसए विदेशी खुफिया सूचना एकत्र करने के मकसद से नजर रख सकती है.’’

 

एनएसए के पूर्व कांट्रैक्टर एडवर्ड स्नोडेन से मिले दस्तावेज का हवाला देते हुए पत्र ने यह बात कही. समाचारपत्र ने कहा कि प्रत्येक वर्ष अदालत से इस तरह से नजर रखने के संबंध में एक नये प्रमाणन के लिए एफआईएसए संशोधन अधिनियम की धारा 702 के तहत मंजूरी प्राप्त करनी होती है.

 

द वाशिंगटन पोस्ट की खबर के अनुसार, ‘‘चार देशों को छोड़कर कोई भी विदेशी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के दायरे से बाहर नहीं है.’’ ये चार देश ब्रिटेन, कनाडा, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड हैं.

 

नजर रखने के संबंध में प्रमाणन में विश्व बैंक, आईएमएफ, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हैं.

 

समाचार पत्र के अनुसार, ‘‘ जरूरी नहीं है कि एनएसए प्रमाणन में चिन्हित सभी देशों या संगठनों को निशाना बनाता हो, उसे ऐसा करने के लिए केवल अधिकृत किया गया है.’’ भारत और विशेष तौर पर भाजपा पर नजर रखने के बारे में एक सवाल के जवाब में एनएसए की प्रवक्ता वेनी वाइन्स ने प्रेट्र से कहा कि राष्ट्रपति, नेशनल इंटेलीजेंस के निदेशक और राष्ट्रीय खुफिया प्राथमिकता ढांचे के तहत विभागों एवं एजेंसियों की ओर से तय विशिष्ठ खुफिया जरूरतों के आधार पर एजेंसी विदेशी खुफिया सूचना एकत्र करता है.

 

गौरतलब है कि स्नोडेन ने मीडिया में हजारों गोपनीय दस्तावेज लीक किये थे जिसमें कई एनएसए की ओर से संचालित थे.

 

वाइन्स ने कहा कि एफआईएसए संशोधन अधिनियम की धारा 702 चुनिंदा खुफिया सूचना एकत्र करने को मंजूरी देता है. उन्होंने कहा कि धारा 702 के तहत विदेशी खुफिया निगरानी अदालत सालाना तौर पर राष्ट्रीय खुफिया एवं अटर्नी जनरल के विषय आधारित प्रमाणन की समीक्षा करता है और ऐसे गैर अमेरिकी व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए अमेरिकी सरकार को प्रक्रिया चलाने की अनुमति देता है जो देश से बाहर स्थित हो.. अगर ऐसे लक्ष्य से प्रमाणन के संबंध में विदेशी खुफिया सूचना मिलने की संभावना हो.

 

उन्होंने कहा, ‘‘ जनवरी 2014 में अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने राष्ट्रपति नीति निर्देश 28 जारी किया था जिसमें अमेरिकी खुफिया गतिविधियों के बारे में अतिरिक्त नीतिगत दिशा प्रदान की गई थी.’’ वाइन्स ने कहा, ‘‘ संक्षेप में अमेरिकी निर्देशित खुफिया गतिविधियों के लिए एक विशिष्ठ खुफिया जरूरत, नीतिगत मंजूरी और कानूनी रूप से मंजूरी की जरूरत होती है जो धारा 702 के अनुरूप भी हो.’’

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