बंदूकवाली कैसे बनी हीरोईन? एक आम लड़की दिव्यांका त्रिपाठी की खास कहानी!

By: | Last Updated: Saturday, 16 May 2015 2:45 PM
Vyakti Vishesh: Divyanka Tripathi

एक  ऐसा चमकता संसार. जहां रोशनियां है. रंगीनियां है. शोहरत है तो दौलत है और इज्जत भी बेहिसाब है. तरह-तरह के चेहरे हैं यहां. खूबसूरत भी हैं और बिंदास भी. लेकिन मुंबई के इस संसार से अलग यहां टीवी की एक दुनिया ऐसी भी है जहां चमकते कैमरों और तेज रौशनियों के बीच वो सितारे भी जन्म लेते हैं जिनकी कशिश दर्शकों को अपने सम्मोहन में बांध लेती है. फिल्मी सितारों की तरह ही छोटे परदे के ये सितारें भी घर-घर में पहचाने जाते हैं और टीवी सीरियल की इस ग्लैमरस दुनिया में इन दिनों सबसे चर्चिच नाम है दिव्यांका त्रिपाठी.

इन दिनों टीवी के चर्चित सीरियल ‘ये है मोहब्बतें’ में ईशी मां के किरदार से देश के घर-घर तक पहुचने वाली दिव्यांका ने जिंदगी में संघर्ष के कई मुकाम देखे हैं. कम उम्र में बंदूक अपने हाथों में थामने वाली दिव्यांका ने कभी आर्मी आफिसर बनने का ख्वाब देखा था और इसीलिए टेलीविजन के रुपहले संसार तक पहुंचने में उन्हें तकदीर और तदबीर के कई आयामों से होकर गुजरना पडा है.

 

मॉडलिंग के रैंप से लेकर टीवी की दुनिया तक दिव्यांका ने संघर्ष की राह में जिंदगी के कई कठोर सबक सीखे है. एक मध्यवर्गीय परिवार में पली -बढी दिव्यांका त्रिपाठी को टीवी के रुपहले संसार ने भले ही मशहूर बना दिया है लेकिन वो आज भी खुद के अंदर उस पुरानी दिव्यांका को तलाश करती है जो कभी पहाड़ों और बियाबानों की खाक छानती थी.

 

छोटे परदे पर बड़ी कामयाबी हासिल करने वाली दिव्यांका की ये कहानी जितनी दिलचस्प है उतनी ही हैरतअंगेज भी है.

 

दिव्यांका त्रिपाठी बताती हैं, “मेरी मां ने बोला कि इवनिंग गाउन तो है तुम्हारे पास मिस भोपाल कांटेस्ट हो रहा है शाम को ही है चल जाओ तो मैंने बोला मम्मी मैं टाइट टाइट कपड़े कैसे पहनूंगी. लड़कों जैसे कपड़े पहनने की आदत थी न तो बोला कुछ नहीं होता है जाकर सीख कर आना अब सीखने वाली बात बोली तो मैंने बोला चलो ठीक है चलो देख लेते हैं. तब मुझे पहली बार पता चला जिदंगी में कि मैं सुंदर दिख सकती हूं. उसके पहले तो मुझे पता ही नहीं था कि ये जो चेहरा है रफ एंड टफ सा इसके पीछे कोई खुबसूरती भी है. मेक अप के बाद मैंने कहा हाय ये लड़की तो अच्छी है नॉट बैड और उसके बाद तो बढ़ते गए कदम हमारे.”

 

स्टार प्लस चैनल पर आने वाले सीरियल ये हैं मोहब्बते के जरिए दिव्यांका त्रिपाठी इन दिनों छोटे परदे की परी बन चुकी है. इस सीरियल में उन्होने ईशी मां का किरदार निभाया है और दिव्यांका का यही किरदार आज उनकी सबसे बड़ी पहचान बन चुका है. सीरियल ये है मोह्बबत साल 2013 के आखिरी महीने में शुरु हुआ था. इस सीरियल में दिल्ली के दो पड़ोसियों अय्यर और भल्ला परिवार की शहरी कहानी को परदे पर खूबसूरती से उतारा गया है. पिछले करीब डेढ सालों से स्टार प्लस पर आने वाले इस सीरियल में एक तमिल लड़की और एक पंजाबी लड़के की प्रेम कहानी भी दिखाई गई है इस सीरियल में दिव्यांका त्रिपाठी ने एक ऐसी सौतेली मां का किरदार निभाया है जिसने उन्हे दर्शकों के दिलों तक पहुंचा दिया है.

व्यक्ति विशेष: दिव्यांका त्रिपाठी- बंदूकवाली कैसे बन गई हीरोइन 

दिव्यांका त्रिपाठी ने बताया, “ये एक अलग तरह की स्पेट मदर का रोल है, नहीं तो आमतौर पर स्टेप मदर ऐसी दिखाई जाती है जो कि बहुत ही खड़ूस होती हैं बच्चों को परेशान करती हैं लेकिन ये स्टेप मदर हटकर है और ऐसे हटकर है कि आज पूरी दुनिया मुझे ईशी मां ईशी मां कहती है और बच्चों मम्मियों को परेशान करते हैं और कहते हैं कि मम्मी आप ईशिता जैसे क्यों नहीं करती हो आप ईशी मां जैसे मेरे से प्यार क्यों नहीं करते हो जिस तरह से वो रुही से करती हैं और अब बच्चे अपने मम्मियों को टफ टाइम दे रहें हैं. और ये जो सौतेली मां का किरदार है वो बहुत लवेबल हो गया है लोगों के लिए.”

 

करीब दो महीने पहले दिव्यांका त्रिपाठी उस वक्त सुर्खियों में आ गई थी जब उनका पांव एक दुर्घटना में फ्रैक्टर हो गया था और इसीलिए सीरियल में उनके किरदार को भी उसी अंदाज में दिखाया जाने लगा था. दिव्यांका त्रिपाठी अपना पैर टूटने से पहले दिल टूटने की वजह से भी चर्चा में रही हैं. मार्च महीने में ही उनके लॉग टर्म ब्वायफ्रैंड रहे अभिनेता शरद मल्होत्रा से उनके अलगाव की खबरें भी सामने आई थी लेकिन रिश्ते की इस टूटन और अपने टूटे हुए पैर को दिव्यांका ने ठीक उसी हिम्मत और हौसले के साथ संभाल लिया जिस तरह अपने हाथों में उन्होंने कभी बंदूक संभाली थी.

 

टीवी के परदे पर ईशी मां का किरदार आज दिव्यांका त्रिपाठी की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है लेकिन कम ही लोग जानते है कि टीवी सीरियल में रोने –धोने के सीन करके लाखों घरों में लोगों को रुलाने वाली दिव्यांका कभी अपने शहर भोपाल की नामचीन बंदूकबाज बन गई थी. 

 

मध्यप्रदेश के शहर भोपाल के एक मध्यमवर्गीय परिवार में दिव्यांका त्रिपाठी का जन्म हुआ था. उनके पिता भोपाल में ही एक मेडिकल स्टोर चलाते हैं और घर में उनकी मां के अलावा उनकी एक बडी बहन और एक छोटा भाई भी है.

 

दिव्यांका त्रिपाठी के भाई ऐश्वर्या त्रिपाठी बताते हैं, “सच्ची बात बताऊं तो मेरी बहन को खाना बनाना अभी पूरी तरह से आता नहीं है तो वो जितना भी थोड़ा बहुत फास्ट फूड के साथ वो काफी अच्छा बनाती है स्पेशली ऑमलेट वो आमलेट के साथ काफी अच्छी अच्छी चीजें ट्राई करती रहती है और ट्रायल भी मुझ पर ही होता है. अनुभव काफी अच्छा था. अभी तो फिलहाल सीख लिया है खाना अच्छा अच्छा बनाना पर अभी औऱ सीख जाएगी अच्छा अच्छा बनाना. होपफूली 5-6 साल में अच्छी कूक बन जाए.”

 

भोपाल के कार्मल कॉन्वेंट हाईस्कूल से दिव्यांका त्रिपाठी ने अपनी स्कूल की पढाई पूरी की है लेकिन खास बात ये है कि स्कूल के दिनों में पढ़ाई- लिखाई से ज्यादा उनका झुकाव एडवेंचरस स्पोर्ट्स की तरफ था और यही वजह थी कि नैशनल कैडिट कोर यानी एनसीसी के अलावा दिव्यांका माउंटेनियरिंग और वाटर स्कीइंग जैसे एडवेंचरस स्पोर्ट्स में भी खूब हिस्सा लिया करती थी.

 

दिव्यांका त्रिपाठी बताती हैं, “मेरे पापा वो एनसीसी कैडेट रह चुके हैं औऱ मम्मी भी एऩसीसी कैडेट रह चुकीं थी अपने जमाने में इंफैक्ट उनकी मोहब्बतें भी वहीं से शुरू हुई थी सो मेरी तो पैदाइश की नींव एनसीसी में रखी गई है कह लीजिए सो जब मैं थोड़ी थोड़ी बड़ी होने लगी तो मैं क्या था कि बहुत ब्याईज थी क्योंकि मैं सेकेंड गर्ल थी दूसरी बेटी पैदा होती तो आमतौर पर मां बाप कहते हैं कि दूसरी बेटी लेकिन हमारे घर बेटा है. सो पापा जैसे बनने कि कोशिश करने लगी मैं क्योंकि पापा एनसीसी में थे तो मैं भी एनसीसी में गई और वहां पर बेस्ट कैडट बन गई रिपब्लिक डे कैंप करके आई उसी में मैंने राइफल शूटिंग भी सीखी.”

 

जिंदगी में एक्सपेरिमेंट करने औऱ नए – नए अनुभव हासिल करने में यकीन रखने वाली दिव्यांका ने बचपन में ड्राइंग, स्केंचिंग, गाना औऱ डांस के फन भी सीखे थे. अपने अंदर छिपे कलाकार को संतुष्ट करने के लिए वो भोपाल दूरदर्शन के कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेती थी लेकिन वहीं दूसरी तरफ स्कूल के दिनों में वो फुल टाइम एनसीसी कैडिट भी रही हैं दरअसल दिव्यांका बड़ी होकर एक आर्मी ऑफिसर बनना चाहती थी. कॉलेज की उनकी प्रिंसिपल भी उन दिनों को याद कर बताती है कि ज्यादातर खामोश रहने वाली दिव्यांका एक छिपी रुस्तम थी.   

 

दिव्यांका त्रिपाठी की कॉलेज टीचर डॉ. शशि राय बताती हैं, “जब वो कॉलेज में आई थी तभी लगा था कि ये लड़की बाकियों से कुछ अलग है. पढ़ने में भी अच्छी थी और कक्षाओं में भी आती थी और उसकी जो सबसे अच्छी बात थी वो ये थी कि वो एक तो सबसे विन्रम और आज्ञाकारी थी उसको कभी कुछ कह दिया जाए कि दिव्यांका कुछ करना है तो कॉलेज के लिए करना है तो वो कभी पीछे नहीं हटती थी. डांस बहुत करती थी, पर डीबेट्स में उतना नहीं बोलती थी अगर कभी उसको स्टेज पर कुछ बोलने को कहा जाए तो उसका जो एक्सप्रेशन था वो बहुत अच्छा था यानि वो एक अच्छी वक्ता बन सकती थी लेकिऩ शायद उसकी रुचि उस तरफ उतनी नहीं थी . छोटे मोटे हम लोग नाटक करते थे सोशल थीम के ऊपर उसमें पार्ट लिया करती थी.”

 

दिव्यांका त्रिपाठी के अंदर सोल्जर बनने का जो जज्बा था वो शायद उन्हें नई-नई चुनौतियों की तरफ ढकेल रहा था. और यही वजह थी कि स्कूल की पढाई खत्म करने के बाद जब वो कॉलेज में पहुंची तो उन्होंने अपने हाथों में बंदूक थाम ली थी. भोपाल के राइफल क्लब में दिव्यांका त्रिपाठी शूटिंग की प्रैक्टिस किया करती थी इस राइफल क्लब में आज भी उन्हें एक बेहतरीन निशानेबाज के तौर पर याद किया जाता है.

 

दिव्यांका त्रिपाठी बताती हैं, “राइफल शूटिंग में मैं आज तक काफी अच्छी हूं औऱ आज भी मैं भोपाल जाती हूं तो आज भी काफी सारे अवॉर्डस् लेकर आती हूं. मैंने हॉर्स राइडिंग, माउंटेनियरिंग, वाटर स्किंग अब जब लोग मुझे देखते हैं तो वो लोग मुझे यकीन ही नहीं कर पाते हैं कि आप ऐसे कैसे कर पाते हैं आप तो बहुत छुईमुई से लगते हो यू आर वेरी गर्ली एंड आई वाज सो सो बॉइज और एक कान में मैं बाला पहनकर घूमती थी.”

 

दिव्यांका त्रिपाठी की मां नीलम त्रिपाठी बताती हैं, “एन सी सी कैडेट रही है सर्जेंट रही उसकी फायरिंग बहुत अच्छी थी.  रॉयफल शूटिंग बहुत अच्छी थी उसने एक की मतलब बहुत छोटे से उसमें 10 कारतूस फायरिंग की थी और 99 नंबर लेकर आई और उसका रिकॉर्ड आजतक भोपाल रॉयफल क्लव में किसी ने तोड़ नहीं पाया है तो एक उसका माइंड सेट हो गया था कि मैं बड़े होकर आर्मी ऑफिसर बनूंगी और क्योंकि उसको एक आर्मी में ग्लैमर दिखाई देता था तो पूरी मेहनत करती थी और बहुत टफ लाईफ उसने जी है एन सी सी में. 4-4 महीने उसने टेंट में गुजारे हैं एक साल में चार महीने कोई बच्चा टेंट में गुजारे मैं चाहती थी वो रफ एन टफ रहे दरी में सोना उबड़ खाबड़ जमीन में दरी बिछाकर सोना दिन भर परेड करना रॉयफल शूटिंग करना. और इसलिये वो इतनी टफ है आज.”

पहाडों की दुनिया से दिव्यांका त्रिपाठी का खास लगाव रहा है. पहाड़ों में घूमना और ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ना उनका जुनून रहा है. दिव्यांका के इसी जुनून ने उन्हें एक वक्त पर्वतारोहण की ट्रेनिंग लेने के लिए भी मजबूर कर दिया था. उनकी मां बताती है कि जैसे-जैसे दिव्यांका की उम्र बढती जा रही थी उनकी पसंद और उनके शौक भी बदलते चले जा रहे थे. राइफल शूटिंग के अलावा दिव्यांका का दूसरा शौक माउंटेनेयरिंग था और इसीलिए उत्तरकाशी के नेहरु इस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनेयरिंग से उन्होंने बाकायदा पर्वतारोहण की ट्रेनिंग भी हासिल की थी.

 

दिव्यांका त्रिपाठी बताती हैं, “पहाड़ आपको बहुत कुछ सिखाते हैं पहाड़ आपको सिखाते हैं कि डू नॉट क्विट कुछ भी हो जाए आप क्विट मत कीजिए आप नीचे मत देखिए ऊपर की औऱ देखिए और आप को जब लगने लगे कि बस अब मैं एक कदम और आगे नहीं चल सकती वहीं पांच कदम और चलिए पहाड़ों ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है कि नहीं जिंदगी में कितनी भी मुश्किलें आंए कितनी भी रुकावटें आएं पांच कदम और चलूंगी हो सकता है अपनी मंजिल पर पहुंच जाऊं पहाड़ भी ऐसे होते है सो.. इस एडवेंचर ने जितनी भी मैंने एक्सट्रा एक्टिविटी की है इन सबने मुझे एक्सट्रीम कांफिडेंस दिया है.”

 

दिव्यांका त्रिपाठी की कॉलेज टीचर डॉ. शशि राय बताती हैं, “मुझे लगता है कि उसके परिवार को बहुत ज्यादा सपोर्ट रहा उसे कभी भी जरूपत पड़ती है उसके माता -पिता उसके साथ खड़े रहते हैं उसके माता पिता ने कभी उसे किसी काम करने से रोका नहीं बल्कि उसका उत्साह बढ़ाया और मुझे लगता है कि लड़कियां तभी कुछ कर पाती है जब उन्हें परिवार का सपोर्ट मिले औऱ यदि परिवार नहीं चाहें तो लड़की इस ऊंचाई तक पहुंच ही नहीं पाए तो मैं इसका श्रेय उसके परिवार वालों को दूंगी.”

 

स्कूल के दिनों में ही मौज मस्ती के बीच दिव्यांका त्रिपाठी की चाहते जब उन्हें फौजी बनने के अपने इरादे के और करीब ले जा रही थी तभी उनकी जिंदगी ने अचानक करवट बदल ली. दिव्यांका की मां बताती हैं कि जब उन्होनें 12 की परीक्षा पास की थी उसी दौरान एक चैनल के लिए ब्यूटी कॉन्टेस्ट का विज्ञापन निकला था. मां के जोर देने पर अधूरे मन से दिव्यांका ने आखिरी वक्त में इस कॉन्टेस्ट का फॉर्म तो भर दिया लेकिन दूसरी तरफ अपने रुप रंग को लेकर मन में उठे बहुत से सवाल उनके कदम भी रोक रहे थे.

 

दिव्यांका त्रिपाठी की मां नीलम त्रिपाठी बताती हैं, “मैंने कहा चल फॉर्म भर दे कहती अरे मम्मी मैं सुंदर थोड़ी ना हूं मतलब क्योंकि वो ऐसा रफ एंड टफ रहती थी धूप में परेड करना तो काली हो गयी थी एकदम तो हमने कहा तो क्या हुआ जरूरी थोड़ी ना सब लोग सुंदर लोग ही जाते हैं भई आपका दिमाग भी तेज हो क्वेश्चन आंसर राउंड भी होते हैं उसमें भी निकल जाते हैं कहा अच्छा चल भरके देखते हैं क्या होता है उसने फॉर्म भरा रात को 12 बजे. लास्ट डेट थी और उसी समय उसने फॉर्म सब्मिट किया तो नैक्स्ट डे उसका कॉल आ गया कि आप 32 में सेलेक्ट हो गये हैं और आपको दिल्ली आना पड़ेगा.”

 

साल 2004 में जीटीवी चैनल पर इंडियाज बेस्ट सिनेस्टार की खोज नाम का एक टैलेंट शो लांच हुआ था इस शो में उभरते कलाकारों की खोज की जा रही थी और इस कॉन्टेस्ट में पहले नंबर आने वाले मेल और फिमेल कलाकारों को फिल्म में लीड रोड देने का ऐलान भी किया गया था लेकिन इस कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने जब दिव्यांका त्रिपाठी भोपाल से दिल्ली पहुंची तो जैसे उनके होश ही उड़ गए थे. दरअसल इस प्रतियोगिता में कई इंटरनेशनल मॉडल्स भी हिस्सा ले रही थी लेकिन किस्मत शायद दिव्यांका पर मेहरबान थी और इसीलिए जिंदगी की इस पहली ही अहम परीक्षा में वो ब्यूटीफुल स्किन का अवॉर्ड जीतने में कामयाब रही. 

 

दिव्यांका त्रिपाठी बताती हैं, “उसमे तो इंटरनेशनल मॉडल्स आईं थी औऱ मैं तो चकित थी कि अब मैं क्या करूंगी वहां जाकर और जब मैं वहां पहुंची बड़ा सा होटल 5 स्टार. लॉबी में ब्युटिफूल लड़कियां बैठी हैं औऱ एक से बढ़कर एक मॉडल्स. तब मैंने कहा पापा इनके साथ मुझे कंपटिट करना है और मैं तो बड़ी सीधी साधी सी लड़की. पापा ने कहा तुम्हारा एक फैवरेट सीरियल हुआ करता था जस्सी. पापा ने कहा तू मेरी जस्सी है तु जैसी भी दिखेगी सब चलेगा. मेरे लिए सुपरहिट है मैंने कहा ओके डन. उसके बाद कांफिडेटली एंटर की. सब लोगों नें मुझे एक्चुअली ऐसे ऐसे देखा कि कौन नमूनी आ गई है लेकिन उसके बाद मेरा उद्देश्य था कि अब मुझे सब सिखना है. मैं वंहा उस पीजेंट में भी जब तक थी बाकि लड़कियां जीतने आईं थी बाकि लड़किया एक दूसरे को गिरा रही थी कंपटिशन में या फिर पॉलिटिक्स चल रही थी बहुत कुछ था  मेरा सिर्फ एक एंबिशन होता था कि टीचर अभी क्या सिखा रहे हैं और मॉडलिंग इंस्ट्रक्टर है वो क्या सिखा रहे हैं तो मैं सिर्फ और सिर्फ एक शिष्य़ा की तरह वहां जाकर बैठ जाया करती थी.

 

दिव्यांका त्रिपाठी को इंडियन टेलीविजन का फ्रेश और एनरजेटिक फेस माना जाता है. और इसीलिए छोटे परदे की सबसे मशहूर बहू बन चुकी ईशिता भल्ला का उनका किरदार सीरियल ये हैं मोहब्बतें की टीआरपी भी बढा रहा है. ये हैं मोहब्बतें सीरियल में दिव्यांका ने एक ऐसी सौतेली मां का रोल किया है जो परंपरागत सौतेली मां के उलट हर बुरे बर्ताव से दूर नजर आती है. यहीं नहीं शादी के बाद ईशिता भल्ला अपने व्यवहार से सौतेले बच्चों औऱ पूरे परिवार का दिल भी जीत लेती है. हांलाकि इससे विद्या और मिसेज शर्मा के किरदार में भी दिव्यांका के अभिनय को सहारा गया था लेकिन डॉक्टर ईशिता भल्ला के किरदार ने उन्हें देश के घर- घर तक पहुंचा दिया है और इसीलिए वो आज छोटे परदे की सबसे मशहूर बहू बन चुकी है. टेलीविजन सीरियल के इतिहास में शायद ये दूसरी बार हुआ है जब छोटे परदे पर बहू के किसी किरदार को इतनी लोकप्रियता हासिल हुई है. इससे पहले क्योंकि सास भी कभी बहू थी सीरियल में तुलसी वीरानी का किरदार निभा कर स्मृति ईरानी भी बहुत मशहूर हुई थीं लेकिन आज छोटे परदे की सबसे मशहूर बहू ईशिता का किरदार ही दिव्यांका त्रिपाठी की सबसे बडी पहचान बन चुका है.

 

दिव्यांका कहती हैं, “ये है मोहब्बतें मेरी जिंदगी में काफी मायने रखता है पहली बात तो इसलिए क्योंकि एक बहुत ही सक्सेसफुल शो कर रही हूं मैं और ……पहले हमें लगा था कि ‘ये हैं मोहब्बतें’ कैसा टाइटल है ये..but actually मोब्बतों के इंतजार में लोग पूरी पूरी जिंदगी बिता देते हैं और ईशिता के साथ भी वैस ही हो रहा था…सी वॉज लूकिंग फॉर लव औऱ उसको प्यार मिला एक ऐसे इंसान में एक छोटे से बच्चे में उस बच्चे के कारण उस इंसान से उसने शादी की जो आज उसका पति है शो की जो एक छोटी सी अंडरलाइन है कहती है कि मोहब्बत कभी भी किसी से कहीं भी हो सकती है परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती है मोहब्बत तो वैसी ही मोहब्बत में मैं भी विश्वास रखती हूं.

 

दिव्यांका त्रिपाठी को आज टीवी इंडस्ट्री की सबसे चर्चित और कामयाब अभिनेत्रियों में शुमार किया जाता है लेकिन कामयाबी के इस पड़ाव तक पहुंचने के लिए उन्हें मुश्किलों भरा एक लंबा सफर भी तय करना पड़ा है. टेलीविजन सीरियल की शूटिंग के दौरान तेज रौशनी में रोज कैमरे के आगे शॉट देने वाली दिव्यांका का कैमरे की फ्लैश लाइट से पहली बार सामना उनके शहर भोपाल में ही हुआ था.

 

दिव्यांका को पहली कामयाबी साल 2004 में मिली थी. जीटीवी के ब्यूटी कॉन्टेस्ट में ब्यूटीफुल स्किन का अवॉर्ड जीतकर दिव्यांका जब अपने शहर भोपाल वापस लौटी थी तो यहां भी मिस भोपाल का खिताब उन्होनें अपने नाम कर लिया था. भोपाल में जिस सरोजनी नाडयू कॉलेज में उन्होने पढाई की है उस कॉलेज के ब्यूटी कॉन्टेस्ट पर भी उन्होंने अपना कब्जा जमा लिया था.

 

दिव्यांका त्रिपाठी की कॉलेज टीचर याद करते हुए बताती हैं, “वो मिस नूतन रही है और शायद अब उसके जैसी दूरी कोई मिस नूतन नही हो सकती. बेहद खूबसुरत और हमारे यहां मिस नूतन जैसे प्रोफेशनल होता है वैसे ही होता है  और वो आखिर में पांच सवाल पूछते थे उसके बाद समअप होता था शार्टलिस्टिंग होते है वो गर दौर में पहले से बेहतर होकर उभरती आई और उसको जो मिला मिस नूतन वो बिल्कुल सही था.”

 

दिव्यांका त्रिपाठी की मां नीलम त्रिपाठी बताती हैं, “हर जगह आपको सफलता नहीं मिलती है कई जगह ये भी फेलियर रही ऐसा नहीं हर जगह हर कदम में इसने सफलता प्राप्त की और ….उस दिन जब ये रोई आकर कि मम्मी मैंने तो इतने अच्छे से किया था और मुझे ही मिलना चाहिए था ये तो फिर हम लोग उसको बैठ कर समझाते थे कि बेटा देख ये तुम्हारी सीख की एक नई सीढ़ी है. अगर जब तक तुम हारोगी नहीं तो सफलता प्राप्त करोगी तो उसका खुशी जो होती है वो कैसे मिलेगी तो कहती ठीक है फिर उस दिन हम लोग सेलिब्रेट करते थे हम पूरा परिवार मिलकर के आज चल तू हार गयी है ना अपन चलकर कहीं सेलिब्रेट करते हैं.”

 

भोपाल से दिल्ली और फिर भोपाल लौट कर आई दिव्यांका त्रिपाठी की जिंदगी का मकसद अब पूरी तरह से बदल चुका था. स्कूल और कॉलेज के दिनों की वो एडवेंचरस लाइफ कहीं गुम हो चुकी थी. फौज में नौकरी करने का सपना भी पीछे छूट चुका था अब उनके आगे ग्लैमर से भरी रंगीन जिंदगी की उम्मीदें सामने आ खड़ी हुई थीं और फिर एक दिन अचानक दिव्यांका त्रिपाठी की किस्मत की घंटी घनघना उठीं.

 

दिव्यांका त्रिपाठी के पिता नरेंद्र त्रिपाठी कहते हैं, “बेटी ने भोपाल में आकर जैसे ही ग्रेजुएशन किया वैसे ही एक दिन काल आया कि क्या दिव्यांका जी आप बांबें आ सकती है ऑडिशन देने के लिए एकटीवी शो के लीड रोल के लिए तो मैं बिल्कुल हतप्रब रह गया मैंने बोला कि ये कैसे हुआ …तो वो बोले कि अगर आप को आना है तो आप कन्फर्म कर दिजिए और फिर आपको दो दिन के अंदर में आना होगा.”

 

दिव्यांका त्रिपाठी की मां कहती हैं, “मुम्बई से फोन आये तो इतनी सारी अफवायें सुनी होती हैं ना कि पता नहीं कैसे लोग होंगे क्या होगा तो वो नेट पर बैठी और प्रोडक्सन हाउस के बारे में देखा सर्च किया तो उनका एक सीरियल चल रहा था पिया का घर शायद नहीं पता नहीं एक कोई सीरियल था और वो भी टॉप पर था तो देखा कि सही लोग हैं प्रोडक्सन हाउस अच्छा है. जी टी वी के लिये है तो उन्होंने बोला कि आप अपने पेरेंट्स को लेकर आईय़े तो फिर मैं उसके साथ गयी यहां ऑडीशन दिया.”

 

फिल्म नगरी मुंबई से आए उस फोन काल ने दिव्यांका त्रिपाठी के पूरे परिवार को चौंका कर रख दिया था. दिव्यांका के पिता के मुताबिक मुंबई के एक प्रोडक्शन हाउस शकुंतलम फिल्मस की तरफ से उन्हें फोन किया गया था और टीवी सीरियल में काम करने के लिए दिव्यांका को मुंबई बुलाया गया था.

 

दरअसल दिव्यांका त्रिपाठी के साथ टेलेंट हंट शो में हिस्सा लेने वाले एक प्रतियोगी प्रशांत चावला ने ही शकुंतलम प्रोडक्शन हाउस को उनकी ब्यूटी कॉन्टेस्ट वाली सीडी दिखाई थी. जिसके बाद टीवी सीरियल बनाने वाले एक प्रोडक्शन हाउस ने उन्हें ऑडिशन देने मुंबई बुलाया था लेकिन दिव्यांका के लिए मुंबई में कामयाबी की ये राह इतनी आसान भी नहीं थी.

 

दिव्यांका त्रिपाठी बताती हैं, “अचानक से जब ये ऑफर आया मैंने और मम्मी ने पापा कि किसी तरह मनाया किया कि चलो घूम फिर कर ही आएंगे क्या फर्क पड़ता है. हम वोल्वो बस से गए. हम लोगों की वो औकात नहीं थी कि बात-बात में फ्लाइट कि टिकट ले सकें औऱ ट्रैन की टिकट जल्दी मिलते नहीं है. तो मैं और पापा दोनों यहां बैठकर बॉल्वो बस में आए. 13-14 घंटे बैठकर और फिर एक ऑडिशन दिया जिसके बाद उन लोगों ने बोला कि अब आप घर जा सकते हैं. फिर मैंने बोला ओके और फिर बॉल्वो बस हम लोग वापस घर आ गए. हफ्तें भर बाद कॉल आया कि अब आप लोग वापस आईए कास्ट्युम रिहर्सल के लिए फिर पापा को कंविंस करना की दो दिन दुकान बंद करनी पड़ेगी. वापस आए बाल्वो बस में बैठकर औऱ फिर कास्ट्युम ट्रायल किया फिर उन्होंने बोला कि फिर आप वापस जाईए. फिर मुझे लगा कि पता नहीं ये क्या हो रहा है ये बकवास लोग है फिर वापस एक हफ्तें बाद फोन आता है इनका कि अब आप न अपना बोरिया बिस्तर लेकर आ जाईए. i wasss like what… लेकिन वो फिलिगं सिंकिग ही नहीं हो पा रही थी you know कि मैं एक सीरियल में लीड रोल कर रही हूं.”

 

15 साल 2006 में जीटीवी के सीरियल बनू मैं तेरी दुल्हन के जरिए दिव्यांका त्रिपाठी ने छोटे परदे पर अपना पहला कदम रखा था. इस सीरियल की सुपरहिट कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 700 एपीसोड से ज्यादा चलने वाला ये सीरियल करीब तीन सालों तक छोटे परदे पर पर छाया रहा था. इस सीरियल में दिव्यांका त्रिपाठी ने बनारस की एक ऐसी अनपढ़ लड़की विद्या का किरदार निभाया था जिसे शादी के बाद हर कदम पर संघर्षों का सामना करना पड़ता है.

 

दिव्यांका त्रिपाठी उस किरदार के बारे में बताती हैं, “विद्या हमेशा पॉजिटीव सोचती है उसकी जो शादी हुई है जिस घर में हुई है जिस भी हालात में वो रह रही है या उसका पति जैसा भी है वो बहुत खुश है इस बात से और वो अगर अपने पति का ख्याल भी रखती है तो बहुत ही अनकंडीशनली रखती है उसको पूरा भरोसा है कि जो भी हो रहा है उसके साथ में बहुत अच्छे के लिए हो रहा है.”

 

सीरियल बनू मैं तेरी दुल्हन में एक शादीशुदा लड़की की बेचारगी और ससुराल वालों से उसके अधिकार की लड़ाई को बेहद खूबसूरती के साथ दिखाया गया था औऱ यही वजह थी कि विद्या के इस रोल के लिए दिव्यांका त्रिपाठी को जहां कई सारे अवॉर्ड मिले वहीं इस किरदार ने उन्हें रातो-रात छोटे परदे का एक बड़ा सितारा भी बना दिया था.

 

दिव्यांका त्रिपाठी कहती हैं, ” ऐसा कभी नहीं था कि मुझे लगे कि मैं आज स्टार बनूंगी वो पर्दे पर मैं नजर आऊंगी ये टीवी एक्टरेस में आऊंगी कभी नहीं…हाय मैं इतनी सुंदर कैसे लग रही हूं. ओफ्फ हो ये कैसे हो सकता है i mean i ws those kind घर में भी मैं आई वॉज अर्ली डकलिंग मेरी बहन बहुत सुंदर होती थी मेरा भाई बहुत क्युटिपाई था. आई वाज द डॉर्कवन क्योंकि मैं हमेशा एडवेंचर स्पोर्ट में रहती थी तो मैं हमेशा काली काली सी रहती थी तो मैंने कभी सोचा ही नहीं था कि मैं इस फिल्ड मैं आ सकती हूं ये मेरे लिए एक सरप्राइज हो गया ..मतलब ये कहना चाहिए कि लोग कहते हैं न कि आप कैसे पहुंच गए आई जस्ट सेड इन वन लाइन डेट कि मैंने मौकों को सही टाइम पर ग्रैब किया हर चीज करकें देखा.”

 

शरद मलहोत्रा और दिव्यांका त्रिपाठी की पहली मुलाकात भी ‘बनूं मैं तेरी दुल्हन’ सीरियल के दौरान ही हुई थी और इस शो में दोनों की मुख्य भूमिका थी. रील लाइफ की ये जोडी रीयल लाइफ में भी लंबे वक्त तक साथ रही है कई बार इन्हें सार्वजनिक जगहों पर भी साथ देखा गया था इसीलिए बीच में ये खबर आई थी कि दिव्यांका त्रिपाठी अपने लॉंग टर्म ब्वायफ्रेंड शरद मल्होत्रा से शादी करने जा रही है लेकिन फिर मार्च में ये खबर भी आई कि 7 साल की रिलेशनशिप के बाद दिव्यांका का शरद मल्होत्रा से ब्रेकअप हो गया है. जाहिर है इस ब्रेकअप से दिव्यांका का दिल भी टूटा होगा और फिर शूटिंग के दौरान उनका पैरा भी टूट गया लेकिन हमेशा चुनौतियों से जूझने के लिए तैयार रहने वाली दिव्यांका का सोल्जर वाला जज्बा शायद यहां भी उनके काम आ गया और इसीलिए जिस तरह उन्होने अपने हाथों में कभी बंदूक थामी थी उसी तरह रिश्ते की इस टूटन और अपने टूटे पैर को भी उन्होंने बखूबी संभाल लिया है.

 

दिव्यांका बताती हैं, “मुझे जितनी उसकी अहमियत है नेम की फेम की इस पहचान की इतनी ही अहमियत मेरे लिए प्यार की अपनों की परिवार की भी. मुझे लगता है कि इतने सालों में मैंने कहीं न कहीं दिव्यांका को थोड़ा सा खो दिया है. मेरे फ्रैंड्स हमेशा से मेरे माता पिता थे अब उनसे काफी वक्त दूर रहना …….तो वो अकेलापन थोड़ा सा मैंने पा लिया औऱ अब मैं जैसे जैसे बड़ी हो रही हूं मैं एहसास कर रही हूं कि नहीं मैंने बहुत किया है नेम फेम के लिए लेकिन अब मैं दिव्यांका त्रिपाठी के लिए भी कुछ करूंगी. और मैं दिव्यांका को खुश रखने की कोशिश करूंगी वो भी इंसान है और उसे भी खुश रहने का हक है. अब मैं जी रही हूं अब मैं कोशिश करती हूं जो जो काम मैंने इससे पहले नहीं किया है वो करुं.”

 

पिछले करीब दस सालों में टीवी के परदे पर दिव्यांका त्रिपाठी ने कई लोकप्रिय किरदार निभाए हैं. बनू मैं तेरी दुल्हन की विद्या से लेकर कॉमेडी सर्कस और सीरियल मिस्टर और मिसेज शर्मा अलहाबादवाले तक दिव्यांका त्रिपाठी ने अपने अभिनय की अलग छाप भी छोडी है हर नए सीरियल और नए किरदार के साथ वो मशहूर होती चली गई लेकिन ये हैं मोहब्बतें सीरियल में इशिता भल्ला के किरदार ने उन्हें देश के हर घर में एक जाना- पहचाना चेहरा बना दिया है और इसीलिए आज वो बन गई है छोटे परदे की सबसे मशहूर बहू.

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Web Title: Vyakti Vishesh: Divyanka Tripathi
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